2020 से एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा से झारखंड को मिलेगी बिजली

Updated at : 18 Oct 2018 6:59 AM (IST)
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2020 से एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा से झारखंड को मिलेगी बिजली

सुनील चौधरी एनटीपीसी के कंज्यूमर मीट में झारखंड बिजली वितरण निगम को दी जानकारी रांची : एनटीपीसी के नॉर्थ कर्णपुरा से फरवरी 2020 से झारखंड को 500 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी. अभी इस पावर प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है. पिछले दिनों दिल्ली में हुए एनटीपीसी कंज्यूमर मीट में झारखंड बिजली वितरण निगम के […]

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सुनील चौधरी
एनटीपीसी के कंज्यूमर मीट में झारखंड बिजली वितरण निगम को दी जानकारी
रांची : एनटीपीसी के नॉर्थ कर्णपुरा से फरवरी 2020 से झारखंड को 500 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी. अभी इस पावर प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है. पिछले दिनों दिल्ली में हुए एनटीपीसी कंज्यूमर मीट में झारखंड बिजली वितरण निगम के अधिकारी भी गये थे. निगम के मुख्य अभियंता(सीएंडआर) सुनील ठाकुर ने बैठक में कहा कि निगम द्वारा वर्ष 2013 में ही पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया गया था.
तब एनटीपीसी के नॉर्थ कर्णपुरा प्लांट से 500 मेगावाट पीपीए किया गया था. एनटीपीसी यह बताये कि बिजली कब मिलेगी. कंज्यूमर मीट में ही एनटीपीसी द्वारा कहा गया कि पावर प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है. फरवरी 2020 से झारखंड को 500 मेगावाट बिजली इस प्लांट से मिलने लगेगी.
छह मार्च 1999 को प्लांट का हुआ था शिलान्यास
एनटीपीसी के 1960 मेगावाट के नॉर्थ कर्णपुरा पावर प्लांट का शिलान्यास छह मार्च 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. अब उनका सपना धरातल पर दिखने लगा है. पावर प्लांट का निर्माण कार्य जोरों पर है. वर्तमान में एनटीपीसी निर्माण का 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.
दो चिमनी बनकर तैयार हो चुकी है. वहीं तीसरी चिमनी भी लगभग 40 मीटर ऊंची तैयार हो गयी है. परियोजना का कार्य वर्ष 2019 में पूरा करने के लक्ष्य के पीछे एनटीपीसी की टीम काम कर रही है. एनटीपीसी निर्माण में अबतक 7300 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है. पावर प्लांट निर्माण में पांच हजार से ज्यादा लोग कार्य कर रहे हैं.
कई बार काम रुका
छह मार्च 1999 को शिलान्यास के बाद जैसे ही भूमि अधिग्रहण का कार्य आगे बढ़ा एनटीपीसी निर्माण पर मानो ग्रहण लग गया. कोल मंत्रालय ने अधिगृहित जमीन के नीचे कोयला होने की बात कह कर निर्माण पर रोक लगा दिया था, जिसके बाद रैयतों ने टंडवा से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक आंदोलन किया.
रैयतों के आंदोलन के आगे कोल मंत्रालय को झुकना पड़ा और पावर प्लांट को हरी झंडी मिल गयी. हरी झंडी मिलते ही 14 हजार करोड़ रुपये के इस पावर प्लांट के निर्माण का जिम्मा भेल कंपनी को आठ हजार करोड़ रुपये की लागत से दे दिया गया. उस समय केंद्र में पुन: भाजपा की सरकार आ गयी थी.
इसके बाद 2014-15 से प्लांट निर्माण का कार्य तेजी से शुरू किया गया, जो अब तक चल रहा है. एनटीपीसी के एक अधिकारी ने बताया कि पूरी टीम मार्च 2019 के टारगेट को लेकर चल रही है. यदि कुछ विलंब होता है तब भी वर्ष 2019 के अंत तक पावर प्लांट के पहले चरण में 660 मेगावाट की यूनिट चालू हो जायेगी. इसी से झारखंड को बिजली दी जायेगी.
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