हजारीबाग व चतरा में फिर से नक्सलियों की गतिविधि बढ़ी

Updated at : 10 Nov 2018 12:25 AM (IST)
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हजारीबाग व चतरा में फिर से नक्सलियों की गतिविधि बढ़ी

रांची : प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी अब उन क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने में जुट गया है, जहां पहले उसका कुनबा मजबूत था. लेकिन दूसरे उग्रवादी संगठन और पुलिसिया कार्रवाई से वह बैकफुट पर चला गया था. इनमें हजारीबाग और चतरा दो जिले इस संगठन के लिए अहम थे. यहां पर प्रतिद्वंदी उग्रवादी […]

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रांची : प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी अब उन क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने में जुट गया है, जहां पहले उसका कुनबा मजबूत था. लेकिन दूसरे उग्रवादी संगठन और पुलिसिया कार्रवाई से वह बैकफुट पर चला गया था. इनमें हजारीबाग और चतरा दो जिले इस संगठन के लिए अहम थे. यहां पर प्रतिद्वंदी उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति सम्मेलन कमेटी (टीएसपीसी) के कारण माओवादी काफी कमजोर हो गये थे
हाल के कुछ महीनों में टीएसपीसी के कई बड़े उग्रवादियों कोहराम, आक्रमण और बिंदु गंझू आदि के पकड़े जाने से संगठन को गहरा धक्का लगा. इस संगठन के कई उग्रवादी पकड़े भी गये. इससे संगठन की पकड़ हजारीबाग और चतरा जिले में काफी कमजोर हुई. इसको देखते हुए माओवादी संगठन इन दो जिलों में तेजी से सक्रिय हुआ है. विकास कार्य में लगे एजेंसियों के वाहनों को हजारीबाग, लोहरदगा और लातेहार में जलाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की.
गणपति के बाद नबंल्ला केशव राव के सुप्रीमो बनने के बाद से माओवादी संगठन लगातार वारदात को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती पेश कर रहा है. हजारीबाग और चतरा में टीएसपीसी के कमजोर होने पर माओवादियों के सक्रिय होने की भनक पुलिस महकमा को पहले से थी. इसको लेकर कुछ एहतियाती कदम भी उठाये गये, लेकिन इसका कोई खास असर माओवादियों पर नहीं पड़ा. यही वजह है कि अब अपने पुराने किले लातेहार को फिर से अपना गढ़ बनाने की दिशा में भी माओवादी सक्रिय हो गये हैं.
इससे सटे लोहरदगा और गुमला में भी माओवादी पैठ बना रहे हैं. यही वजह है कि हजारीबाग, चतरा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में माओवादियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने भी कवायद शुरू कर दी है. लातेहार के गारू जैसे अति नक्सल क्षेत्र में पुलिसिया कार्रवाई का ही असर है कि अब रात में भी सड़कों पर चहल-पहल दिखती है. नेतरहाट से महुआडांड़ के रास्ते पर भी पुलिस बल की विशेष चौकसी है. यही वजह है कि उन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है. बूढ़ा पहाड़ को भी पुलिस घेरे हुए है. इससे भी माओवादियों की गतिविधि उन क्षेत्रों में कम देखी जा रही है.
लोहरदगा, गुमला और लातेहार में भी संगठन को मजबूत करने की कवायद
नवंबर 2018 : लातेहार के बालूमाथ और हजारीबाग के बड़काकाना इलाके में विकास कार्यों में लगे वाहनों को नक्सलियों ने जला दिया.
अक्तूबर 2018 : हजारीबाग के चौपारण में जलाशय निर्माण में लगे संवेदक के कैंप पर नक्सलियों ने हमला किया. वाहन सहित अन्य सामग्री जला दिया. घटना के पीछे का कारण लेवी बताया जा रहा है.
अगस्त 2018 : चतरा जिले के पत्थलगड्डा के बकुलिया नदी पर हो रहे पुल निर्माण में लगे मजदूरों को नक्सलियों ने पीटा और बगैर अनुमति के निर्माण कार्य नहीं करने की धमकी दी.
मार्च 2018 : हजारीबाग के चुरचू प्रखंड स्थित आंगो नवाडीह के श्यामलाल महतो (30) और घनश्याम महतो को देर रात घर से उठा कर ले जाने के बाद जंगल में ले जाकर नक्सलियों ने उनकी हत्या कर दी.
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