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रांची : सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं दिखा कोई असर खूब छोड़े गये पटाखे, एक भी मामला दर्ज नहीं

Updated at : 09 Nov 2018 6:16 AM (IST)
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रांची : सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं दिखा कोई असर खूब छोड़े गये पटाखे, एक भी मामला दर्ज नहीं

रांची : वन भवन, डोरंडा में लगे पॉल्यूशन रीडर के आंकड़े के अनुसार सात नवंबर को शाम पांच बजे से रात के 12 बजे तक के विभिन्न समय में 10 पीएम आकार वाले कणों का आंकड़ा वन भवन डोरंडा के पास 100 के स्थान पर न्यूनतम 67.80 व अधिकतम 427.70 था, यानी अौसतन 177.85. रात […]

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रांची : वन भवन, डोरंडा में लगे पॉल्यूशन रीडर के आंकड़े के अनुसार सात नवंबर को शाम पांच बजे से रात के 12 बजे तक के विभिन्न समय में 10 पीएम आकार वाले कणों का आंकड़ा वन भवन डोरंडा के पास 100 के स्थान पर न्यूनतम 67.80 व अधिकतम 427.70 था, यानी अौसतन 177.85. रात आठ से 12 बजे तक इसमें लगातार इजाफा हुआ.
इसी तरह 2.5 पीएम आकार वाले कणों का आंकड़ा 60 के स्थान पर न्यूनतम 34.90 व अधिकतम 185.90 था. यानी अौसतन 98.60. वायु में ठहरे हुए सूक्ष्म कण वायु को प्रदूषित करते हैं. यह कण धूल, धुएं, पॉलेन, बैक्टीरिया, वायरस, गैस, फ्लाई ऐश के हो सकते हैं. यदि इन कणों का आकार बड़ा होता है, तो वे अपने भार के कारण नीचे बैठ जाते हैं.
पर इनका आकार 10 माइक्रो मीटर (पीएम) से छोटा हो, तो ये हवा में लटके रहते हैं. ये कण यदि 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे तथा निर्धारित मात्रा से अधिक हों, तो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं. हमारे सिर का एक बाल औसतन 50-70 माइक्रो मीटर मोटा होता है.
10 पीएम से छोटे कणों से गंभीर बीमारियों का खतरा
वर्ल्ड हेल्थ अॉर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार 10 पीएम से छोटे कण हमारी फेफड़ों एवं कॉर्डियोवास्कुलर सिस्टम पर कुप्रभाव डालते हैं. इससे सांस एवं दिल की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.
वहीं 2.5 पीएम से छोटे कण ज्यादा खतरनाक होते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये अति सूक्ष्म कण कैंसर कारक तथा हमारे डीएनए को प्रभावित करने वाले होते हैं. दरअसल ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, निर्माण कार्य तथा कचरा निष्पादन (वेस्ट डिस्पोजल) वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं.
यानी इन क्षेत्रों के प्रबंधन में संलग्न संस्थानों, चाहे वे सरकारी हों, अर्द्ध सरकारी या फिर गैर सरकारी, उन्हें अपना उत्तरदायित्व समझना होगा. रांची में वायु प्रदूषण सिर्फ दिवाली की रात की ही बात नहीं. यह आम दिनों में भी अक्सर बढ़ जाता है. वह दिन दुर्भाग्यपूर्ण होगा, जब दिल्ली की तर्ज पर रांची में भी हम अपने बच्चों से कहेंगे कि हवा खराब है, स्कूल मत जाओ.
पुलिस को मिली थी देर रात तक पटाखे जलाने की सूचना, पीसीआर व गश्ती टीम पहुंची रोकने
रांची : दीपावली की रात शहर के कुछ आवासीय परिसरों में देर रात तक पटाखा चलाने की सूचना पुलिस को फोन पर मिली थी. लेकिन, पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तत्काल पीसीआर और गश्ती गाड़ी को वहां भेजा और पटाखा चलाने से रोका.
इसके अलावा सार्वजनिक स्थान जैसे मोरहाबादी मैदान में रात में पटाखा चलाने से संबंधित जानकारी मिली थी. जिसके बाद वहां पुलिस की टीम को भेज कर पटाखा फोड़नेवाले युवकों को खदेड़ा गया.
