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रांची : कुष्ठ व टीबी के 33 हजार संदेहास्पद रोगी चिह्नित

Updated at : 14 Jul 2019 2:10 AM (IST)
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रांची : कुष्ठ व टीबी के 33 हजार संदेहास्पद रोगी चिह्नित

राज्य भर में 14 जुलाई तक की जायेगी कुष्ठ व टीबी रोगियों की पहचान रांची : राज्य में टीबी व कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए एक जुलाई से अभियान चल रहा है. 14 जुलाई तक चलनेवाले अभियान में वैसे रोगियों की पहचान की जा रही है, जो इलाजरत नहीं हैं. इधर 11 जुलाई तक […]

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राज्य भर में 14 जुलाई तक की जायेगी कुष्ठ व टीबी रोगियों की पहचान
रांची : राज्य में टीबी व कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए एक जुलाई से अभियान चल रहा है. 14 जुलाई तक चलनेवाले अभियान में वैसे रोगियों की पहचान की जा रही है, जो इलाजरत नहीं हैं. इधर 11 जुलाई तक कुष्ठ के 12,467 तथा टीबी के 21,868 संदेहास्पद रोगी चिह्नित हुए हैं.
कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए करीब 21.54 लाख घरों की करीब 1.05 करोड़ आबादी को अौर टीबी के संदेहास्पद रोगियों की पहचान के लिए 3.65 लाख घरों की 1.88 करोड़ आबादी को कवर किया गया है. अभियान की समाप्ति के बाद 29 जुलाई तक संदेहास्पद रोगियों की स्क्रिनिंग कर वास्तविक संख्या घोषित की जायेगी. स्क्रीनिंग का कार्य भी चल रहा है. अब तक टीबी के 628 वास्तविक मरीजों की पहचान कर ली गयी है.
टीबी की जानकारी देना जरूरी : टीबी अधिसूचित बीमारी है. झारखंड में इसे नौ मई 2018 को अधिसूचित किया गया था. रोगी के घरवालों को इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य है.
ऐसा नहीं करने पर छह माह तक कारावास या जुर्माना या दोनों (आइपीसी-269) तथा अधिकतम दो वर्ष या जुर्माना या दोनों (आइपीसी-270) हो सकता है. किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी, सीएचसी) या जिला अस्पताल को इसकी सूचना दी जा सकती है. ग्रामीण इलाके में सहिया को भी इसकी जानकारी दी सकती है.
कोई दाग हो, तो जांच जरूर करायें, यह मुफ्त है
शरीर पर कोई दाग हो, तो इसकी जांच जरूर करायें. जांच किसी भी सीएचसी, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में मुफ्त करायी जा सकती है. टीबी व कुष्ठ की जांच की निशुल्क सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है.
वहीं जांच पॉजिटिव आने पर दोनों बीमारियों से ग्रसित मरीजों को दवाएं भी मुफ्त दी जाती है. शुरुआत में ही पहचान हो जाये, तो कुष्ठ के रोगी को छह माह जबकि ज्यादा प्रभावित मरीजों को एक साल तक दवा खानी पड़ती है. वहीं शुरुआत में टीबी के मरीजों को भी छह माह तक लगातार दवा खानी होती है.
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