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रांची : लाचार रहे सांसद, मैं रचना और संघर्ष में लगा रहा : सुबोधकांत

Updated at : 10 Apr 2019 7:59 AM (IST)
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रांची : लाचार रहे सांसद, मैं रचना और संघर्ष में लगा रहा : सुबोधकांत

रांची : उम्मीदवार सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि पिछले पांच वर्ष में एमपी ने क्या किया, इसका आकलन किया जाये, तो साफ हो जायेगा कि रामटहल चौधरी लाचार सांसद रहे. केंद्र और राज्य में उनकी सरकार थी. लेकिन वह बेबस ही दिखे. उनके बयान और सरकार को लिखी गयी चिट्ठी यही बयां करते है़ं […]

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रांची : उम्मीदवार सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि पिछले पांच वर्ष में एमपी ने क्या किया, इसका आकलन किया जाये, तो साफ हो जायेगा कि रामटहल चौधरी लाचार सांसद रहे. केंद्र और राज्य में उनकी सरकार थी. लेकिन वह बेबस ही दिखे. उनके बयान और सरकार को लिखी गयी चिट्ठी यही बयां करते है़ं कोई सांसद सोशल गारंटी और आधारभूत सुविधा के लिए काम करता है. बुनियादी समस्याओं को दूर करने की पहल करता है. लेकिन इन दोनों मोर्चे में सांसद विफल रहे.
राशन, वृद्धापेंशन या फिर लाल-पीला कार्ड हो, स्वास्थ्य सुविधा हो आम लोग ब्लॉक का चक्कर लगाते रहे. ब्लॉक में सिस्टम ध्वस्त रहा. किसानों को फसल बीमा नहीं मिला. 12 हजार स्कूल बंद किये गये. सरकार का लॉजिक था कि स्कूल में छात्र नहीं हैं, गांव का तर्क है कि स्कूल में शिक्षक नहीं है. पारा शिक्षकों को गुंडा बता दिया गया. पेयजल का सवाल हो या फिर बिजली का मामला, जनता त्रस्त रही. सांसद लाचार बन कर अपनी सरकार में रह गये. श्री सहाय ने कहा कि उनका पांच वर्ष या फिर संसदीय कार्यकाल रचना और संघर्ष में गुजरा. मैंने अपने संसदीय कार्यकाल में राजधानी में पीने के पानी के लिए प्रयास किया.
टैंकर से पानी सप्लाई, टावर, मुहल्ले में टैंक की व्यवस्था की. राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण में काम हुआ. मैंने बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना अपना मिशन बनाया. रांची को फूड पार्क दिया. सेंट्रल यूनिवर्सिटी, लॉ कॉलेज, आइआइएम लाया. एनडीए की सरकार ने उर्दू विश्वविद्यालय के लिए 10 एकड़ जमीन नहीं दी. फूड पार्क का ताला नहीं खुला.
श्री सहाय ने कहा कि आज जो यूपीए की गोलबंदी दिख रही है, वह साझा संघर्ष का परिणाम है. सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन हो, बड़कागांव, रामगढ़ में गोलीकांड हो या फिर गोड्डा में विस्थापितों के साथ अन्याय का मामला हो, मैंने साझा संघर्ष का प्रयास किया.
जनता के साथ संघर्ष में मेरा पूरा समय गुजरा. विपक्ष को एकजुट करने के लिए प्रयास किया. 2019 का चुनाव दो स्तर पर लड़ा जायेगा. राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी की तानाशाही के खिलाफ और झारखंडी आवाज को बुलंद करने की लड़ाई होगी. रांची में एक कार्यकर्ता की तरह सुलभ रहूंगा़
रांची लोकसभा चुनावी परिणाम एक नजर
वर्ष विजेता प्राप्त वोट उप विजेता प्राप्त वोट
2004 सुबोधकांत सहाय (कांग्रेस) 284035 रामटहल चौधरी(भाजपा) 268614
2009 सुबोधकांत सहाय(कांग्रेस) 310499 रामटहल चौधरी 297149
2014 रामटहल चौधरी (भाजपा) 448729 सुबोधकांत सहाय 249426
पारा शिक्षकों को हटाने का विरोध किया, इसी का खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा : रामटहल
क्षेत्र में व्याप्त बुनियादी समस्याओं को दूर करने में विफल रहे रामटहल चौधरी : सुबोधकांत बाहरियों की बहाली हो या सीएनटी-एसपीटी का मामला, हर समय सरकार को सुझाव दिया : चौधरी
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