रांची : कंपनियों के लाभ में भी हिस्सा मिले : झाविमो

Updated at : 03 Aug 2018 12:23 AM (IST)
विज्ञापन
रांची : कंपनियों के लाभ में भी हिस्सा मिले : झाविमो

रांची : झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने वित्त आयोग के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य को ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासियों के विकास और विस्थापन की समस्या के समाधान के लिए बड़ी राशि चाहिए़ झारखंड खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य है, लेकिन इस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है. सिर्फ […]

विज्ञापन
रांची : झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने वित्त आयोग के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य को ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासियों के विकास और विस्थापन की समस्या के समाधान के लिए बड़ी राशि चाहिए़ झारखंड खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य है, लेकिन इस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है.
सिर्फ रॉयल्टी लेकर हमें चुप हो जाना पड़ता है़ खनिजों के उत्खन्न का दंश हम पीढ़ी दर पीढ़ी झेलते आ रहे है़ं राज्यों के शेयर बंटवारे में राज्य के खनन क्षेत्रफल को भी जोड़ा जाये़ खनिज संपदा में ही रॉयल्टी नहीं, कंपनियों के लाभमें भी हिस्सेदारी हो़ इस बिंदु को जोड़ा जाये़ ग्रामीण क्षेत्र, शहरी क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र को अलग-अलग आधार बनाया जाये़
खनिज संपदा में सही हिस्सेदारी मिले : आजसू
आजसू की ओर से वित्त आयोग को 11 बिंदुओं पर सुझाव दिये गये़ पार्टी की ओर से केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत और जयंत घोष ने पक्ष रखा़ आजसू की ओर से कहा गया कि आयोग ने जनसंख्या को विकास मद के लिए मदद दिये जाने का आधार बनाया है़
जनसंख्या देखने के साथ-साथ इसमें शामिल लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी देखी जाये़ राज्य में 80 प्रतिशत आबादी मूलवासियों की है़ इनका अपना इतिहास रहा है़ इनके विकास के लिए वित्त आयोग को नया मापदंड बनाना चाहिए़ राज्यों के जीएसडीपी के आकलन में कई तरह की खामियां हैं. इसको नये फॉर्मूले के आधार पर तय किया जाये, जिससे झारखंड को उसका हक मिल सके़
आदिवासियों का रखा जाये ख्याल : सीपीआइ
पूर्व सांसद सह सीपीआइ नेता भुवनेश्वर मेहता ने कहा कि झारखंड में उद्योग लग रहे हैं, लेकिन पर्यावरण का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. इन क्षेत्रों में सड़क भी नहीं है. इसका ध्यान रखा जाना चाहिए.
झारखंड खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है. इसके बावजूद यहां से लोगों का पलायन हो रहा है. ऐसे में हमें इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि कैसे यहां के लोगों को रोजगार से जोड़ कर पलायन से रोका जाये. आदिवासियों के विकास को लेकर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया है. इससे झारखंड को 2500 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है. 2022 के बाद इसकी भरपाई कैसे होगी, इस पर विचार करने की जरूरत है.
झारखंड को मिले विशेष राज्य का दर्जा : राजद
राजद के प्रदेश महासचिव आबिद अली ने 15 वें वित्त आयोग के समक्ष झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा देने और केंद्रीय करों (टैक्स) में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की मांग की. उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 18 साल पूरे होने के बावजूद यहां समुचित विकास नहीं हुआ है. जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य नहीं हुआ, जिस वजह से खुशी निराशा में बदल गयी. दलित, आदिवासी व पिछड़ा वर्ग नाखुश है. अल्पसंख्यक अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिज व वन संपदा प्रचुर मात्रा में है, लेकिन 37 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. इस पर विशेष योजना बनाने की जरूरत है.
माकपा की राज्य कमेटी की अोर से 15वें वित्त आयोग को स्मार पत्र दिया गया है. इसमें कहा गया है कि बिहार से अलग होने के बाद से ही झारखंड को प्रति व्यक्ति निम्न आवंटन मिल रहा है. अब इसमें वृद्धि होनी चाहिए.
मनरेगा जैसी केंद्रीय योजना में मजदूरी कम बजट के कारण प्रभावित हो रही है. भारत सरकार की बहुत सी विकास नीतियां व कार्यक्रम पर्यावरण व स्थानीय लोगों पर प्रत्यक्ष रूप से विनाशकारी प्रभाव डाल रहे हैं. इसके आकलन एवं क्षति पूर्ति के लिए विशेष आवंटन की जरूरत है. यह किये बिना विकास की बात करना बेमानी साबित होगा. प्रतिनिधिमंडल में माकपा के राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रकाश विप्लव एवं राज्य कमेटी सदस्य समीर दास शामिल थे.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola