फॉरेसिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि: जेपीएससी पूर्व अध्यक्ष सहित पांच पर सीबीआइ का शिकंजा

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
शकील अख्तर
रांची : सीबीआइ ने व्याख्याता नियुक्ति घोटाले की जांच पूरी करने के बाद राज्य सरकार से झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद समेत तत्कालीन पांच अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी है.
सीबीआइ द्वारा भेजे गये दस्तावेज की जांच-पड़ताल के बाद फाॅरेंसिक लैब ने 59 आवेदकों के नंबर बढ़ा कर सफल घोषित किये जाने की पुष्टि की है. इसमें कुछ बड़े अधिकारियों के करीबी रिश्तेदार बताये जाते हैं. फाॅरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर सीबीआइ द्वारा सभी 59 व्याख्याताओं के खिलाफ भी आरोप पत्र दायर किये जाने की संभावना है.
व्याख्याता नियुक्ति में 13 विषयों में व्याख्याता के पद पर मनपसंद आवेदकों को नियुक्त कराने के लिए गड़बड़ी करने की पुष्टि हुई है. इन विषयों में अंग्रेजी, इतिहास, मनोविज्ञान, जंतु विज्ञान, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, हिंदी, रसायन शास्त्र, भौतिकी, संस्कृत, मानव शास्त्र, दर्शन शस्त्र और उर्दू शामिल हैं. उर्दू व संस्कृत के व्याख्याताओं की नियुक्ति में सबसे ज्यादा गड़बड़ी की पुष्टि हुई है.
राज्य सरकार से मांगी अभियोजन स्वीकृति
इनके खिलाफ मांगी अभियोजन स्वीकृति
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद, सदस्य राधा गोविंद नागेश, गोपाल सिंह, शांति देवी और परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी सिंह
फाॅरेंसिक जांच में 59 आवेदकों को पास कराने के लिए नंबर बढ़ाये जाने की पुष्टि
लेक्चरर के रूप में कार्यरत 59 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किये जाने की संभावना
सबसे ज्यादा गड़बड़ी उर्दू और संस्कृत विषय के लेक्चरर की नियुक्ति के लिए हुई
उर्दू विषय के पैनल में शामिल तीन विशेषज्ञों से खाली मार्क्सशीट पर हस्ताक्षर कराया गया
बाद में शांति देवी ने खाली मार्क्सशीट में अंक भरे, मनपंसद उम्मीदवारों को नियुक्त कराया
फाॅरेंसिक जांच में मिली गड़बड़ी
विषय गड़बड़ी
संस्कृत 11
उर्दू 10
अंग्रेजी 06
इतिहास 05
मनोविज्ञान 04
जंतु विज्ञान 04
राजनीति विज्ञान 04
विषय गड़बड़ी
अर्थशास्त्र 03
हिंदी 04
रसायन शास्त्र 02
भौतिकी 02
मानव शास्त्र 02
दर्शन शास्त्र 02
कुल 59
एेसे की गयी गड़बड़ी : शांति देवी ने सीधे हस्तक्षेप किया
फॉरेंसिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि तत्कालीन सदस्य शांति देवी ने उर्दू विषय के लिए व्याख्याताओं की नियुक्ति के मामले में सबसे ज्यादा हस्तक्षेप किया. उर्दू विषय के इंटरव्यू के लिए बनाये गये विशेषज्ञों के पैनल से सादे मार्क्सशीट पर भी हस्ताक्षर करा लिया गया था.
उर्दू के लिए बनाये गये विशेषज्ञों के पैनल में तीन लोगों को शामिल किया गया था. इसमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर की एक यूनिवर्सिटी और रांची यूनिवर्सिटी के एक-एक विशेषज्ञ को शामिल किया गया था. शांति देवी ने तीनों विशेषज्ञों से इंटरव्यू में नंबर देने के लिए तैयार खाली मार्क्सशीट पर हस्ताक्षर करा लिया था.
बाद में शांति देवी ने अपने मनपसंद उम्मीदवारों को नियुक्त कराने के उद्देश्य से खाली मार्क्सशीट में नंबर भर कर सफल घोषित कराया.
फॉरेंसिक जांच में शांति देवी की लिखावट में इंटरव्यू का मार्क्सशीट भरे जाने की पुष्टि हुई है. साथ ही सीबीआइ द्वारा भेजे गये दस्तावेज की जांच-पड़ताल के बाद फाॅरेंसिक लैब ने मार्क्सशीट में काट-छांट कर 59 आवेदकों के नंबर बढ़ाये जाने की पुष्टि की है. उर्दू में 10 और संस्कृत में 11 आवेदकों के इंटरव्यू से संबंधित कागजात में काट-छांट कर नंबर बढ़ाने की पुष्टि हुई है.
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