रिम्स में साल भर पहले शुरू हुआ था 100 बेड का पेइंग वार्ड प्राइवेट अस्पतालों जैसी सुविधा का दावा, हालत सरकारी से भी बदतर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Aug 2019 9:11 AM
विज्ञापन
राजीव पांडेय रांची : रिम्स में करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड का पेइंग वार्ड तैयार किया गया है. इसका शुभारंभ जुलाई 2018 में किया गया था. रिम्स प्रबंधन ने पेइंग वार्ड को शुरू करते समय यह दावा किया था कि यहां निजी अस्पतालाें की तरह सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी. एक कमरे […]
विज्ञापन
राजीव पांडेय
रांची : रिम्स में करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड का पेइंग वार्ड तैयार किया गया है. इसका शुभारंभ जुलाई 2018 में किया गया था. रिम्स प्रबंधन ने पेइंग वार्ड को शुरू करते समय यह दावा किया था कि यहां निजी अस्पतालाें की तरह सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी.
एक कमरे के लिए प्रतिदिन 1000 रुपये किराया भी निर्धारित कर दिया गया, लेकिन मौजूदा वक्त में यहां की व्यवस्था सरकारी अस्पताल से भी बदतर है. मरीज को भर्ती होने से लेकर वहां इलाज कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. रात में अगर कोई आपात स्थिति हो जाती है, तो परिजन अपने मरीज को लेकर इमरजेंसी की दौड़ लगाते-लगाते थक जाते हैं.
पेइंग वार्ड में भर्ती होने के लिए मरीज के परिजन को पहले डॉक्टर के नाम आवेदन देना होता है. डॉक्टर से हस्ताक्षर कराने के बाद कमरा अावंटित कराने के लिए उपाधीक्षक के पास जाना पड़ता है. इसके बाद कैश काउंटर से पांच हजार रुपये की पर्ची कटवानी पड़ती है, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने में मरीज की सांस फूलने लगती है. आश्चर्य की बात यह है कि मरीज को तब तक कमरा अावंटित नहीं किया जाता है, जब तक वह यह नहीं लिखकर दे कि मरीज कैदी नहीं है.
पूरी बिल्डिंग में हैं चार लिफ्ट, सभी खराब : मरीजों को वार्ड तक ले आने-ले जाने के लिए यहां चार लिफ्ट लगी हैं. लेकिन, पिछले तीन-चार महीने से एक भी लिफ्ट फिलहाल काम नहीं कर रही है. रिम्स प्रबंधन ने अब तक इन्हें दुरुस्त कराने की जहमत नहीं उठायी है. ऐसे में मरीजों को रिम्स की पुरानी बिल्डिंग से होते हुए कॉटेज की ओर से पेइंग वार्ड तक लाया जाता है.
प्रावधान के बावजूद मरीजों को नहीं मिलता मुफ्त खाना
किराया के रूप में 1000 रुपये देने पर मरीज को खाना मुहैया कराना है. शासी परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया था, लेकिन मरीज को डायट नहीं दी जाती है. पेइंग वार्ड की स्टाफ नर्स कहती हैं कि उनको इसके लिए ऑर्डर की काॅपी नहीं मिली है. किचेन प्रबंधन का कहना है कि नर्स डायट नहीं लिखती हैं, इसलिए खाना नहीं जाता है. इधर, ग्राउंड फ्लोर पर किचेन खोल दिया गया है, लेकिन वह सिर्फ डॉक्टर व स्टाफ के लिए है.
मरीज कम हैं, फिर भी समय नहीं देते स्टाफ
पेइंग वार्ड में 100 मरीज भर्ती करने की क्षमता है, लेकिन विगत डेढ़ साल से मुश्किल से पांच मरीज ही भर्ती रहते हैं. इतने कम मरीज रहने के बावजूद नर्स मरीज को पूरा समय नहीं देते हैं. परिजनों का कहना है कि रिम्स की नर्स अक्सर यह बहना बनाती हैं कि वार्ड में क्षमता से ज्यादा मरीज होने के कारण सही से इलाज नहीं हो पाता है, लेकिन पेइंग वार्ड में तो आधा दर्जन भी मरीज नहीं रहते हैं.
पेइंग वार्ड को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है. मेडिकल ऑफिसर के लिए साक्षात्कार हुआ है. मैनपावर व नर्सिंग की व्यवस्था भी की जायेगी. इसके बाद हम बेहतर सुविधा देंगे.
डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक रिम्स
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










