आवश्यकता पड़ने पर ही कृषि भूमि का अधिग्रहण, लोगों को गुमराह कर रहा विपक्ष, बोले भाजपा अध्यक्ष गिलुवा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Jun 2018 5:31 AM (IST)
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रांची : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन आदिवासी, मूलवासी व रैयतों के अधिकारों की रक्षा करेगा. आज से पहले भी जमीन ली जाती थी. अब कानून बन जाने से सरकारी योजनाओं का काम तेज हो पायेगा. आवश्यकता पड़ने पर ही एक चौथाई कृषि भूमि […]
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रांची : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन आदिवासी, मूलवासी व रैयतों के अधिकारों की रक्षा करेगा. आज से पहले भी जमीन ली जाती थी. अब कानून बन जाने से सरकारी योजनाओं का काम तेज हो पायेगा. आवश्यकता पड़ने पर ही एक चौथाई कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जायेगा. लक्ष्मण गिलुवा रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे.
उन्होंने कहा : विपक्ष भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर दिग्भ्रमित कर रहा है. कानून में कहीं भी उद्योगपतियों को भूमि उपलब्ध कराने की बात नहीं की गयी है. सिर्फ सरकारी योजनाओं जैसे सड़क, विद्यालय, अस्पताल, ग्रिड निर्माण आदि के लिए कानून को सरल किया गया है.
अब रैयत को सरकारी योजनाओं के लिए ली गयी जमीन पर चार गुणा भुगतान मिलेगा, जो इसके पूर्व नहीं होता था. शिड्यूल एरिया में पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की अनुमति लेकर ही जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा.
विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए संशोधन
उन्होंने कहा : सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुपयोगी बंजर भूमि के अधिग्रहण के लिए पहले से कानून है. किसी भी जिले में बहुफसली सिंचित क्षेत्र को दो प्रतिशत से अधिक अर्जित नहीं किया जायेगा. कुल बोया क्षेत्र की एक चौथाई से अधिक भूमि का अधिग्रहण नहीं होगा. कई राज्यों ने भू-अर्जन कानून में संशोधन किया है. झारखंड में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है. अब सरकारी योजनाओं के लिए जनहित में मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहीत की जा सकेगी.
पत्थलगड़ी के नाम पर समाज को बांटने का हो रहा काम
उन्होंने कहा : पत्थलगड़ी सरना समाज का अधिकार है. वर्षों से पत्थलगड़ी हो रही है.गांव में बड़े बुजुर्ग का निधन होता था, तो सीमाना पर पत्थलगड़ी होती थी. वर्तमान समय में खूंटी आदि क्षेत्रों में चल रहा अभियान राष्ट्र व समाज विरोधी कार्य है. पत्थलगड़ी सरना आदिवासी समाज की परंपरा है, जो विशेष अवसर पर की जाती है. पर आज की पत्थलगड़ी समाज को बांटने वाला है. भारतीय संविधान को चुनौती देनेवाला है. विकास को अवरुद्ध करने के लिए इस प्रकार का काम किया जा रहा है.
यूसुफ पूर्ति जैसे लोगों को पत्थलगड़ी करने का अधिकार नहीं है. एेसे लोगों को चिह्नित कर सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी. प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बचकाना हरकत कर रहे हैं. वह सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं. विपक्ष को बताना चाहिए कि यूपीए के शासन काल में उद्योग के नाम पर विस्थापित लाखों लोग आज कहां हैं? मौके पर मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी मौजूद थे.
विपक्ष को दी बहस की चुनौती
लक्ष्मण गिलुवा ने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह बताये कि बिल में कहां कहा गया है कि उद्योग घरानों के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा. इस मुद्दे पर भाजपा विपक्ष से खुला बहस करने को तैयार है.
सरकार व संगठन में संवादहीनता नहीं : यह पूछे जाने पर कि भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी संवादहीनता का सवाल उठाया है, लक्ष्मण गिलुवा ने कहा : सरकार व संगठन में किसी प्रकार की संवादहीनता नहीं है. कोर कमेटी के माध्यम से बैठक कर संगठन की बात को सरकार तक पहुंचायी जाती है.
आज रणनीति बनायेगा विपक्ष
भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी के खिलाफ आदिवासी सेंगेल अभियान ने सोमवार को झारखंड बंद बुलाया है़ बंद को लेकर रांची सहित राज्य के अन्य जिलों में पांच हजार अतिरिक्त जवान तैनात किये गये हैं.इधर, नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की सोमवार को बैठक बुलायी है. उन्होंने विपक्ष के नेताओं से बात कर साझा आंदोलन चलाने की बात कही है. हेमंत सोरेन ने विपक्ष के बैठक में आजसू को भी आमंत्रित किया है, कहा है कि यह झारखंडी अस्मिता का सवाल है.
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