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झारखंड के स्थानीय निवासी के आधार पर शामिल होने का मौका, जानिए कैसे

Updated at : 03 Jul 2018 6:46 AM (IST)
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झारखंड के स्थानीय निवासी के आधार पर शामिल होने का मौका, जानिए कैसे

रांची : सीबीएसइ नयी दिल्ली की ओर से आयोजित नेशनल इंट्रेंस एग्जामिनेशन टेस्ट (नीट) 2018 के तहत राज्य कोटे से मेडिकल, डेंटल, बीएचएमएस कालेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. नीट-2018 के तहत सीबीएसइ ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें अपने स्थानीय निवासी की परिभाषा के तहत ही काउंसेलिंग की प्रक्रिया पूरी […]

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रांची : सीबीएसइ नयी दिल्ली की ओर से आयोजित नेशनल इंट्रेंस एग्जामिनेशन टेस्ट (नीट) 2018 के तहत राज्य कोटे से मेडिकल, डेंटल, बीएचएमएस कालेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. नीट-2018 के तहत सीबीएसइ ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें अपने स्थानीय निवासी की परिभाषा के तहत ही काउंसेलिंग की प्रक्रिया पूरी करेंगे.
नीट-2018 के अखिल भारतीय रैंकिंग सूची के आधार पर राज्य कोटे के लिए संबद्ध परीक्षा पर्षद मेधा सूची जारी करेगी. इसमें सीबीएसइ की तरफ से तय किये गये सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग-1, अन्य पिछड़ा वर्ग-2 और पीडब्ल्यूडी कोटे के तहत मेधा सूची तैयार करना जरूरी किया गया है. इसके अलावा शैक्षणिक पात्रता और योग्यताएं भी राज्यों के लिए मान्य होगी, जो सीबीएसइ ने तय किये हैं.
झारखंड में स्थानीयता की परिभाषा
झारखंड में काउंसेलिंग मंगलवार तीन जुलाई से शुरू होगी. इसमें राज्य सरकार की ओर से परिभाषित स्थानीय निवासी का प्रमाण पत्र सफल अभ्यर्थियों को प्रस्तुत करना होगा. इसमें कहा गया है कि झारखंड राज्य की भौगोलिक सीमा में निवास करनेवाले अथवा जिनके पूर्वज का नाम खतियान में दर्ज है, वे स्थानीय निवासी कहलायेंगे. भूमिहीन की स्थिति में ग्रामसभा द्वारा चिह्नित मापदंड को माना जायेगा. झारखंड में 30 वर्षों से रहनेवाले व्यापारी, नियोजित कर्मचारी के परिवार और संतान को भी ऐसी स्थिति में झारखंडी माना जायेगा.
स्थानीय निवासी कहलानेवालों में राज्य कर्मी, मान्यता प्राप्त संस्थान, निगम में कार्यरत कर्मचारी के परिवार और संतान को भी इसमें शामिल किया गया है. केंद्र सरकार के कर्मी, झारखंड में किसी संवैधानिक पद पर प्रतिनियुक्त अधिकारी को भी इस श्रेणी में रखा गया है. ऐसा व्यक्ति जिनका जन्म झारखंड में हुआ है और उसने अपने मैट्रिकुलेशन तथा समकक्ष स्तर की शिक्षा मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त की है, उसे भी राज्य का निवासी माना जायेगा.
बिहार में स्थानीयता की परिभाषा
वहीं, बिहार सरकार की ओर से स्थानीय निवासी में उन्हें शामिल किया गया है, जो बिहार के स्थायी निवासी हैं. बिहार के निबंधित शरणार्थियों को भी इसमें शामिल किया गया है. जिस सफल अभ्यर्थी के माता-पिता बिहार के सरकारी कर्मी हैं, उन्हें भी स्थानीय निवासी होने का दर्जा दिया गया है.
राज्य पुनर्गठन के समय वैसे कर्मचारी जो बिहार के कर्मी, अधिकारी हैं और अब तक उनका अंतिम कैडर बंटवारा नहीं हुआ है, उन्हें भी बिहार का स्थायी निवासी माना गया है. इतना ही नहीं बिहार में पदस्थापित केंद्रीय कर्मचारी को भी स्थानीय निवासी का दर्जा दिया गया है. बिहार सरकार ने राष्ट्र संघ के कर्मचारी जो राज्य में पदस्थापित हैं, उन्हें भी स्थानीय निवासी घोषित किया है.
एमबीबीएस कॉलेजों में दाखिले के लिए कोई भी अभ्यर्थी आवेदन कर सकता है, लेकिन काउंसेलिंग के दौरान जो अभ्यर्थी झारखंड का आवासीय प्रमाण पत्र देगा, उसी को सीटें आवंटित की जायेंगी. सीट के आवंटन के समय अभ्यर्थी को अपने सभी मूल प्रमाण पत्र दिखाना होगा.
सुरेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद.
आज से नामांकन के लिए प्रथम राउंड की काउंसेलिंग
रांची : एमबीबीएस, बीडीएस व आयुष चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए प्रथम राउंड की काउंसेलिंग तीन जुलाई से शुरू होगी. यह चार जुलाई तक चलेगी. झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद द्वारा नीट (यूजी)-2018 के रिजल्ट के आधार पर स्टेट मेरिट लिस्ट तैयार की गयी है, जिसके आधार पर काउंसेलिंग की जायेगी.
स्टेट मेरिट लिस्ट में 2683 अभ्यर्थी शामिल हैं. इस संबंध में पर्षद के परीक्षा नियंत्रक सुरेंद्र कुमार के हस्ताक्षर से वेबसाइट पर आवश्यक सूचना जारी की गयी है. संबंधित अभ्यर्थी अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर प्रकाशित सूचना देख सकते हैं. झारखंड से बाहर के रहनेवाले 311 अभ्यर्थियों के आवेदन को रद्द किया गया है.
कहां कितनी सीटें
एमबीबीएस कुल सीट 247
रिम्स रांची 123
एमजीएम, जमशेदपुर 83
पीएमसीएच, धनबाद 41
बीडीएस कुल सीट 296
रिम्स रांची 41
अवध डेंटल कॉलेज, जमशेदपुर 85
हजारीबाग इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल सायंस 85
वनांचल डेंटल कॉलेज गढ़वा 85
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