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रांची : नेशनल गेम्स गड़बड़ी मामले में नहीं पहुंचे बंधु तिर्की, जारी होगा नोटिस

Updated at : 07 Feb 2019 7:12 AM (IST)
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रांची : नेशनल गेम्स गड़बड़ी मामले में नहीं पहुंचे बंधु तिर्की, जारी होगा नोटिस

रांची : नेशनल गेम्स गड़बड़ी मामले में पूर्व खेल मंत्री बंधु तिर्की पूछताछ के लिए बुधवार तक एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) नहीं पहुंचे. इसको देखते हुए एसीबी फिर से बंधु तिर्की को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब करेगी. वरीय अधिकारी ने इस संबंध में अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया है. पूर्व मंत्री आय से […]

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रांची : नेशनल गेम्स गड़बड़ी मामले में पूर्व खेल मंत्री बंधु तिर्की पूछताछ के लिए बुधवार तक एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) नहीं पहुंचे. इसको देखते हुए एसीबी फिर से बंधु तिर्की को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब करेगी. वरीय अधिकारी ने इस संबंध में अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया है. पूर्व मंत्री आय से अधिक संपत्ति मामले में जब रांची के बिरसा केंद्रीय कारा, होटवार में बंद थे, तब 24 जनवरी को एसबी की टीम उनसे पूछताछ करने गयी थी.
उस दौरान बंधु तिर्की की ओर से कोई खास जानकारी एसीबी को नहीं दी गयी. बंधु ने मामले में विस्तार से जानकारी देने के लिए एसीबी के अधिकारियों से दो-तीन दिनों का समय यह कहते हुए मांगा था कि मामला पुराना है. रिकाॅर्ड देखने के बाद ही विस्तार से मामले में जानकारी दी जायेगी. लेकिन वे दिये गये समय पर एसीबी मुख्यालय नहीं पहुंचे. यही वजह है कि एसीबी फिर से नोटिस जारी कर बंधु तिर्की काे पूछताछ के लिए बुलायेगी.
उल्लेखनीय है कि नेशनल गेम्स के दौरान धनबाद में दो स्क्वैश कोर्ट के निर्माण में वित्तीय अनियमितता की बात सामने आयी थी. स्क्वैश कोर्ट का निर्माण मुंबई की जाइरेक्स इंटरप्राइजेज नामक कंपनी ने किया था.
इसके लिए कंपनी ने 1,44,32,850 रुपये का प्राक्कलन प्रस्तुत किया. आयोजन समिति के महासचिव एसएम हाशमी ने चार अक्तूबर 2008 को कला संस्कृति विभाग के सचिव को प्राक्कलित राशि का आवंटन स्क्वैश रैकेट फेडरेशन ऑफ इंडिया को देने का अनुरोध किया. उक्त प्रस्ताव पर निदेशक एवं सचिव की अनुशंसा के बाद विभागीय मंत्री के पास अनुमोदन की फाइल भेजी गयी.
संबंधित फाइल को 20 अक्तूबर 2008 को तत्कालीन खेलमंत्री बंधु तिर्की ने अनुमोदित किया था. इसी आधार पर बाद में जाइरेक्स इंटरप्राइजेज को स्क्वैश कोर्ट निर्माण के एवज में 1,44,32,850 रुपये भुगतान का नीतिगत निर्णय लिया गया था. बताया जाता है कि कंपनी को अग्रिम 50 लाख रुपये दिये गये, लेकिन बाद में रुपये भुगतान से संबंधित प्रस्ताव की घटनोत्तर स्वीकृति नहीं ली गयी, इस कारण मामले में वित्तीय अनियमितता की बात सामने आयी.
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