रांची : ग्लूकोमा दृष्टिहीनता का दूसरा बड़ा कारण

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Sep 2019 9:38 AM

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कार्यशाला – मोतियाबिंद व ग्लूकोमा पर नेत्र विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी रांची : ग्लूकोमा दृष्टिहीनता का दूसरा बड़ा कारण बन गया है. 90 फीसदी मरीजों का समय पर इलाज नहीं होता है, क्याेंकि वह विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास अपनी आंख का इलाज कराने नहीं जाते हैं. समय पर इलाज नहीं होने से रोशनी गायब […]

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कार्यशाला – मोतियाबिंद व ग्लूकोमा पर नेत्र विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी

रांची : ग्लूकोमा दृष्टिहीनता का दूसरा बड़ा कारण बन गया है. 90 फीसदी मरीजों का समय पर इलाज नहीं होता है, क्याेंकि वह विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास अपनी आंख का इलाज कराने नहीं जाते हैं. समय पर इलाज नहीं होने से रोशनी गायब होने लगती है. यह बात ग्वालियर से आये डॉ पुरेेंद्र भसीन ने कही. वह रविवार को झारखंड ओफ्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी व रांची ओप्थाल्मिक फोरम के संयुक्त तत्वावधान में कांके रोड स्थित हॉलिडे होम में मोतियाबिंद व ग्लूकोमा पर आयोजित कार्यशाला मेें बोल रहे थे.

डॉ भसीन ने बताया कि मरीज को जब आंखों की चारों ओर इंद्रधनुष सा दिखने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. यह ग्लूकोमा का लक्षण हो सकता है. मोतियाबिंद के ऐेसे मरीज में पहले आंखों में सिलिंड्रिकल पावर होता है. ऐसे मरीज में टोरिक लेंस के प्रत्यारोपण में ध्यान देना चाहिए.

नयी शोध की दी गयी जानकारी : कोलकाता से आये डॉ सागर भार्गव व डॉ तनुजा काटे ने मोतियाबिंद व ग्लूकोमा पर की गयी नयी शोध और इलाज की पद्धति की जानकारी दी.

ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ भारती कश्यप ने बताया कि प्रीमियम इंट्राओक्युलर लेंस जैसे: मल्टीफोकल, ट्राइफोकल व एक्सटेंडेड डेफ्थ ऑफ इंट्राओक्युलर लेंस व टोरिक लेंस के प्रत्यारोपण के पहले आंख की विजुअल एक्सिस व कॉर्निया की स्थिति को जानना बहुत जरूरी होता है. डॉ बीपी कश्यप ने मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान आंखों के बढ़े हुए प्रेशर को कम करने की जानकारी दी. ग्लूकोमा सर्जरी पर मेडिका की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनिंद्या अनुराधा ने जानकारी दी. सर्जिकल स्किल ट्रांसफर कोर्स पर डॉ विभूति कश्यप व डॉ निधि गडकर कश्यप ने जानकारी दी.

ज्योत से ज्योत जलाओ कार्यक्रम में सभी डॉक्टर जुड़ें : कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए सांसद संजय सेठ ने कहा कि ज्योत से ज्योत जलाओ कार्यक्रम में सभी डॉक्टरों को जुड़ना चाहिए. इससे मरीजों को लाभ पहुंंचेगा. झारखंड ओफ्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि डायबिटीज के मरीजों का सबसे जयादा डाटा विट्रियो रेटिना सर्जन डॉ विभूति कश्यप ने दिया है.

उन्होंने कहा कि डॉ भारती कश्यप ने पेरिस में आयोजित यूरोपियन नेत्र सोसाइटी के वार्षिक सम्मेलन में तीन रिसर्च पेपर को प्रस्तुत कर राज्य का मान बढ़ाया है.मौके पर डॉ वंदना प्रसाद, डॉ एसके मित्रा, डॉ उत्पला चक्रवर्ती, डॉ कुमार साकेत, डॉ रेखा सिंह, डॉ शैलेंद्र कुमार सिंह, डॉ ललित जैन, डॉ विनय गुप्ता, डॉ सीबीपी सिंह, डॉ तनीषा आेझा, डाॅ तनुजा काटे सहित कई डॉक्टर शामिल हुए.

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