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रांची : 48000 लोगों का नहीं बना इंदिरा आवास

Updated at : 18 Oct 2018 6:31 AM (IST)
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रांची : 48000 लोगों का नहीं बना इंदिरा आवास

मनोज लाल रांची : राज्य के 48 हजार लाभुकों को इंदिरा आवास से वंचित होना पड़ा है, क्योंकि उन्हें आवंटित आवास बन ही नहीं सके हैं. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे भी आवास हैं, जो आठ साल से पेंडिंग हैं. अधूरे होने की वजह से इन आवासों की मौजूदा स्थिति भी खराब हो गयी है. […]

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मनोज लाल

रांची : राज्य के 48 हजार लाभुकों को इंदिरा आवास से वंचित होना पड़ा है, क्योंकि उन्हें आवंटित आवास बन ही नहीं सके हैं. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे भी आवास हैं, जो आठ साल से पेंडिंग हैं. अधूरे होने की वजह से इन आवासों की मौजूदा स्थिति भी खराब हो गयी है.

वहीं बड़ी संख्या में ऐसे मामले भी हैं, जिनमें लाभुकों ने पैसे तो ले लिये, लेकिन काम नहीं कराया. ऐसी शिकायतें भी मिली है कि कई लाभुक इधर-उधर चले गये, तो कुछ आवास संबंधित कर्मियों की लापरवाही से लटक गये. अब तो इन आवासों का ब्योरा तक नहीं मिल रहा है. दूसरी तरफ, बार-बार मुख्यालय सभी डीडीसी को पत्र लिख कर ब्योरा मांग रहा है.

मुख्यालय जानना चाह रहा है कि आवासों के लिए कितनी राशि दी गयी है और उसके विरुद्ध कितना काम हुआ है. वित्तीय व भौतिक प्रगति की जानकारी मांगी जा रही है, लेकिन जिलों से रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है. ऐसे में मुख्यालय इस मामले में कार्रवाई भी नहीं कर पा रहा है. इधर केंद्र सरकार ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है, लेकिन विभाग रिपोर्ट देने में असमर्थ है.

लंबित आवासों को पूरा कराना मुश्किल : अफसरों का कहना है कि लंबित आवासों को पूरा कराना मुश्किल है. क्योंकि पेंडिंग आवासों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है.

कुछ मामलों में तो लाभुकों को सारे पैसे दे दिये गये हैं, पर आवास अपूर्ण है. अब लाभुक के पास पैसे ही नहीं हैं कि काम पूरा किया जाये. किसी-किसी मामले में एक ही किस्त की राशि दी गयी है. उसमें जो काम हुआ था वह बर्बाद हो गया है. इस तरह पेंडिंग काम पूरा नहीं पायेगा.

हो सकता है सर्टिफिकेट केस :स्थिति को देखते हुए लाभुकों पर सर्टिफिकेट केस करने पर विचार किया जा रहा है. रिपोर्ट आने के बाद देखा जायेगा कि दोष किसका है. अगर लाभुकों ने राशि लेकर काम नहीं किया है, तो उनके खिलाफ केस होगा. इसके तहत राशि वसूली की कार्रवाई की जायेगी. अगर संबंधित कर्मी दोषी हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होगी.

संचिका भी गायब है : कुछ अफसरों ने बताया कि कई प्रखंडों में तो इंदिरा आवास योजना की संचिका ही नहीं है. बीडीओ का कहना है कि पंचायत सेवक बदलने पर अपने साथ ही संचिका लेकर चले गये हैं. कुछ मामलों में पंचायत सेवक रिटायर या निलंबित हो गये, तो ऐसी स्थिति में भी इंदिरा आवास योजना की संचिका नहीं मिली है. इससे आवास के बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा है.

2016 में बंद हुई थी योजना : 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) आने के बाद यह योजना बंद हो गयी. इसके पूर्व वर्ष 2010-11, 2011-12, 2012-13, 2013-14, 2014-15 व 2015-16 में इंदिरा आवास स्वीकृत हुए थे. इन वर्षों की ही 48 हजार आवास लंबित हैं. शुरू में 3.09 लाख आवास पेंडिंग थे, लेकिन किसी तरह पूरा किया गया. वर्ष 2016-17 में 1.17 लाख और वर्ष 2017-18 में 52000 आवास पूरे हुए, पर वर्ष 2018-19 में अब तक मात्र सात हजार ही आवास पूरे हुए हैं. अब काम पूरा करने की रफ्तार रुक सी गयी है.

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