दुमका : एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड, नक्सली प्रवीर व सनातन बास्की को फांसी की सजा

Updated at : 27 Sep 2018 7:37 AM (IST)
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दुमका : एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड, नक्सली प्रवीर व सनातन बास्की को फांसी की सजा

दुमका : पूर्व पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में प्रवीर उर्फ सुखलाल मुर्मू तथा सनातन बास्की उर्फ ताला दा को फांसी की सजा सुनायी गयी. बुधवार को दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने सजा सुनायी. अपने फैसले में अदालत ने कहा : जो […]

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दुमका : पूर्व पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में प्रवीर उर्फ सुखलाल मुर्मू तथा सनातन बास्की उर्फ ताला दा को फांसी की सजा सुनायी गयी. बुधवार को दुमका के चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की विशेष अदालत ने सजा सुनायी.
अपने फैसले में अदालत ने कहा : जो घटना घटी, वह जघन्यतम अपराध है. एक आइपीएस की हत्या हुई है. अगर इन्हें छोड़ दिया जाये, तो फिर से पुलिस पदाधिकारी, आम व्यक्ति की हत्या करेंगे. समाज का कोई व्यक्ति सुरक्षित नहीं रहेगा. इसलिए इन्हें दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं है. इसलिए इन्हें मौत की सजा सुनायी जा रही है.
32 गवाहों के बयान दर्ज किये गये थे, पांच को मिला था संदेह का लाभ : मामले में प्रवीर, सनातन बास्की उर्फ ताला, दाउद, जोसेफ और 25-30 अज्ञात के खिलाफ काठीकुंड थाने में मामला दर्ज किया गया था. इस केस में सात अभियुक्तों पर ट्रायल चला, जिसमें प्रवीर, वकील हेम्ब्रम, मानवेल मुर्मू, मानवेल मुर्मू-2, सत्तन बेसरा, सनातन बास्की उर्फ ताला शामिल थे. इस केस में गिरफ्तार पांच अभियुक्तों- वकील हेम्ब्रम, लोबिन मुर्मू, सत्तन बेसरा, मानवेल मुर्मू और मानवेल मुर्मू-2 को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए छह सितंबर को बरी कर
दिया था. हत्या कांड में कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज किये गये थे. सजा की बिंदु पर हुई बहस : इस केस में बुधवार को पहले सजा की बिंदु पर बहस हुई, जिसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजा खान, केएन गोस्वामी ने कम सजा देने की अपील की, जबकि अभियोजन की ओर से एपीपी सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस बताते हुए कुछ केसों का हवाला देते हुए फांसी की सजा देने को न्यायोचित बताया.
02 जुलाई 2013 को हुई थी घटना : 02 जुलाई 2013 को दुमका में डीआइजी प्रिया दूबे के साथ बैठक करने के बाद एसपी अमरजीत बलिहार व उनके बॅाडीगार्ड दो वाहनों से पाकुड़ लौट रहे थे. इसी बीच काठीकुंड के अमतल्ला के पास घात लगाये नक्सलियों ने उनके वाहन पर एके 47, इंसास, एसएलआर व 303 राइफल से फायरिंग शुरू कर दी. इसमें एसपी अमरजीत बलिहार समेत पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी थी. पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद नक्सलियों ने उनके हथियार दो एके-47, चार इंसास रायफल, दो पिस्टल और 647 गोलियां ले गये थे.
हथियार जो लूट ले गये नक्सली
दो एके-47, चार इंसास रायफल , दो पिस्टल और 647 गोलियां
02 जुलाई 2013 को शहीद होनेवाले पुलिसकर्मी
1. एसपी अमरजीत बलिहार (रांची)
2. आरक्षी मनोज हेंब्रम (दुमका)
3. राजीव कुमार शर्मा (साहेबगंज)
4. संतोष मंडल ( साहेबगंज)
5. अशोक कुमार श्रीवास्तव (बक्सर)
6. चंदन थापा (कटिहार, बिहार)
नक्सलियों को उनके किये की सजा मिली : सुमन
शहीद बलिहार की पत्नी सुमन बलिहार ने कहा कि कोर्ट ने दोषियों को उनके किये की सजा दी. कोर्ट ने दोषी पाया, तो सजा मिलनी ही थी. मेरे पति ने देश के लिए बलिदान दिया है. हमें पता था कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा.
6 सितंबर को इन्हें किया गया था बरी : इस केस में गिरफ्तार पांच अभियुक्तों- वकील हेम्ब्रम, लोबिन मुर्मू, सत्तन बेसरा, मानवेल मुर्मू और मानवेल मुर्मू-2 को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए छह सितंबर को बरी कर दिया था.
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