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सरकार को हर माह हो रहा 67.61 करोड़ का नुकसान, झारखंड में डीजल लेने से कतरा रहीं बड़ी कंपनियां

Updated at : 21 Sep 2018 1:37 AM (IST)
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सरकार को हर माह हो रहा 67.61 करोड़ का नुकसान, झारखंड में डीजल लेने से कतरा रहीं बड़ी कंपनियां

रांची : झारखंड में पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट दर अधिक होने यहां पेट्रोल-डीजल की बिक्री में गिरावट आयी है. खासकर सीमावर्ती इलाकों में स्थित पेट्रोल पंप अधिक प्रभावित हैं. हालत यह है कि बड़ी गाड़ियां झारखंड के पंपों से तेल लेने में कतरा रही हैं. झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (जेपीडीए) के पदाधिकारियों के अनुसार 24 […]

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रांची : झारखंड में पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट दर अधिक होने यहां पेट्रोल-डीजल की बिक्री में गिरावट आयी है. खासकर सीमावर्ती इलाकों में स्थित पेट्रोल पंप अधिक प्रभावित हैं. हालत यह है कि बड़ी गाड़ियां झारखंड के पंपों से तेल लेने में कतरा रही हैं. झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (जेपीडीए) के पदाधिकारियों के अनुसार 24 सितंबर 2015 के पहले झारखंड में डीजल पर 18 प्रतिशत और पेट्रोल पर 20 प्रतिशत वैट लिया जाता था.
उस अवधि में डीजल की बिक्री 1.30 लाख किलो लीटर प्रतिमाह थी. तब हर साल डीजल की बिक्री में 10 प्रतिशत का ग्रोथ होता था. उस हिसाब से मौजूदा समय में डीजल की बिक्री प्रतिमाह दो लाख किलो लीटर होनी चाहिए थी. अभी 22 प्रतिशत वैट होने के कारण हर माह डीजल की बिक्री 1.44 लाख किलो लीटर ही हो रही है. ग्रोथ रुकने की वजह से लगभग 55,556 किलो लीटर डीजल की कम बिक्री हो रही है. यानी हर माह सरकार को 67 करोड़ 61 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है.
02 लाख किलो लीटर होनी चाहिए थी डीजल की बिक्री मौजूदा समय में
1.44 लाख किलो लीटर ही हो रही है डीजल की बिक्री, रुक गया है ग्रोथ
आउटसोर्सिंग कंपनियां भी दूसरे राज्यों पर निर्भर
पड़ोसी राज्यों की तुलना में झारखंड में वैट अधिक होने का असर यह हुआ है कि आउटसोर्सिंग कंपनियां भी पड़ोसी राज्यों पर निर्भर हो गयी हैं. ये कंपनियां हर माह 30,000 किलो लीटर तेल पड़ोसी राज्यों से मंगा रही हैं.
यूपी की तर्ज पर फिक्स किया जाये
झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता प्रमोद कुमार कहते हैं कि 22 प्रतिशत वैट होने की वजह से झारखंड में डीजल लगभग पांच रुपये प्रति लीटर महंगा पड़ रहा है. इसलिए आउटसोर्सिंग कंपनियां और बड़े वाहन मालिक दूसरे राज्यों से तेल ले रहे हैं. इससे सरकार को हर माह लगभग 67.61 करोड़ का नुकसान हो रहा है. वैट कम होगा, तो ये कंपनियां झारखंड से तेल लेंगी. सरकार को चाहिए कि वह यूपी की तर्ज पर डीजल पर वैट को फिक्स करे.
झारखंड में वैट सबसे अधिक
राज्य पेट्रोल पर वैट डीजल पर वैट
झारखंड 26.5% 22.36%
बंगाल 25% 17%(+1 रुपये सेस)
बिहार 26% 19%
उत्तर प्रदेश 16.71 रुपये 9.41 रुपये
नोट : बंगाल ने हाल ही में डीजल के वैट दर में एक रुपये प्रति लीटर की कमी की है. इधर, क्रूड ऑयल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण बंगाल में डीजल 43 प्रतिशत, यूपी में 45 प्रतिशत और झारखंड में 60 प्रतिशत महंगा हुआ है.
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