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राज्य में दो हजार अनाथ बच्चों के लिए बनेगा छात्रावास : मुख्यमंत्री

Updated at : 25 Nov 2018 2:27 AM (IST)
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राज्य में दो हजार अनाथ बच्चों के लिए बनेगा छात्रावास : मुख्यमंत्री

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि बच्चे हमारे देश व राज्य के भविष्य हैं. हमारी सामाजिक कुव्यवस्था व गरीबी के कारण बच्चे छोटी उम्र में बालश्रम करने को मजबूर हैं. राज्य में करीब 2500 बच्चे अनाथ हैं, जो विभिन्न कारणों से राज्य व राज्य के बाहर बालश्रम कर रहे हैं. ऐसे 2000 बच्चों […]

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रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि बच्चे हमारे देश व राज्य के भविष्य हैं. हमारी सामाजिक कुव्यवस्था व गरीबी के कारण बच्चे छोटी उम्र में बालश्रम करने को मजबूर हैं. राज्य में करीब 2500 बच्चे अनाथ हैं, जो विभिन्न कारणों से राज्य व राज्य के बाहर बालश्रम कर रहे हैं. ऐसे 2000 बच्चों के लिए सरकार छात्रावास बनायेगी, जहां बच्चे अपनी प्रतिभा के अनुसार पढ़ाई कर डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस, आइपीएस बन सकेंगे. इसका प्रावधान अगले बजट में किया जायेगा.
उन बच्चों को डिग्री के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. उक्त बातें उन्होंने शनिवार को राजेंद्र भवन, धुर्वा में समेकित बाल संरक्षण आयोग, झारखंड के सहयोग से एटसेक इंडिया चैप्टर एवं भारतीय किसान संघ द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार जागरूकता सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही.
सीएम ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की गारंटी होगी. अभी जो बच्चे बाल गृह में हैं, उन्हें शिक्षित करने के लिए स्कूलों में नामांकन कराया जायेगा. 18 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को कौशल विकास के तहत ट्रेनिंग दी जायेगी. कहा कि संविधान ने बच्चों को जो अधिकार दिया है, वह हर हाल में बच्चों को मिलना चाहिए. यह जिम्मेदारी सरकार व समाज दोनों की है. अगर बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वह अपराधी, नक्सली व आतंकी बन जायेंगे.
उन्होंने कहा कि जब वे 2000 में मंत्री थे, तब ऑपरेशन जस्टिस चलाया था. बाल मजदूरी का कारण गरीबी है. गरीबी को समाप्त करने के लिए सरकार कई योजना चला रही है. उन्होंने रविवार को दिल्ली जा रहे 25 बच्चों को दो-दो हजार रुपये देने की घोषणा की. डीजी होमगार्ड बीबी प्रधान ने बच्चों को गांधी जी द्वारा लिखी गयी पुस्तक पोथी पढ़ने की बात कही. उन्होंने कहा कि समाज में संवेदनशीलता होगी, तो अधिकार की बात नहीं करनी होगी.
झारखंड बाल अधिकार संरक्षण संस्था के निदेशक डीके सक्सेना ने कहा कि कार्यक्रम में बालगृह से आये 250 बच्चों की अलग-अलग कहानी है. इसे संवारने की जिम्मेदारी समाज व सरकार की है. इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर, विभाग के सचिव अमिताभ कौशल, संजय मिश्रा, अमर झा आदि ने भी अपने विचार रखे.
नाटक के माध्यम से बच्चों ने किया जागरूक
कार्यक्रम में बालगृह के बच्चों ने गीत, नृत्य व नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया. बच्चों ने समूह गीत चंदन है इस देश की माटी… व ग्रुप डांस हर तरफ हर जगह पर है उसी का नाम… पेश कर लोगों का मन माेह लिया. वहीं नुक्कड़ नाटक में दिखाया गया कि कैसे घर के सदस्य एक छोटे बच्चे से घर का सारा काम कराते हैं. बच्चों ने संदेश दिया कि बच्चा सभी का एक जैसा है. उसे प्रताड़ित नहीं करें.
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