दो राइस मिलों के चार करोड़ का चेक बाउंस, छह माह बाद दर्ज हुई प्राथमिकी, 51 राइस मिलों पर 60 करोड़ बकाया

Updated at : 14 Jul 2018 8:37 AM (IST)
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दो राइस मिलों के चार करोड़ का चेक बाउंस, छह माह बाद दर्ज हुई प्राथमिकी, 51 राइस मिलों पर 60 करोड़ बकाया

संजय रांची : विभाग ने सरकार से धान लेकर चावल नहीं देने वाले बड़े बकायेदार राइस मिलों को फिर से धान नहीं देने का निर्णय लिया था, पर इन्होंने कुछ लोगों को प्रभावित कर तथा पोस्ट डेटेड चेक देकर धान लेने का रास्ता खुलवा लिया. इधर, खरीफ मौसम 2015-16 के बकायेदार हजारीबाग के दो राइस […]

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संजय
रांची : विभाग ने सरकार से धान लेकर चावल नहीं देने वाले बड़े बकायेदार राइस मिलों को फिर से धान नहीं देने का निर्णय लिया था, पर इन्होंने कुछ लोगों को प्रभावित कर तथा पोस्ट डेटेड चेक देकर धान लेने का रास्ता खुलवा लिया. इधर, खरीफ मौसम 2015-16 के बकायेदार हजारीबाग के दो राइस मिलों तृप्ति राइस मिल तथा मां कामाख्या राइस मिल के क्रमश: 2.06 करोड़ तथा 1.97 करोड़ का चेक बाउंस कर गया है
तृप्ति राइस मिल का 12 जनवरी 2018 से 12 मार्च 2018 तक का आठ चेक एक-एक कर बाउंस हो गया. इसी तरह मां कामाख्या राइस मिल का 16 फरवरी से 12 मार्च 2018 तक का कुल पांच चेक बाउंस हो गया. इस बीच दोनों मिलों ने कुल चार चेक के विरुद्ध एनइएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से पैसे चुकाये, पर अब भी तृप्ति राइस मिल पर 1.41 करोड़ तथा मां कामाख्या पर 1.63 करोड़ रुपये सरकार का बकाया है. छह जुलाई को तृप्ति राइस मिल के प्रोपराइटर अर्जुन सिंह तथा मां कामाख्या के प्रोपराइटर कृष्ण मेहता/रंजीत कुमार के खिलाफ दारू तथा मुफस्सिल थाना, हजारीबाग में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
अकेले हजारीबाग के पांच मिलों पर 42 करोड़ की देनदारी
हजारीबाग राइस मिल पर मेहरबानी : इससे पहले करोड़ों बकाया वाले हजारीबाग राइस मिल, हजारीबाग ने भी पोस्ट डेटेड (पीडी) चेक देकर मिल खुलवाया था. इसके लिए सिर्फ 2.5 करोड़ के कुल नौ पोस्ट डेटेड चेक दिये गये, जो अक्तूबर 2019 तक के हैं. इस मिल के कई चेक भी बाउंस हो रहे हैं.
पर इस मिल पर कुछ विभागीय लोगों की मेहरबानी के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है.फिर नहीं दिया चावल : तृप्ति राइस मिल तथा मां कामाख्या राइस मिल का उपरोक्त बकाया खरीफ मौसम 2015-16 का है. इधर, मां कामाख्या मिल ने खरीफ मौसम 2017-18 में लिये गये धान का करीब 23080 क्विंटल चावल फिर से गायब कर दिया है. हजारीबाग राइस मिल ने भी इसी वर्ष का 41254 क्विंटल चावल सरकार को अब तक नहीं दिया है, पर इसके प्रोपराइटर विजय सिंह मजे में हैं.
नहीं हुआ सर्टिफिकेट केस
खाद्य आपूर्ति विभाग ने राज्य भर के बकायेदार राइस मिल मालिकों पर सर्टिफिकेट केस करने का निर्णय लिया था, पर बकाये रकम की वसूली के लिए अब तक यह काम नहीं हो सका है. गौरतलब है कि झारखंड के 51 राइस मिलों पर गत पांच वर्षों से सरकार का करीब 60 करोड़ रुपये बकाया है. खरीफ मौसम 2012-13 में सरकार से धान लेकर इन मिलों ने बदले में चावल या पैसा नहीं दिया. अकेले हजारीबाग के पांच राइस मिल प्रबंधन पर 42 करोड़ रुपये की देनदारी है.
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