रांची :गोडसे वाले गांधी को दिल से नहीं मान रहे : रामेश्वर उरांव

Updated at : 05 Oct 2019 7:12 AM (IST)
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रांची :गोडसे वाले गांधी को दिल से नहीं मान रहे : रामेश्वर उरांव

विधानसभा सभागार में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर व्याख्यान का आयोजन रांची : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि देश में दो तरह की विचारधारा है. एक विचारधारा महात्मा गांधी की और दूसरी गोडसे की है. गांधी की विचारधारा को दुनिया ने आत्मसात किया है. गांधी प्रासंगिक है, इसलिए गोडसे […]

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विधानसभा सभागार में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर व्याख्यान का आयोजन
रांची : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि देश में दो तरह की विचारधारा है. एक विचारधारा महात्मा गांधी की और दूसरी गोडसे की है. गांधी की विचारधारा को दुनिया ने आत्मसात किया है. गांधी प्रासंगिक है, इसलिए गोडसे वाले भी गांधी जी के सामने सर झुका रहे हैं. ये लोग दो अक्तूबर को सर तो झुका लेते हैं, लेकिन गांधी को दिल से नहीं मानते. श्री उरांव शुक्रवार को पार्टी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर ‘वर्तमान सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक परिप्रेक्ष्य में महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे.
विधानसभा सभागार में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ उरांव कहा कि हम राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में गांधी जी के विचारधारा के साथ हैं और उसे लेकर ही आगे बढ़ेंगे.
महात्मा गांधी ने सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए जो दर्शन दिया है, उसी से देश आगे बढ़ सकता है. छुआछूत तो शारीरिक रूप से खत्म हुआ है, लेकिन मानसिकता से भी खत्म करने की जरूरत है. गांव-गरीब के लिए सरकार की आर्थिक नीतियां होनी चाहिए. गांव के उत्थान से ही देश आगे बढ़ेगा.
करिश्माई था महात्मा गांधी का व्यक्तित्व
संत जेवियर कॉलेज के प्राचार्य डॉ इमानुवेल बारला ने कहा कि गांधी का व्यक्तित्व बड़ा ही करिश्माई था. गांधी जी समाज को सकारात्मक दृष्टिकोण से देख कर कहा कि मानव जीवन में इतनी संभावनाएं हैं, जिसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है.
मौके पर नीरज पाठक, श्री प्रकाश, डॉ वीपी शरण, केशव महतो कमलेश, संजय पांडेय, प्रो विनोद सिंह, अनादि ब्रह्म, राणा संग्राम सिंह, प्रदीप तुलस्यान, गीताश्री उरांव, आलोक कुमार दुबे, रवींद्र सिंह, लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ राजेश गुप्ता, डॉ राकेश किरण महतो, अजय नाथ शाहदेव, ज्योति सिंह मथारू, अमूल्य नीरज खलखो, बेलस तिर्की, जगदीश साहू, आदित्य विक्रम जायसवाल, अमिताभ रंजन, प्रेम कुमार सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे.
गांधी के विचार पूरे विश्व में प्रासंगिक : आलमगीर
विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि गांधी के विचार पूरे विश्व में प्रासंगिक है. आज उनके आदर्शों पर सवाल उठाये जा रहे हैं, यही हमारे लिये चुनौती है. साहित्यकार डॉ कमल बोस ने कहा कि गांधी के दर्शन से प्रेरणा मिलती है. इस जीवन में जो अहम और वहम में जी रहे हैं, उनके लिए गांधी का यह विचार था कि अहम को तोड़ना होगा और वहम को छोड़ना होगा. बापू ने प्रेम, करुणा और दया के तीन मंत्र दिये थे. दूरदर्शन के पूर्व निर्देशक प्रमोद कुमार झा ने कहा कि महात्मा गांधी एक चिंतक, एक विचारक, एक सामाजिक कार्यकर्ता थे. गांधी अति सामान्य और साधारण मनुष्य थे लेकिन उनकी सोच असाधारण थी.
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