रांची : बर्खास्त 42 दारोगा, कंपनी कमांडर व सार्जेंट की पुनर्बहाली का रास्ता साफ
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :19 Jul 2019 6:43 AM
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झारखंड हाइकोर्ट ने एकल पीठ का आदेश बरकरार रखा 2013-14 में बर्खास्त कर दिया था सरकार ने हाइकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज की रांची : राज्य सरकार द्वारा 2013 में सेवा से बर्खास्त किये गये 42 दाराेगा की पुनर्बहाली का रास्ता साफ हो गया है. इसमें सब इंस्पेक्टर, कंपनी कमांडर और सार्जेंट शामिल […]
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झारखंड हाइकोर्ट ने एकल पीठ का आदेश बरकरार रखा
2013-14 में बर्खास्त कर दिया था सरकार ने
हाइकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज की
रांची : राज्य सरकार द्वारा 2013 में सेवा से बर्खास्त किये गये 42 दाराेगा की पुनर्बहाली का रास्ता साफ हो गया है. इसमें सब इंस्पेक्टर, कंपनी कमांडर और सार्जेंट शामिल हैं. हाइकोर्ट ने राज्य सरकार की अोर से दायर विभिन्न अपील याचिकाअों और हस्तक्षेपकर्ताअों की याचिकाएं भी खारिज कर दी. साथ ही हटाये गये 42 दारोगाअों को बहाल करने संबंधी एकल पीठ के आदेश को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा. गुरुवार को जस्टिस एचसी मिश्र और जस्टिस दीपक राैशन की खंडपीठ ने उक्त फैसला सुनाया. पूर्व में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
जस्टिस प्रमथ पटनायक की एकल पीठ ने 2015 में राज्य सरकार की बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया था. पूर्व में सुनवाई के दाैरान प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राहुल कुमार ने खंडपीठ को बताया कि एकल पीठ ने कहा था कि नियुक्ति प्रक्रिया में गलत तथ्य नहीं बताया गया है.
प्रार्थियों का चयन और नियुक्ति गृह विभाग ने किया था. वे प्रशिक्षण ले चुके हैं. भविष्य में होनेवाली नियुक्ति में प्राथमिकता देते हुए उन्हें बहाल किया जाये. राज्य सरकार ने अपील याचिकाएं दायर कर एकल पीठ के आदेश को चुनाैतीदी थी. सरकार का कहना था कि संशोधित मेरिट लिस्ट में 42 नये अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनका प्राप्तांक हटाये गये दारोगाअों से अधिक था. संशोधित लिस्ट में 42 दारोगा मेधा सूची में नीचे आ गये थे. पहले इनकी नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की गयी थी.
384 दारोगाअों की नियुक्ति की गयी थी
चयन समिति के माध्यम से 384 दारोगाअों की नियुक्ति की गयी थी. इसमें मेरिट की अनदेखी कर अभ्यर्थियों का चयन करने का आरोप लगाते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. बाद में कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने दारोगा बहाली का संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार किया. इसमें 42 नये अभ्यर्थी शामिल किये गये, जबकि पूर्व की मेरिट लिस्ट के अनुसार नियुक्त 42 दारोगाअों की सेवा समाप्त कर दी गयी. हटाये गये दारोगाअों ने सरकार के आदेश को चुनाैती दी थी.
वनरक्षियों को द्वितीय एसीपी का लाभ देने का आदेश
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में गुरुवार को वनरक्षियों के द्वितीय एसीपी के मामले में एकल पीठ के आदेश को चुनाैती देनेवाली राज्य सरकार की अपील याचिकाअों पर सुनवाई हुई. जस्टिस एचसी मिश्र व जस्टिस दीपक राैशन की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दिया. साथ ही एकल पीठ के आदेश को सही ठहराते हुए बरकरार रखा. प्रतिवादी की अोर से अधिवक्ता राहुल कुमार ने पैरवी की.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी राज्य सरकार की अोर से अपील याचिकाएं दायर की गयी थी. एकल पीठ के आदेश को चुनाैती दी गयी थी. पूर्व में एकल पीठ ने मैट्रिक पास नहीं करनेवाले वनरक्षियों को द्वितीय सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन (एसीपी) का लाभ देने का आदेश दिया था. सरकार ने कहा था कि जो वनरक्षी नियुक्ति के समय मैट्रिक उत्तीर्ण नहीं है, उन्हें द्वितीय एसीपी का लाभ नहीं दिया जा सकता है. प्रार्थी अवध बिहारी सिंह व अन्य की अोर से रिट याचिका दायर कर सरकार के निर्णय को चुनाैती दी गयी थी.
खूंटी लोस सीट की पुनर्मतगणना मामले में सुनवाई, चुनाव आयोग से मांगा जवाब
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने गुरुवार को खूंटी लोकसभा सीट के चुनाव की पुनर्मतगणना को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग व रिटर्निंग अफसर को जवाब देने का निर्देश दिया. अब अगली सुनवाई सात अगस्त को होगी. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया ने अदालत को बताया कि लोकसभा चुनाव के दाैरान कुल 8.28 लाख मतदान हुआ था. इस दाैरान 1465 वोट अधिक गिने गये थे.
केंद्रीय मंत्री व खूंटी के सांसद अर्जुन मुंडा 1445 वोट के अंतर से चुनाव में विजयी घोषित हुए थे. उन्होंने रिटर्निंग अफसर के समक्ष पुनर्मतगणना कराने के लिए आवेदन दिया, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया. वहीं चुनाव आयोग की अोर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत यह रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.
चुनाव से संबंधित कोई भी विवाद चुनाव याचिका के तहत सुना जा सकता है. इस पर अदालत ने लिखित जवाब देने का निर्देश दिया. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी कालीचरण मुंडा ने रिट याचिका दायर कर खूंटी लोकसभा सीट की पुनर्मतगणना कराने की मांग की है.
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