रिम्स में जो दवाएं हैं, वहीं लिखेंगे डॉक्टर, मरीज को कुछ हुआ तो प्रबंधन होगा जिम्मेदार

Updated at : 08 Jun 2019 1:26 AM (IST)
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रिम्स में जो दवाएं हैं, वहीं लिखेंगे डॉक्टर, मरीज को कुछ हुआ तो प्रबंधन होगा जिम्मेदार

रांची : ओपीडी व वार्ड में भर्ती मरीजों को दवाएं लिखने के मुद्दे पर रिम्स प्रबंधन और यहां के डाॅक्टर आमने-सामने हैं. रिम्स टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को सीनियर डॉक्टराें का एक प्रतिनिधिमंडल निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह से मिला. डॉक्टरों ने कहा कि ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को कई बार […]

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रांची : ओपीडी व वार्ड में भर्ती मरीजों को दवाएं लिखने के मुद्दे पर रिम्स प्रबंधन और यहां के डाॅक्टर आमने-सामने हैं. रिम्स टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को सीनियर डॉक्टराें का एक प्रतिनिधिमंडल निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह से मिला. डॉक्टरों ने कहा कि ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को कई बार बाहर की दवा लिखनी पड़ती है. ऐसे में क्या किया जाये.

निदेशक ने कहा कि बहुत जरूरी हुआ, तो आप बाहर की दवा लिखें, लेकिन किसी विशेष दुकान से ही दवा लाने के लिए मरीज या उसके परिजन पर दबाव नहीं बना सकते हैं. हालांकि, करीब एक घंटे तक चली इस वार्ता में डॉक्टरों ने कहा कि जो दवाएं लिखी जाती हैं, वह सब स्टैंडर्ड की नहीं होती हैं. रिम्स निदेशक से मिलने के बाद रिम्स टीचर्स एसोसिएशन ने बैठक भी की.
निदेशक से मिले प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि वह अपना सुझाव रिम्स प्रबंधन को लिखित रूप में शनिवार को देंगे. इधर, एसाेसिएशन के सदस्य डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि रिम्स के डॉक्टरों ने यह फैसला लिया है कि वे केवल रिम्स में मिलने वाली दवाएं ही लिखेंगे. मरीज को अावश्यकता होने पर भी वे बाहर की दवा नहीं लिखेंगे. ऐसे में अगर मरीज को कुछ होता है, तो इसकी जिम्मेदारी रिम्स प्रबंधन की होगी.
रिम्स टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले निदेशक से मिलने पहुंचे थे सीनियर डॉक्टर
मुलाकात के बाद की बैठक कहा: शनिवार को प्रबंधन
को सौंपेंगे लिखित सुझाव
आेपीडी और वार्ड में मरीजों को लिखी बाहर की दवाएं
रिम्स के विभिन्न ओपीडी में शुक्रवार को भी डॉक्टरों ने इलाज कराने पहुंचे मरीजों की पर्ची पर बाहर की दवाएं लिखीं. वहीं, वार्ड में भर्ती मरीजों को बाहर की दवाएं मंगायी गयीं. इधर, रिम्स में विशेष दवा दुकान से दवा मंगाने वाले डॉक्टरों का नाम रिम्स में सरेआम चर्चा में रहता है. नॉन-क्लिनिकल के डॉक्टर तो सरेआम उनका नाम लेते रहते हैं. सूत्रों की मानें तो सबसे ज्यादा चर्चा हड्डी विभाग, न्यूरो विभाग, मेडिसिन व यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टराें की रहती है.
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