रांची : 10 दिनों बाद अपहर्ताओं के चंगुल से भाग निकले व्यवसायी चित्तरंजन सिंह

Updated at : 12 Mar 2019 9:39 AM (IST)
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रांची : 10 दिनों बाद अपहर्ताओं के चंगुल से भाग निकले व्यवसायी चित्तरंजन सिंह

रांची : एक मार्च को आरा से अगवा अपर बाजार (रांची) के व्यवसायी चित्तरंजन सिंह (49 वर्ष) 10 दिनों बाद अपराधियों के चंगुल से भाग निकले. रविवार की रात वह रेलवे लाइन के किनारे चलते हुए सोमवार की सुबह बिहटा थाना (पटना) पहुंचे. उन्होंने थानेदार को आपबीती बतायी. इसके बाद थानेदार ने आरा पुलिस को […]

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रांची : एक मार्च को आरा से अगवा अपर बाजार (रांची) के व्यवसायी चित्तरंजन सिंह (49 वर्ष) 10 दिनों बाद अपराधियों के चंगुल से भाग निकले. रविवार की रात वह रेलवे लाइन के किनारे चलते हुए सोमवार की सुबह बिहटा थाना (पटना) पहुंचे. उन्होंने थानेदार को आपबीती बतायी. इसके बाद थानेदार ने आरा पुलिस को सूचना दी. साथ ही व्यवसायी को उसकी पत्नी पूजा सिंह और ससुर हरिकिशोर सिंह से फोन पर बात करा दी.

वहीं दूसरी ओर आरा के नवादा थाना की पुलिस चित्तरंजन को अपने साथ ले गयी. सोमवार की देर शाम ससुर हरिकिशोर सिंह भी अपने रिश्तेदार को लेकर नवादा थाना पहुंचे. वह चित्तरंजन को लेकर रांची के लिए निकल चुके हैं. चित्तरंजन मूलत: आरा के गजराजगंज थाना के मसाढ़ गांव के रहनेवाले हैं.

अशोक ने फोन कर बुलाया था आरा : अगवा व्यवसायी चित्तरंजन ने नवादा पुलिस को बताया कि ग्रामीण अशोक सिंह ने फोन कर उन्हें एक मार्च को आरा बुलाया था. वह सुबह करीब 6.30 बजे आरा बस स्टैंड पहुंचे. उन्होंने अपनी पत्नी को फोन कर आरा पहुंचने की सूचना दी. थोड़ी देर बाद ही एक स्कॉर्पियो से दो लोग उतरे और उसका अपहरण कर लिया. वे लोग 10 दिनों तक मुझे अलग-अलग ठिकानों पर रखा. रविवार की रात करीब 12 बजे मौका देख उनके चंगुल से भाग निकला और बिहटा थाना पहुंच गया. आरा पुलिस ने व्यवसायी के फोन का सीडीआर निकाला. इसके आधार पर पता चला कि ग्रामीण अशोक सिंह ने फोन कर व्यवसायी चित्तरंजन सिंह को आरा बुलाया था.

जमीन दलाल कल्लू है गायब : पुलिस की पड़ताल में यह बात भी सामने आयी है कि जिन चार लोगों ने पूर्व में व्यवसायी चित्तरंजन सिंह से जबरन जमीन का एग्रीमेंट कराया था, उनमें से एक जमीन दलाल कल्लू एक मार्च से ही गायब है.

90 डिसमिल जमीन है विवाद की वजह, सौतेले भाइयों से हुई थी पूछताछ : आरा जिले के गजराजगंज थाना क्षेत्र में करीब 90 डिसमिल जमीन है. इसमें चित्तरंजन सिंह का आधा हिस्सा है. वहीं 45 डिसमिल जमीन इनके दोनों सौतेले भाइयों का है. राष्ट्रीय राजमार्ग निकल जाने से जमीन की कीमत करोड़ों हो गयी है. दोनों सौतेले भाई रांची के अपर बाजार में ही रहते हैं. वे उक्त जमीन को बेचने के लिए आरा गये हुए थे. दोनों में से किसी ने चित्तरंजन सिंह को इसकी जानकारी नहीं दी थी. वहीं ग्रामीण अशोक सिंह ने 28 फरवरी को चित्तरंजन सिंह को फोन कर कहा था कि तुम्हारे दोनों भाई अपने हिस्से की जमीन बेचने आरा आये हैं.

उसने कहा कि हो सकता है कि तुम्हारे हिस्से की जमीन भी दोनों बेच दे. इसके बाद ही चित्तरंजन सिंह आनन-फानन में आरा गये थे. यह बात भी सामने आ रही है कि दोनों सौतेले भाइयों ने अपने हिस्से की जमीन किसी और को एक मार्च को रजिस्ट्री कर दी है. मामले में गजराज गंज पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है.

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