रांची : सरावगी बंधुओं की कंपनी बद्री उद्योग नीलाम होगी

Updated at : 23 Feb 2019 2:22 AM (IST)
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रांची :  सरावगी बंधुओं की कंपनी बद्री उद्योग नीलाम होगी

शकील अख्तर, रांची : बैंक ऑफ इंडिया ने सरावगी बंधुओं की कंपनी बद्री केदार उद्योग को नीलाम करने और निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का फैसला किया है. बैंक ने कंपनी द्वारा की गयी 13.19 करोड़ रुपये की जालसाजी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला किया है. उल्लेखनीय है कि सरावगी […]

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शकील अख्तर, रांची : बैंक ऑफ इंडिया ने सरावगी बंधुओं की कंपनी बद्री केदार उद्योग को नीलाम करने और निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का फैसला किया है. बैंक ने कंपनी द्वारा की गयी 13.19 करोड़ रुपये की जालसाजी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला किया है.

उल्लेखनीय है कि सरावगी बंधुओं द्वारा की गयी बैंक जालसाजी के मामले में सीबीआइ तीन प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है. साथ ही प्रवर्तन निदेशालय(इडी) ने भी मनी लाउंड्रिंग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है. बद्री केदार उद्योग का अकाउंट एनपीए होने के सात महीने बाद नेशनल बैंकिंग ग्रुप ने इसके फॉरेंसिक ऑडिट का फैसला किया. फॉरेंसिक ऑडिट की जिम्मेदारी कोलकाता के मेसर्स पीएस राय एंड एसोसिएट को सौंपी गयी थी.

ऑडिटर ने सितंबर 2018 में फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट बैंक को सौंपी. इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि कंपनी के निदेशकों ने इरादतन धोखाधड़ी की है.
2015 में 15 करोड़ की क्रेडिट लिमिट दी गयी थी कंपनी को : बता दें कि अमित सरावगी और स्वाति सरावगी कंपनी के निदेशक हैं. कंपनी का 14.50 प्रतिशत शेयर अमित सरावगी के पास और 7.25 प्रतिशत शेयर स्वाति सरावगी के पास है.
इसके अलावा विधि अग्रवाल के पास 53 प्रतिशत, सरावगी बिल्डर्स एंड प्रोमोटर्स के पास 24.47 प्रतिशत और टर्फ एडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग के पास 0.78 प्रतिशत शेयर है. फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2011 में यह कंपनी बनी. कंपनी को जून 2015 में 15 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट दी गयी थी. मार्च 2018 में यह अकाउंट एनपीए हो गया.
सरफेसी एक्ट 2002 के तहत कंपनी को नीलाम करने का फैसला : जांच में यह पाया गया कि बद्री केदार उद्योग ने 2015-17 की अवधि में 140.92 करोड़ रुपये के कपड़े आदि की खरीद दिखायी है. साथ ही 2015-18 की अवधि में बकायेदारों के कुल 92.47 करोड़ रुपये का भुगतान दिखाया है. दूसरी तरफ इसी अवधि में 37.33 करोड़ का भुगतान ऐसी कंपनियों को किया है, जिनका टेक्सटाइल के व्यापार से कोई लेना-देना नहीं है.
ऑडिट में वर्णित तथ्यों के बैंक ने सरफेसी एक्ट 2002 के तहत बद्री उद्योग कंपनी को नीलाम करने का फैसला किया है. साथ ही कंपनी के निदेशकों और पश्चिम बंगाल के चार गारंटरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का फैसला किया है. बैंक ने सरावगी बंधुओं की कंपनी द्वारा की गयी इस जालसाजी की सूचना रिजर्व बैंक और मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के निदेशक( सीरियस फ्रॉड इंवेस्टीगेशन ऑफिस) को देने का फैसला किया है.
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