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आदेश : दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के कारण हुई गंभीर स्थिति के बाद पटाखा चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जारी किया था.
इसके बाद दीपावली से एक दिन पहले पुलिस मुख्यालय एडीजी अभियान आरके मल्लिक ने दीपावली के पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए बताया था कि दीपावली के दिन लोग रात आठ बजे से रात के 10 बजे तक ही आतिशबाजी कर सकेंगे. ध्यान रखना होगा कि 125 डेसिबल से 145 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले पटाखा नहीं छोड़े. साइलेंस जोन और उसके 100 मीटर के दायरे में आतिशबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी.
इसका उल्लंघन करने वाले पर सुनप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना से संबंधित मामला दर्ज होगा. जिन क्षेत्रों के लोग इसकी अवहेलना करेंगे, वहां के थानेदार उनके खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के तहत कोर्ट में पिटीशन दायर करेंगे. इस संबंध में पूछे जाने पर एसएसपी अनीश गुप्ता ने बताया कि अवमानना से संबंधित कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है.
विभिन्न प्रदूषण के मानक
प्रदूषण की वजह सामान्य स्तर अौसत (सात
नवंबर की रात)
पीएम-10 100 177.85
पीएम-2.5 60 98.60
सल्फर लाइअॉक्साइड (SO2) 80 76.09
नाइट्रोजन अॉक्साइड (NOx) 80 88.03
कार्बन मोनोक्साइड (CO) 2000 1277.38
तुलनात्मक रूप से वायु व ध्वनि प्रदूषण का स्तर रांची में बहुत अधिक नहीं रहा. प्रशासन की अोर से जारी दिशा निर्देश व लोगों की जागरूकता से ऐसा हुआ है.
राजीव लोचन बक्शी, सदस्य सचिव (प्रदूषण नियंत्रण पर्षद)
रांची समेत राज्य के बड़े हिस्सों को हुई निर्बाध बिजली आपूर्ति
रांची : यह पहला मौका था जब दीपावली पर राजधानी रांची में शायद ही कहीं बिजली कटी हो. पूरे शहर में अबाधित रूप से बिजली की आपूर्ति लगातार की जा रही थी. लगभग 23.5 घंटे बिजली की आपूर्ति की गयी है. 320 मेगावाट फुल लोड पर बिजली दी जा रही थी. इसके अलावा लोहरदगा, खूंटी, गुमला, सिमडेगा में भी फुल लोड आपूर्ति की गयी.
उधर, जमशेदपुर, सरायकेला, चाईबासा और संताल के इलाकों में भी औसतन 22 से 23 घंटे तक आपूर्ति की गयी है. रात में स्पष्ट रूप से आदेश था कि शाम पांच बजे के बाद कहीं भी बिजली न कटे. सभी अभियंताओं की छुट्टी रद्द थी. वहीं, आरएपीडीआरपी के तहत विद्युत केबलिंग का काम कर रहे पॉलीकैब को दीपावली के दिन मेंटेनेंस का कार्य करने से रोक दिया गया था. दीपावली के एक दिन बाद से मेंटेनेंस का काम शुरू किया जायेगा.
दिख रहा एपीडीआरपी कार्यों का असर
झारखंड बिजली वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार ने कहा कि पहले भी बिजली नहीं कट रही थी. जो भी बिजली कटती है, वह विद्युत सुदृढ़ीकरण के कार्यों के लेकर ही कट रही है. कहीं तार बदले जा रहे हैं, कहीं नये ट्रांसफारमर बदले जा रहे हैं.
रांची जिले में ही पांच हजार से अधिक ट्रांसफारमर बदले गये हैं. नये तार लगाये गये हैं. शहरों में यह काम आरएपीडीआरपी और आइपीडीएस स्कीम के तहत हो रहे हैं. वहीं, गांवों में डीडीयूजीवीवाइ, सौभाग्य योजना आदि से ये काम हो रहे हैं.
सारे काम दो-तीन माह में पूरे हो जायेंगे. तब हम पूरे राज्य में अबाधित बिजली आपूर्ति देने में सक्षम होंगे. सभी पुराने नेटवर्क को बदला जा रहा है. श्री पुरवार ने कहा कि कई बार मेंटेनेंस को लेकर शटडाउन किया जाता है, लेकिन यह शटडाउन आनेवाले समय में बिजली नेटवर्क की बेहतरी के लिए ही लिया जाता है.
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