रांची : रिनपास ने बिहार सरकार से मांगे अपने "70 करोड़
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Mar 2019 9:41 AM (IST)
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रांची : रिनपास में बिहार के मानसिक रोगियों का इलाज किया गया. इस एवज में अब तक 70.13 करोड़ रुपये रिनपास का बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के पास बकाया हो गया है. रिनपास प्रशासन पिछले आठ वर्षों से बकाया राशि मांगने के लिए बिहार सरकार से पत्राचार कर रहा है, लेकिन राशि नहीं मिल […]
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रांची : रिनपास में बिहार के मानसिक रोगियों का इलाज किया गया. इस एवज में अब तक 70.13 करोड़ रुपये रिनपास का बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के पास बकाया हो गया है.
रिनपास प्रशासन पिछले आठ वर्षों से बकाया राशि मांगने के लिए बिहार सरकार से पत्राचार कर रहा है, लेकिन राशि नहीं मिल पा रही है. रिनपास के निदेशक डॉ सुभाष सोरेन ने पुन: बिहार के स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेज कर राशि देने का आग्रह किया है. बिहार सरकार द्वारा राशि नहीं दिये जाने की स्थिति में हर दिन बकाया भी बढ़ रहा है.
रांची इंस्टीट्यूट अॉफ न्यूरो साइकेट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास) मानसिक रोग अस्पताल में हर दिन पहुंचने वाले रोगियों में आधे से ज्यादा मरीज बिहार के होते हैं. रिनपास में बिहार राज्य से आये हुए रोगियों को ओपीडी में इलाज कर मुफ्त दवा भी दिया जाता है, लेकिन इसका कोई चार्ज बिहार सरकार पर नहीं करता है. वहीं, बिहार राज्य से भर्ती होनेवाले रोगियों के इलाज में हुए खर्च का प्रत्येक दिन 900 रुपये प्रति मरीज चार्ज करता है.
यह राशि एक अगस्त 2011 से 31 दिसंबर 2018 तक बिहार सरकार पर बकाया है. पिछली बार बिहार सरकार ने सात अगस्त 2015 को सात करोड़ 11 लाख 99 हजार 300 रुपये रिनपास को भुगतान किया था. यह राशि एक दिसंबर 2003 से 31 जुलाई 2011 तक की थी. इसके बाद से बिहार सरकार ने भुगतान करना बंद कर दिया है. बिहार से लगभग 200-250 मरीज प्रतिदिन रिनपास में इलाज के लिए आते हैं.
क्या कहते हैं निदेशक : रिनपास के निदेशक डॉ सुभाष सोरेन ने कहा कि रिनपास में मरीजों के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. ओपीडी से लेकर इंडोर (वार्ड) तक में बिहार के मानसिक रोगियों के इलाज के बाद अब बिहार सरकार इलाज में हुए खर्च का 70.13 करोड़ रुपये नहीं दे रही है. बकाया राशि 31 दिसंबर 2018 तक की है. रिनपास द्वारा कई बार इसकी मांग की गयी, लेकिन राशि नहीं मिल पा रही है. समुचित राशि नहीं मिलने पर मरीज के इलाज में तकनीकी रूप से परेशानी होती है.
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