रांची : नदियों को मिलाने में सहयोग नहीं कर रहे ओड़िशा व बंगाल

Updated at : 22 Aug 2019 8:51 AM (IST)
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रांची : नदियों को मिलाने में सहयोग नहीं कर रहे ओड़िशा व बंगाल

रांची : जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री रामचंद्र सहिस ने बुधवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण की छठी विशेष बैठक में नदियों के जोड़ने के प्रस्ताव पर ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से सहयोग नहीं मिलने का मुद्दा उठाया. कहा कि इस प्रस्ताव पर ओड़िशा एवं बंगाल सरकार की […]

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रांची : जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री रामचंद्र सहिस ने बुधवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण की छठी विशेष बैठक में नदियों के जोड़ने के प्रस्ताव पर ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से सहयोग नहीं मिलने का मुद्दा उठाया.
कहा कि इस प्रस्ताव पर ओड़िशा एवं बंगाल सरकार की सहमति नहीं मिल रही है. मसानजोर जलाशय के मामले में बंगाल सरकार द्वारा तत्कालीन बिहार राज्य (अब झारखंड राज्य) के बीच हुए एकरारनामा के अनुरूप काम नहीं हो रहा है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक की अध्यक्षता की.
मंत्री ने कहा कि झारखंड की शंख नदी में बरटोली गांव के समीप बराज निर्माण कर करीब 41 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के माध्यम से दक्षिण कोयल नदी को जोड़ने का प्रस्ताव है.
दक्षिण कोयल नदी पर पदयार गांव के समीप बराज का निर्माण कर के करीब 76 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के माध्यम से स्वर्ण रेखा नदी नदी को जोड़ने का प्रस्ताव है. बराकर नदी में बाल पहाड़ी के समीप डैम बना कर दामोदर स्वर्णरेखा नदी को 114 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव है.
मंत्री ने कहा कि दामोदर- बराकर, अजय, मयूराक्षी- सीधेश्वरी -नून बिल एवं महानंदा नदी बेसिन के जल उपयोग के लिए तत्कालीन बिहार सरकार एवं पश्चिम बंगाल सरकार के बीच 19 जुलाई 1978 को एकरारनामा किया गया.
इसके अनुसार बंगाल सरकार द्वारा सीधेश्वरी -नून बिल नदी के संगम पर सिद्धेश्वरी -नून बिल डैम का निर्माण प्रस्तावित है. मगर एकरारनामा के अनुरूप बंगाल सरकार द्वारा सीधेश्वरी- नून बिल डैम का निर्माण नहीं किया गया है.
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