रांची : सड़क की चौड़ाई ज्यादा दिखा दोगुना टैक्स का नोटिस भेजा
Author Prabhat khabar digital desk
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रांची : वर्ष 2016 में रांची नगर निगम ने होल्डिंग टैक्स को लेकर नया नियम लागू किया था. इसके तहत लोगों को खुद यह बताना था कि उनके मकान का क्षेत्रफल क्या है व घर के सामने की सड़क की चौड़ाई क्या है. नये नियमों के तहत ही लोगों के टैक्स का निर्धारण भी हुआ, […]
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रांची : वर्ष 2016 में रांची नगर निगम ने होल्डिंग टैक्स को लेकर नया नियम लागू किया था. इसके तहत लोगों को खुद यह बताना था कि उनके मकान का क्षेत्रफल क्या है व घर के सामने की सड़क की चौड़ाई क्या है. नये नियमों के तहत ही लोगों के टैक्स का निर्धारण भी हुआ, लेकिन इसमें निगम के टैक्स कलेक्टरों ने खेल कर दिया.
जिन लोगों ने अपने घर के सामने की सड़क की चौड़ाई 15 फीट बतायी थी, उसे टैक्स कलेक्टरों ने 25 फीट दिखा दिया. वहीं जिन लोगों ने अपने भवन को आवासीय बताया था, उनके मकान को कॉमर्शियल में तब्दील कर दिया गया. अब ऐसे लोग गलत टैक्स से बचने के लिए निगम में पिछले एक-डेढ़ साल से आवेदन दे रहे हैं, लेकिन अभी तक निबटारा नहीं हुआ है.
डेढ़ साल से नहीं हुआ आवेदन का निबटारा
केस स्टडी : एक
कोकर चूना भट्ठा मोहल्ले में रहनेवाले रघुनाथ सिंह ने वर्ष 2017 में अपने मकान का सेल्फ असेसमेंट फॉर्म भरा. इसमें उन्होंने अपने घर के सामने की सड़क की चौड़ाई 16 फीट बतायी. एक साल तक उन्होंने टैक्स का भुगतान भी किया, लेकिन वर्ष 2018 में उन्हें नगर निगम से नोटिस आया कि आपको दोगुना टैक्स फाइन के साथ भुगतान करना होगा, क्योंकि आपने अपने घर के सामने की सड़क की चौड़ाई कम बतायी है.
श्री सिंह ने बताया कि निगम के इस नोटिस की सत्यता की जब उन्होंने जांच की, तो पाया कि उनके होल्डिंग के आवेदन पर टैक्स कलेक्टर ने सड़क की चौड़ाई को बढ़ा कर 20-40 फीट कर दिया है. इसलिए निगम उनसे दोगुना टैक्स मांग रहा है.
इसके खिलाफ उन्होंने निगम में आवेदन दिया. लेकिन डेढ़ साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. रघुनाथ सिंह ने कहा कि वे निगम के कार्यालय का चक्कत लगाते-लगाते थक गये हैं़
केस स्टडी : दो
बड़ा तालाब के समीप रहनेवाले सुमित पोद्दार के साथ भी ऐसा ही हुआ. श्री पोद्दार ने अपने आवेदन में मकान की प्रकृति को आवासीय बताया था, लेकिन निगम ने इनके भवन को कॉमर्शियल कर दिया. नतीजा इनके भवन का टैक्स ढाई गुना बढ़ गया. अब श्री पोद्दार टैक्स कम करने के लिए निगम का चक्कर पिछले एक साल से लगा रहे हैं, लेकिन इसमें सुधार नहीं हुआ.
मामले को देखेंगे
मेरी जानकारी में अभी तक इस तरह का कोई आवेदन नगर निगम में लंबित नहीं है. फिर भी अगर किसी का आवेदन लंबित है, तो उसमें संशोधन किया जायेगा. मैं खुद इस मामले को देखूंगा.
रजनीश कुमार, उप नगर आयुक्त
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