नक्सली को ढेर करनेवाले चार जवानों को शौर्य पदक
Updated at : 15 Aug 2019 12:58 AM (IST)
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सलाउद्दीन, हजारीबाग/रांची : जून 2000 में हजारीबाग जिला के चौपारण थाना क्षेत्र अंतर्गत नावागढ़ में माओवादियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी. इसमें एरिया कमांडर लोहा सिंह उर्फ मोहन उर्फ मनोज भुइयां मारा गया था. उसके पास से एक कारबाइन समेत 47 कारतूस बरामद किये गये थे. उस वक्त हजारीबाग की एसपी शोभा अोहतकर […]
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सलाउद्दीन, हजारीबाग/रांची : जून 2000 में हजारीबाग जिला के चौपारण थाना क्षेत्र अंतर्गत नावागढ़ में माओवादियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी. इसमें एरिया कमांडर लोहा सिंह उर्फ मोहन उर्फ मनोज भुइयां मारा गया था. उसके पास से एक कारबाइन समेत 47 कारतूस बरामद किये गये थे. उस वक्त हजारीबाग की एसपी शोभा अोहतकर थीं. उनके तुरंत स्थानांतरण होने के बाद दीपक वर्मा नये एसपी बने.
उन्होंने मुठभेड़ में अदम्य साहस का परिचय देने वाले 1989 बैच के इंस्पेक्टर रामाकांत प्रसाद, 1984 बैच के एसआइ ज्योति कुमार, हवलदार जफर इमाम खान व चौकीदार छोटेलाल पासवान के नाम की अनुशंसा राष्ट्रपति पदक के लिए की थी. रमाकांत प्रसाद वर्तमान में बिहार एसटीएफ में डीएसपी के पद पर कार्यरत हैं.
उन्होंने बताया कि झारखंड में जमशेदपुर, हजारीबाग, धनबाद और बिहार में पटना, आरा और एसटीएफ में कार्यरत रहे हैं. वर्तमान में ज्याेति कुमार मोतीहारी जिला के अरेराज में डीएसपी हैं. नावागढ के चौकीदार छोटेलाल पासवान की मुठभेड़ के दौरान माओवादियों की गोली लगने से मौत हो गयी थी.
अधिकारियों की जुबानी : झारखंड-बिहार से सटे जंगलों व आसपास के गांवों में दो दशक पहले तक माओवादियों का आतंक था. बरही इंस्पेक्टर रमाकांत प्रसाद चौपारण थाना पहुंचे थे. उनके सामने स्थानीय चौकीदार छोटेलाल पासवान ने आतंक के पर्याय बने एरिया कमांडर लोहा सिंह के दस्ते के सक्रिय होने की पुष्टि की.
इसके बाद इंस्पेक्टर रमाकांत, थाना प्रभारी ज्योति प्रकाश, हवलदार जफर इमाम खान, चौकीदार छोटेलाल पासवान समेत पुलिस बल के जवानों ने नावागढ़ के लिए प्रस्थान किया.
सर! यही है लोहा सिंह
घटना स्थल के पास पहुंचते ही चौकीदार जोर चिल्लाया… सर, यही लोहा सिंह है. तब तक लोहा सिंह मोर्चा संभाल चुका था. उसने पास के आम के पेड़ के पीछे छिप कर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने उसे सरेंडर करने को कहा, लेकिन जब उसने फायरिंग जारी रखी, तब पुलिस ने भी मोर्चा संभाला.
इस बीच लोहा सिंह की चली गोली चौकीदार के पेट में लगी. उसे तत्काल चार-पांच पुलिस के जवान उठा कर इलाज के लिए अस्पताल की ओर भागे. जब माओवादियों की ओर से फायरिंग बंद हुई, तब सभी आगे बढ़े. वहां देखा, तो लोहा सिंह गिरा हुआ था. उसे सदर अस्पताल हजारीबाग लाया गया, जहां मौत की पुष्टि हुई.
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