रांची : दंडाधिकारी ने योगेंद्र व निर्मला के खिलाफ दिया था आवेदन, थानेदार ने 26 को बना दिया आरोपी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Dec 2018 6:09 AM

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प्रणव एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल परियोजना के खिलाफ 17 मई 2016 को हुआ था विवाद रांची : एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल परियोजना के खिलाफ रैयतों-किसानों के विरोध को लेकर 17 मई 2016 को चिरुडीह में हुए विवाद के बाद बड़कागांव थाने में प्रशासन की ओर से दर्ज कराये गये मामले में एक नया […]

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प्रणव
एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल परियोजना के खिलाफ 17 मई 2016 को हुआ था विवाद
रांची : एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल परियोजना के खिलाफ रैयतों-किसानों के विरोध को लेकर 17 मई 2016 को चिरुडीह में हुए विवाद के बाद बड़कागांव थाने में प्रशासन की ओर से दर्ज कराये गये मामले में एक नया मोड़ आया है.
बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 मामले में संबंधित कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान कांड के सूचक तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा और तत्कालीन बड़कागांव अंचलाधिकारी संतोष सिंह ने अपनी गवाही दी है.
कुमुद झा ने कहा है कि मेरे द्वारा दिये गये लिखित आवेदन पर थानेदार ने एफआइआर नहीं किया़ इसकी जगह बड़कागांव के तत्कालीन थानेदार ने मुंशी से टाइपिंग करा आवेदन पर हमसे हस्ताक्षर कराया और एफआइआर किया. मैंने मात्र दो लोगों योगेंद्र साव और निर्मला देवी देवी के खिलाफ थाना में आवेदन दिया था. हालांकि मामले में दर्ज एफआइआर में कुल 26 लोगों को नामजद किया गया है.
गवाही में यह भी कहा कि मामला दर्ज हो जाने के बाद अनुसंधानकर्ता ने जांच के दौरान मेरा दोबारा बयान भी नहीं लिया और न ही मुलाकात की. बयान के दौरान कुमुद झा ने घटना में पूर्व मंत्री योगेंद साव, विधायक निर्मला देवी और मंटू सोनी पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया. कहा कि मैं सिर्फ पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और विधायक निर्मला देवी को पहचानता हूं. इसके अलावा किसी को जानता-पहचानता नहीं हूं. मामले में तत्कालीन थानेदार रामदयाल मुंडा ने कहा कि जो दंडाधिकारी ने लिखकर दिया था, उसी के आधार पर प्राथमिकी की गयी थी. ऐसे में सवाल अपने जगह पर कायम है कि फिर इन दोनों के अलावा जिन लोगों का नाम एफआइआर में है, वह कहां से आ गया.
डीसी-एसपी के कहने पर गये थे मौका-ए-वारदात पर : बड़कागांव के तत्कालीन अंचलाधिकारी संतोष सिंह ने कोर्ट में कहा कि घटना के दिन चिरुडीह में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, विधायक निर्मला देवी और मंटू सोनी धरने का नेतृत्व कर रहे थे. लेकिन घटनास्थल डाडी गांव में वो लोग उपस्थित नहीं थे.
उन्होंने कहा कि घटना के बाद केस के अनुसंधानकर्ता सह थानाप्रभारी ने उनसे दोबारा बयान नहीं लिया और न ही कभी मुलाकात की. केस में जिस सफेद रंग की बोलेरो वाहन को क्षतिग्रस्त होने की बात कही गयी है उसको जब्त नहीं किया गया. वह बोलेरो वाहन एनटीपीसी ने दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि धरना स्थल पर जाने से पहले डीसी से बात की थी. डीसी-एसपी ने उन्हें वहां जाने का आदेश दिया था. उस समय डीसी रविशंकर शुक्ला और एसपी अखिलेश झा थे.
उठ रहे सवाल
ड्यूटी में तैनात कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के हस्तलिखित आवेदन को दरकिनार कर तत्कालीन बड़कागांव थाना प्रभारी ने किसके कहने पर और क्यों अपने मुंशी से टाइप करवा कर दंडाधिकारी से हस्ताक्षर कराया और फिर मनचाहा अभियुक्त बनवा कर केस किया?
