रांची : टेंडर में 12 प्रतिशत की राशि वसूलते हैं जिला परिषद के अभियंता

Published at :24 Jan 2019 3:14 AM (IST)
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रांची : टेंडर में 12 प्रतिशत की राशि वसूलते हैं जिला परिषद के अभियंता

रांची : जिला परिषद में छिड़े घमसान पर बुधवार को जिला परिषद अध्यक्ष सुकरा सिंह मुंडा और उपाध्यक्ष पार्वती देवी ने परिषद के जिला अभियंता के कार्यशैली पर सवाल उठाया है. अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि जिला परिषद से निष्पादित होनेवाले टेंडर में जिला अभियंता 12 प्रतिशत की राशि वसूलते हैं. अभियंता […]

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रांची : जिला परिषद में छिड़े घमसान पर बुधवार को जिला परिषद अध्यक्ष सुकरा सिंह मुंडा और उपाध्यक्ष पार्वती देवी ने परिषद के जिला अभियंता के कार्यशैली पर सवाल उठाया है. अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि जिला परिषद से निष्पादित होनेवाले टेंडर में जिला अभियंता 12 प्रतिशत की राशि वसूलते हैं.
अभियंता यह कह कर राशि वसूलते हैं कि इसका हिस्सा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य वरीय पदाधिकारियों को दिया जाता है. जबकि, हकीकत इसके उलट है. अभियंता की इस कार्यशैली से जिला परिषद के प्रतिष्ठा में गिरावट आयी है. जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने बताया कि संवेदकों की शिकायत सुन कर हमने एक बार जिला अभियंता को अपने कार्यालय में बुलाकर इस संबंध में बात करने का प्रयास किया. इस पर जिला अभियंता ने दो टूक जवाब दे दिया. कहा कि टेंडर के संबंध में आपको कोई जानकारी देने के लिए हम अधिकृत नहीं हैं. इसलिए इस संबंध में हम कोई बात नहीं करेंगे.
जांच करें उपायुक्त, दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने कहा कि जिला परिषद से सभी टेंडर ऑनलाइन निकाले जाने हैं. लेकिन, जिला अभियंता ने चहेतों को टेंडर देने के लिए ऑफलाइन टेंडर निकाला. इसकी जानकारी भी लोगों को नहीं थी. आखिर ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा क्या थी. वे किसे लाभ पहुंचाना चाहते थे. इसलिए हमने इसकी शिकायत उपायुक्त से की है. उपायुक्त इसकी जांच करें. दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा.
बिल पास कराने के लिए वसूला जाता है पांच प्रतिशत
अध्यक्ष उपाध्यक्ष ने कहा कि परिषद में भ्रष्टाचार इस कदर घर कर गया है कि टेंडर आवंटन के समय 12 प्रतिशत की राशि तो वसूली जाती ही है. जब ठेकेदार के बिल भुगतान के लिए चेक काटा जाता है, तब पांच प्रतिशत की राशि संवेदकों से वसूली जाती है. लेकिन हम सभी विवश हैं. क्योंकि ऐसे अभियंताओं को टॉप लेवल के अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है.
फाउंड्री फोर्ज को-ऑपरेटिव सोसाइटी का 14 वर्षों से अॉडिट नहीं, प्रबंध समिति भंग
रांची जिला सहकारिता पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
अंकेक्षण समिति गठित
जिला सहकारिता पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर निबंधक सहयोग समितियां झारखंड ने सोसाइटी के वर्ष 2004 से अबतक वैधानिक अॉडिट कराने के लिए एक अंकेक्षण दल का गठन किया है. इसके अध्यक्ष सहयोग समिति के जिला अंकेक्षण पदाधिकारी अनुज कुमार सिंह बनाये गये हैं. अनुमंडल अंकेक्षण पदाधिकारी अनिल कुमार व वरीय अंकेक्षण पदाधिकारी अश्विनी कुमार सदस्य बनाये गये हैं.
विशेष पदाधिकारी नियुक्त
निबंधक सहयोग समितियां सुचित्रा सिन्हा ने सोसाइटी के लिए विशेष पदाधिकारी सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र रांची की व्याख्यता आशा टोप्पो को नियुक्त कर दिया है. विशेष पदाधिकारी समिति के रूटीन कार्यों का संचालन करेंगी. विशेष पदाधिकारी से 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट भी मांगी गयी है.
ट्रैफिक पुलिस भी नहीं रोक पा रही ई-रिक्शा चालकों की मनमानी
राजधानी रांची की ट्रैफिक व्यवस्था यूं ही खस्ताहाल नहीं है. यहां सड़कों पर चलने वाले ई-रिक्शा चालकों की मनमानी भी जाम की सबसे बड़ी वजह हैं. जहां मन किया वहीं रिक्शा रोक कर यात्रियों को बैठा लिया या उतार दिया. अचानक इनके रुकने की वजह से कई बार पीछे चल रहे वाहन चालक दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं. तस्वीर अलबर्ट एक्का चौक की है, जो सबसे व्यस्त रहने वाला चौक है. यहां ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में ही ई-रिक्शा चालक रिक्शा रोक कर यात्रियों को बैठाते हैं. इनके ऐसा करने से अक्सर यहां जाम की स्थिति बन रहती है. ट्रैफिक पुलिस भी इन ई-रिक्शा चालकों की मनमानी रोक पाने में नाकाम साबित हो रही है.
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