रांची : सीआइपी निदेशक सहित छह अफसरों ने लिया "40 लाख से अधिक परिवहन भत्ता
Updated at : 14 Apr 2019 9:24 AM (IST)
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मंत्रालय द्वारा कराये गये ऑडिट की रिपोर्ट में हुआ खुलासा रांची : केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीअाइपी) के छह अधिकारियों को परिवहन भत्ता मद में 40 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है. इसमें पूर्व व वर्तमान निदेशक भी शामिल हैं. मंत्रालय द्वारा कराये गये ऑडिट रिपोर्ट में इस बात की जानकारी मिली है. […]
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मंत्रालय द्वारा कराये गये ऑडिट की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रांची : केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीअाइपी) के छह अधिकारियों को परिवहन भत्ता मद में 40 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है. इसमें पूर्व व वर्तमान निदेशक भी शामिल हैं. मंत्रालय द्वारा कराये गये ऑडिट रिपोर्ट में इस बात की जानकारी मिली है. साथ ही अधिक भुगतान लेने वाले अधिकारियों से वसूली की अनुशंसा की गयी है.
मंत्रालय द्वारा कराया गया इंटरनल ऑडिट वित्तीय वर्ष 2012-2017 तक की अवधि का है. इसमें परिवहन भत्ता में हुई गड़बड़ी का मामला पकड़ में अाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआइपी में 10 हजार रुपये ग्रेड पे पर कार्यरत अधिकारियों के लिए सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल का प्रावधान है. सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए 1600 रुपये प्रति माह परिवहन भत्ता देने का प्रावधान भारत सरकार ने किया है.
इसके विपरीत सीआइपी प्रबंधन ने सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करने या बदले में सात हजार रुपये प्रतिमाह परिवहन भत्ता लेने की पेशकश की. अधिकारियों ने सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल के बदले सात हजार रुपये प्रतिमाह की दर से परिवहन भत्ता लेने का चुनाव किया और 1600 रुपये प्रतिमाह के बदले सात हजार रुपये लिया. ऑडिट में यह भी पाया गया है कि संस्थान के चंद डॉक्टर ही सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल करने की अहर्ता पूरी करते थे. इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करने या सात हजार रुपये प्रतिमाह की दर से परिवहन भत्ता लेने की पेशकश की गयी.
ऐसे में कुछ डॉक्टरों ने सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करने के बदले परिवहन भत्ता लेना उचित समझा. वहीं, कुछ अधिकारियों ने सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल भी किया और परिवहन भत्ता भी लिया. इन अधिकारियों को 2006 से 2014 के बीच इस राशि का भुगतान किया गया है. सबसे अधिक राशि का भुगतान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ एस हक निजामी को किया गया है. जिनसे वसूली की अनुशंसा हुई है, उसमें दो अफसरों को छोड़ शेष रिटायर हो गये हैं.
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