केस के अनुसंधान में दंडाधिकारी कुमुद झा और अंचलाधिकारी संतोष सिंह का दोबारा बयान क्यों नहीं लिया गया?
एफआइआर में थानेदार ने खुद को घायल नहीं बताया. जबकि केस का अनुसंधानकर्ता बनकर खुद को केस डायरी में घायल बता दिया?
उक्त घटना में तीन अलग-अलग बड़कागांव थाना कांड संख्या 134/16,135/16,136/16 क्यों दर्ज हुआ? कांड संख्या 135/16,136/16 में योगेंद्र साव और निर्मला देवी आदि आरोपी हैं. जबकि 134/16 में योगेंद्र साहु और निर्मला देवी का नाम नहीं है.
तीनों घटना में सूचक अलग-अलग लेकिन घायल एक ही व्यक्ति को बताया गया था. इसके साथ ही उक्त केस में 307, 333 जैसी गंभीर धाराएं भी लगा दी गयी थीं, जिसे कोर्ट ने ट्रायल चालू होने से पहले डिसचार्ज कर दिया था.
घटना में तीन मामले दर्ज करने के बाद कोर्ट में दूसरे और तीसरे कांड का चार्जशीट दायर किया गया, लेकिन पहले केस की चार्जशीट अब तक पुलिस ने दायर नहीं की?
अब सवाल उठता है कि जो व्यक्ति जिस केस में खुद घायल है और वह अनुसंधानकर्ता बन बैठता है, तो क्या उससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा सकती है.
रांची़ : दो हफ्ते का समय हुआ पूरा नहीं दी ओरिजिनल डिवाइस
रांची़ : जगन्नाथपुर थाना में राज्यसभा चुनाव मामले में दर्ज केस में रिकॉर्डिंग से संबंधित ओरिजिनल डिवाइस जमा करने के लिए पुलिस द्वारा योगेंद्र साव को दिया गया दो सप्ताह का समय पूरा हो चुका है, लेकिन उन्होंने रिकॉर्डिंग से संबंधित मूल यंत्र पुलिस को नहीं सौंपा है.
पुलिस ने यंत्र के लिए योगेंद्र साव से अब फोन पर संपर्क किया है. योगेंद्र साव ने पुलिस को आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही न्यायिक काम से रांची आने वाले हैं. इसके बाद वे पुलिस से मिल कर मामले में जानकारी देंगे.
उल्लेखनीय है कि योगेंद्र साव के नाम पर पुलिस ने पिछले माह अंतिम बार नोटिस जारी किया था. नोटिस में लिखा गया था कि 23 जून को स्पीड पोस्ट के जरिये हजारीबाग जिला के पते पर और 25 जून को धुर्वा स्थित सरकारी क्वार्टर में नोटिस भेजा गया. धुर्वा स्थित आवास में खुशबू कुमारी को नोटिस सौंपा गया था.
चार अगस्त को हजारीबाग के पते पर आदमी को भेज कर नोटिस दिया गया था. 22 अक्तूबर को विशेष दूत के जरिये हजारीबाग के पते पर नोटिस भेजा गया, लेकिन वहां उपस्थित योगेंद्र साव के परिजनों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया. 29 जून को केस के अनुसंधानक खुद धुर्वा सेक्टर तीन स्थित क्वार्टर जाकर नोटिस देने व बयान लेने गये थे, लेकिन योगेंद्र साव के नहीं मिलने के कारण दोनों काम नहीं हो सका. आगे नोटिस में लिखा गया है कि 12 सितंबर को योगेंद्र साव और निर्मला देवी ने एक पत्र भेज कर पुलिस को सूचित किया है कि उक्त मामले से संबंधित एक रिट सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करेंगे. हालांकि पुलिस को इंटरनेट के जरिये जानकारी मिली कि उक्त रिट का निबटारा सुप्रीम कोर्ट 12 अक्तूबर को कर चुका है.
इसलिए 22 अक्तूबर को न्यायालय के आदेश पर अंतिम बार योगेंद्र साव को केस से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नोटिस भेजा गया था, लेकिन उनके लोगों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया. इसलिए पुलिस ने योगेंद्र साव को अंतिम बार दो सप्ताह का समय साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए दिया था. वह भी पूरा हो गया.
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