रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में तीन पदाधिकारी बर्खास्त

Published at :25 Oct 2018 6:11 AM (IST)
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रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में तीन पदाधिकारी बर्खास्त

रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी पाये गये तीन अधिकारियों उमेशचंद्र सिंह, विनय कुमार नारायण और कुंज बिहारी को सीइओ ने बर्खास्त कर दिया है. हालांकि बर्खास्तगी का आदेश देनेवाले सीइओ ब्रजेश्वरनाथ खुद घोटाले के दोषी पाये गये हैं. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त विभाग ने पांच सहकारी बैंक की शाखाओं […]

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रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी पाये गये तीन अधिकारियों उमेशचंद्र सिंह, विनय कुमार नारायण और कुंज बिहारी को सीइओ ने बर्खास्त कर दिया है.
हालांकि बर्खास्तगी का आदेश देनेवाले सीइओ ब्रजेश्वरनाथ खुद घोटाले के दोषी पाये गये हैं. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त विभाग ने पांच सहकारी बैंक की शाखाओं के विशेष ऑडिट के लिए टीम गठित कर दिया है. जिन शाखाओं में विशेष ऑडिट का आदेश जारी किया गया है, उसमें जादूगोड़ा, देवघर, गुमला, चाईबासा और सरायकेला का नाम शामिल है.
बर्खास्तगी का आदेश सहयोग समितियों के निबंधक की अध्यक्षता में गठित जांच दल की रिपोर्ट के आलोक में कृषि सचिव पूजा सिंघल की अनुशंसा के मद्देनजर जारी किया गया है.
जांच में मिली थी अनियमितताएं : सहकारी बैंक के महाप्रबंधक सुशील कुमार की शिकायत पर सरकार ने घोटाले की जांच का आदेश दिया था.
जादूगोड़ा के शाखा प्रबंधक उमेशचंद्र सिंह को पद का दुरुपयोग करने, गबन और अन्य प्रकार की अनियमितताओं के मद्देनजर बर्खास्त किया गया है. वहीं, चाईबासा में कार्यरत विनय कुमार नारायण और कुंज बिहारी को भी जांच में दोषी पाया गया. बैंक में उच्चस्तरीय साजिश के तहत इन तीनों रिटायर्ड अधिकारियों को संविदा पर नियुक्त कर लिया गया था और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी थी.
विनय कुमार जनवरी 2011 में और कुंज बिहारी 2008 में रिटायर हुए थे. उमेशचंद्र को रिटायरमेंट के पांच माह पहले ही फिर से काम पर रखने का आदेश जारी किया गया था. हालांकि झारखंड राज्य सहकारी बैंक सर्विस रूल 2015 में किसी कर्मचारी को सेवा विस्तार का लाभ देने या रिटायरमेंट के बाद संविदा पर नियुक्त करने का प्रावधान नहीं है.
विशेष ऑडिट के लिए टीम का गठन : को-ऑपरेटिव बैंक में हुए घोटाले की गंभीरता को देखते हुए वित्त विभाग ने बैंक की पांच शाखाओं के विशेष ऑडिट के लिए टीम का गठन किया है.
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत उपलेखा नियंत्रक चंद्रभूषण पूर्ति और अंकेक्षण पदाधिकारी सचींद्र मोहन को जादूगोड़ा शाखा के विशेष ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.
इस शाखा में बड़े पैमाने पर फर्जी लोगों के नाम पर कर्ज दिखा कर बैंक का पैसा गबन करने का मामला प्रकाश में आया है. देवघर ब्रांच के ऑडिट के लिए उपलेखा नियंत्रक नरेश साहू और वरीय अंकेक्षक अनिल चंद्रदास को अधिकृत किया गया है. अंकेक्षण पदाधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा और अरुण कुमार को बिशुनपुर(गुमला) ब्रांच के ऑडिट के लिए अधिकृत किया गया है.
बैंक के इस ब्रांच में अवैध नियुक्तियों के साथ ही कर्ज देने में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है. अंकेक्षण पदाधिकारी शशिभूषण गुप्ता और ईश्वर प्रसाद आर्या को चाईबासा बैंक के ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. अंकेक्षण पदाधिकारी विनोद राम और वरीय अंकेक्षक अखौरी सतीश कुमार को सरायकेला ब्रांच के ऑडिट के लिए अधिकृत किया गया है.
उमेशचंद्र सिंह, वीके नारायण व कुंज बिहारी को बर्खास्त करने का आदेश जारी, विशेष ऑडिट के लिए टीम गठित
बर्खास्तगी का आदेश देनेवाले सीइओ खुद घोटाले में पाये गये हैं दोषी
तीनों रिटायर्ड अफसर साजिश के तहत संविदा पर िकये गये थे नियुक्त
जीएम सुशील कुमार की शिकायत पर हुई कार्रवाई
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