देवघर के पूर्व जिला सहकारिता पदाधिकारी के खिलाफ की गयी कार्रवाई की अनुशंसा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Aug 2018 3:17 AM
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धान अधिप्राप्ति के लिए मांगे गये थे 49.74 करोड़ रुपये रांची : कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (सहकारिता प्रभाग) के अवर सचिव ने देवघर के पूर्व जिला सहकारिता पदाधिकारी सुशील कुमार पर कार्रवाई की अनुशंसा की है. श्री कुमार पर धान अधिप्राप्ति के लिए मांगी गयी राशि पर आपत्ति जतायी गयी है. अवर सचिव ने […]
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धान अधिप्राप्ति के लिए मांगे गये थे 49.74 करोड़ रुपये
रांची : कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (सहकारिता प्रभाग) के अवर सचिव ने देवघर के पूर्व जिला सहकारिता पदाधिकारी सुशील कुमार पर कार्रवाई की अनुशंसा की है. श्री कुमार पर धान अधिप्राप्ति के लिए मांगी गयी राशि पर आपत्ति जतायी गयी है. अवर सचिव ने जून 2018 में श्री कुमार के विरुद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए उनके विरुद्ध दंड लगाने की अनुशंसा की है. श्री कुमार के विरुद्ध खरीफ 2014-15 में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान अधिप्राप्ति में अनियमितता बरतने का अारोप है. किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान अधिप्राप्ति में तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा कुल 56 पैक्सों के 5929 किसानों से 3,65,786 क्विंटल धान खरीद दर्शाया गया था. इसके लिए 49.74 करोड़ रुपये मांग की गयी थी.
झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड ने इसका भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था. इसके आलोक में पालाजोरी एवं सारठ प्रखंड के सहकारिता प्रसार पदाधिकारी द्वारा सत्यापन प्रतिवेदन दिया गया. बाकी पैक्स के अध्यक्षों व किसानों से धान अधिप्राप्ति संबंधी नोटरी से एफिडेविट प्राप्त कर 25 पैक्सों के 2770 किसानों से 1,59,530 क्विंटल धान खरीद (मूल्य 225981024 रुपये) का प्रतिवेदन प्राप्त किया गया. इसके आलोक में जिला सहकारिता पदाधिकारी को राशि नहीं भेजने का आग्रह किया गया. जांच के क्रम में धान अधिप्राप्ति किये जाने के बावजूद मिलों से पैक्सों को संबद्ध किये जाने की कार्रवाई का कोई साक्ष्य कार्यालय में नहीं पाया गया.
धान क्रय किये जाने और क्रय किये गये धान को वापस किये जाने का कोई ठोस प्रमाण भी जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा नहीं दिया गया. जांच में पाया गया कि जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बिना कोई ठोस आधार के करीब 49 करोड़ रुपये की मांग धान अधिप्राप्ति प्रतिवेदन मद में की थी. जांच समिति ने पूरे मामले को संदेहास्पद पाया था. देवघर में धान अधिप्राप्ति के लिए एक कोषांग भी गठित था. कोषांग ने दैनिक प्रतिवेदन का कोई साक्ष्य जांच कमेटी को नहीं उपलब्ध कराया. इस कारण पूरी प्रक्रिया को विभाग ने संदेहास्पद पाया है. इसके आलोक में कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी.
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