झारखंड में कृषि के विकास में बाधाएं दूर की जायेंगी : सुखदेव

Updated at : 20 Jul 2019 7:38 AM (IST)
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झारखंड में कृषि के विकास में बाधाएं दूर की जायेंगी : सुखदेव

रांची : विकास आयुक्त सुखदेव सिंह ने कहा है कि कृषि जोखिम भरा काम है. जोखिम भरा काम करनेवाला व्यक्ति बहादुर होता है. झारखंड में कृषि अहम विषय है. यहां 10 साल के बाद कृषि का महत्व और बढ़ जायेगा. अभी कुछ अवैध खनन और लघु उत्पादों पर निर्भरता के कारण कृषि पर ध्यान नहीं […]

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रांची : विकास आयुक्त सुखदेव सिंह ने कहा है कि कृषि जोखिम भरा काम है. जोखिम भरा काम करनेवाला व्यक्ति बहादुर होता है. झारखंड में कृषि अहम विषय है. यहां 10 साल के बाद कृषि का महत्व और बढ़ जायेगा. अभी कुछ अवैध खनन और लघु उत्पादों पर निर्भरता के कारण कृषि पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यह दिन जल्द ही समाप्त होगा. श्री सिंह शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन के सभागार में कृषकों के संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे.

इसमें इजराइल जानेवाले सभी किसानों के अतिरिक्त हर जिले से दो-दो प्रगतिशील किसान भी आये थे. श्री सिंह ने कहा कि झारखंड में करीब 1200 मिमी बारिश होती है. यहां कृषि लायक अनुकूल मौसम है. इसके विकास के लिए जो अड़चनें हैं, उसे दूर किया जायेगा. इजराइल का सहकारी कृषि भी इसका एक मॉडल हो सकता है.
किसानों के फसल बीमा की किस्त सरकार देगी
कृषि विभाग की सचिव पूजा सिंघल ने कहा कि किसानों के फसल बीमा का किस्त राज्य सरकार देगी. जिन किसानों ने अपने स्तर से फसल बीमा का किस्त जमा कर दिया है, उनको वापस कर दिया जायेगा. इस पर जल्दी ही कैबिनेट में निर्णय हो जायेगा. सरकार किसानों के लिए 100 कोल्ड रूम भी बना रही है.
तीन हजार नये कृत्रिम गर्भाधान केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इससे जानवरों के नस्ल सुधार कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा. सरकार ने तय किया है कि किसानों के पोल्ट्री का शेड अब कृषि विभाग का कल्याण विभाग बनायेगा.
अंडा उत्पादन के क्षेत्र में काफी संभावना
झारखंड आजीविका मिशन के सीइओ राजीव कुमार ने कहा कि झारखंड में हर माह 30 लाख अंडे की खपत है. इसकी तुलना में उत्पादन बहुत ही कम है. कृषि निदेशक छवि रंजन ने कहा कि झारखंड में किसानों के पास छोटे-छोटे खेत हैं.
ज्यादा उत्पादन के लिए सहकारी कृषि बेहतर होगा. किसानों को मिलकर खेती करने की जरूरत है. मौके पर मत्स्य विभाग के निदेशक डॉ एचएन द्विवेदी, पशुपालन निदेशक चितरंजन कुमार, गव्य निदेशक कृष्ण मुरारी, समेति निदेशक सुभाष सिंह और भूमि संरक्षण के उप निदेशक राजेश कुमार सिंह आदि मौजूद थे.
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