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बकोरिया कांड में पलामू के तत्कालीन डीएसपी व सीआइडी के सुपरविजन से उठे सवाल

Updated at : 19 Dec 2018 9:06 AM (IST)
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बकोरिया कांड में पलामू के तत्कालीन डीएसपी व सीआइडी के सुपरविजन से उठे सवाल

डीएसपी : रात 12:15 बजे दी गयी सूचना सीआइडी : रात के 1:15 बजे बताया गया रांची : आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा ओपी क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित पुलिस मुठभेड़ का दावा पुलिस द्वारा किया जाता रहा है. घटना के बाद पलामू के तत्कालीन डीएसपी मुख्यालय प्रथम हीरालाल रवि ने आठ […]

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डीएसपी : रात 12:15 बजे दी गयी सूचना सीआइडी : रात के 1:15 बजे बताया गया
रांची : आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा ओपी क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित पुलिस मुठभेड़ का दावा पुलिस द्वारा किया जाता रहा है. घटना के बाद पलामू के तत्कालीन डीएसपी मुख्यालय प्रथम हीरालाल रवि ने आठ अक्तूबर 2015 को अपना सुपरविजन रिपोर्ट जारी किया था.
अपने सुपरविजन रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि मुठभेड़ के दौरान नक्सली पुलिस वालों को ललकार रहे थे.
उस वक्त तत्कालीन सतबरवा थानेदार और कांड के शिकायतकर्ता मोहम्मद रुस्तम ने आठ जून 2015 की रात 12:15 बजे पलामू एसपी रहे कन्हैया मयूर पटेल को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की सूचना दी और अतिरिक्त पुलिस बल मांगा. इसके बाद पलामू आइजी के साथ एसपी मयूर पटेल सीआरपीएफ के अफसरों के साथ वहां रात करीब एक बजे पहुंचे.
वहीं सीआइडी के वरीय अफसरों ने अपने सुपरविजन रिपोर्ट में कहा है कि घटना को लेकर थानेदार मो. रुस्तम ने एसपी मयूर पटेल को रात 1:15 बजे सूचना दी और अतिरिक्त पुलिस बल मांगा. इसके बाद एसपी सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. ऐसे में पलामू डीएसपी और सीआइडी के अफसरों की जांच रिपोर्ट इस अहम बिंदु पर कई सवाल खड़े करता है. दोनों की जांच रिपोर्ट में घटना का अलग-अलग समय बताया गया है़ बता दें कि मामले में हाइकोर्ट के अादेश के बाद सीबीआइ मामले को टेकओवर कर जांच शुरू कर चुकी है.
सुपरविजन में घटना का समय अलग-अलग बताया गया
डीएसपी ने कहा
डीएसपी ने तीन माह में ही बकाेरिया कांड को बता दिया था सही, कहा था : पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई थी मुठभेड़
बकोरिया कांड आठ जून 2015 को हुआ. इसका सबसे पहला सुपरविजनकर्ता पलामू के तत्कालीन डीएसपी हीरालाल रवि थे. इन्होंने महज तीन माह में ही आठ अक्तूबर 2015 को सुपरविजन रिपोर्ट निकाल दिया था. इसमें इन्होंने कहा था कि पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी.
यह घटना बिल्कुल सही है. रिपोर्ट में कुल 12 मृतकों में से सात की पहचान योगेश्वर यादव, देवराज यादव उर्फ अनुराग, आरकेजी उर्फ डॉक्टर साहब, संतोष यादव, एजाज अहमद, नीरज यादव, उदय यादव और अमलेश यादव के रूप में की गयी थी. इन लोगों की पहचान इनके परिजनों द्वारा की गयी थी. जबकि रिपोर्ट में उन्होंने पांच को अज्ञात बताया था.
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