रांची : जमीन लूटने के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी कानून में किया जा रहा बदलाव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Jul 2018 8:47 AM
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रांची : सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता व बुद्धिजीवियों ने ‘कंसंर्ड सिटिजंस ऑफ झारखंड’ के बैनर तले राजभवन के समक्ष धरना दिया. इस क्रम में आदिवासी, मूलवासी, अल्पसंख्यक व दलित समुदाय के विकास के नाम पर प्रशासन द्वारा अत्याचार के संदर्भ में राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया़ नाजिर हुसैन, गोपीनाथ घोष, बीर सिंह मुंडा […]
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रांची : सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता व बुद्धिजीवियों ने ‘कंसंर्ड सिटिजंस ऑफ झारखंड’ के बैनर तले राजभवन के समक्ष धरना दिया. इस क्रम में आदिवासी, मूलवासी, अल्पसंख्यक व दलित समुदाय के विकास के नाम पर प्रशासन द्वारा अत्याचार के संदर्भ में राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया़
नाजिर हुसैन, गोपीनाथ घोष, बीर सिंह मुंडा व अन्य ने कहा कि राज्य गठन के बाद यहां रहने वाले आदिवासियों, मूलवासियों, अल्पसंख्यकों व दलित समुदाय के लोगों का शोषण कम होने के बजाये बढ़ता गया है़ मोमेंटम झारखंड आयोजित कर सरकार ने बड़ी बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू किया, जिन्हें जमीन देने के लिए लैंड बैंक बनाया जा रहा है़
इससे भी जरूरत पूरी न होने पर भूमि अधिग्रहण संबंधी कानूनों में लगातार बदलाव किये जा रहे है़ं जमीन लूटने के लिए पूरा झारखंड छावनी में तब्दील किया जा रहा है़ इस अवसर पर कलामुद्दीन, विमल सोरेन, लक्ष्मी कुमारी, कामना खलखो, सुनीता सिंह, निर्मला लकड़ा, ठाकुर सोरेन, रंजीत उरांव, प्रफुल्ल लिंडा, जयवंती होरो, पूनम सोरेन, रूपी उरांव, एलिस चेरोवा, विकासटोप्पो गौतम मिंज आदि मौजूद थे़
सख्ती से लागू हो पेसा कानून : ज्ञापन में मांग की गयी है कि झारखंड की पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून सख्ती से लागू किया जाये़
खूंटी जिले के कोचांग गांव में हुई बलात्कार की घटना की पीड़िताओं को पुलिस संरक्षण (कैद) से मुक्त कर उनके परिजनों को सौंपा जाये़ साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच की करायी जाये़ बलात्कार के दोषियों को चिह्नित कर अविलंब गिरफ्तार किया जाये़
रांची : झाविमो ने विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े पत्र में उल्लेखित सभी 20 लोगों के कॉल डिटेल्स की जांच करने की मांग की है. झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इस कुकृत्य में दो राज्य के मुख्यमंत्री तक शामिल हैं. मुख्यमंत्री सहित सभी लोगों के निजी मोबाइल नंबर, उनके पीए व उनके चालकों के मोबाइल नंबर की जांच की जाये. खास कर एक जनवरी 2015 से लेकर 10 फरवरी 2015 तक की अवधि की कॉल डिटेल्स की जांच की जाये.
इससे भाजपा पूरी तरह बेनकाब हो जायेगी. भाजपा आखिर सीबीआइ जांच से क्यों डर रही है? सरकार इसकी अनुशंसा कर दूध-का-दूध व पानी-का-पानी क्यों नहीं करती है? पत्र को फर्जी करार देकर सिर्फ बयानबाजी की जा रही है. श्री सिंह ने बाबूलाल के बयान का जिक्र करते हुए कि भाजपा के दामन पर इतने दाग हैं कि दुनिया का कोई भी साबुन उसे धो नहीं सकता है. भाजपा बयान आईवाश करने जैसा है.
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