केंद्रीय गृह सचिव सुलझायेंगे बिहार-झारखंड के संपत्ति बंटवारा का विवाद, 8 जून को दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, जानें मामला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jun 2018 7:21 AM

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रांची : झारखंड-बिहार संपत्ति बंटवारा विवाद केंद्र सरकार के गृह सचिव राजीव गौबा सुलझायेंगे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्ति विवाद सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह सचिव को नियुक्त किया गया है. आठ जून को श्री गौबा ने बिहार और झारखंड के मुख्य सचिव को इस मुद्दे पर दिल्ली बुलाया है. […]

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रांची : झारखंड-बिहार संपत्ति बंटवारा विवाद केंद्र सरकार के गृह सचिव राजीव गौबा सुलझायेंगे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्ति विवाद सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह सचिव को नियुक्त किया गया है. आठ जून को श्री गौबा ने बिहार और झारखंड के मुख्य सचिव को इस मुद्दे पर दिल्ली बुलाया है. बैठक कर विवाद खत्म करने का प्रयास किया जायेगा.
उल्लेखनीय है कि झारखंड-बिहार में परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर काफी विवाद है. कई मामले न्यायालय के अधीन भी हैं. तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड का रजिस्ट्रेशन बिहार में है, पर इसकी संपत्ति और कार्यालय पर झारखंड का नियंत्रण है. मामला कोर्ट में विचाराधीन है. वर्ष 2005 तक की अवधि के लिए बोर्ड निगम कर्मियों के पेंशन के लिए 74.77 करोड़ रुपये का भुगतान, संयुक्त बिहार में कोल इंडिया द्वारा 187.49 करोड़ रुपये की कोयला आपूर्ति पर बिहार स्टेट पावर जेनरेशन का दावा, बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी-पेंशन के मद में 74.44 करोड़ रुपये का भुगतान, संयुक्त बिहार को मिले उरमा पहाड़ी ब्लॉक में खनन शुरू नहीं होना जैसे कई विवाद दोनों राज्यों के बीच हैं.
इसके अलावा परिसंपत्तियों के बंटवारे के लिए बिहार राज्य आवास बोर्ड झारखंड पर 2.57 करोड़ रुपये का भुगतान, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम को 2.14 करोड़ रुपये का भुगतान, 2001-05 तक की अवधि में कर्मचारियों को 87 करोड़ रुपया भुगतान, बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के 381 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति, कृषि विपणन पर्षद के लिए झारखंड से बिहार को 24 करोड़ रुपये के भुगतान जैसे कई अन्य मामले वर्षों के लंबित हैं.
बुलाये गये हैं दोनों राज्यों के मुख्य सचिव
संयुक्त बिहार के कर्मियों का बंटवारा
संयुक्त बिहार में कुल कर्मचारियों की संख्या पांच लाख थी. बंटवारे के बाद बिहार के हिस्से में साढ़े तीन लाख कर्मचारी आये और डेढ़ लाख कर्मी झारखंड में रहे. बाद में कैडर विभाजन के खिलाफ कुछ कर्मचारियों ने हाइकोर्ट व गृह मंत्रालय में अपील की, जिसका समाधान कर दिया गया है. लगभग पांच हजार कर्मियों का बंटवारा आपसी सहमति के आधार पर हुआ है. 31 अक्तूबर 2013 तक कर्मियों से अंतिम रूप से अभ्यावेदन मांगे गये थे, जिसमें लगभग 50 मामले आये हैं, जिसका निष्पादन शीघ्र होना है.
जलाशय योजना पर भी असहमति
बिहार-झारखंड के बीच उत्तर कोयल जलाशय योजना, बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर योजना एवं बटाने जलाशय योजना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं.
लेकिन अन्य योजनाओं यथा तिलैया ढांढर अपसरण योजना एवं अपर सकरी जलाशय योजना पर झारखंड सरकार असहमति जता रही है. बिहार ने योजना के कार्यान्वयन पर खर्च होनेवाली राशि वहन करने का प्रस्ताव दिया था. इन योजनाओं से होनेवाले लाभ जैसे विद्युत उत्पादन, पेयजल आदि भी झारखंड को देने का प्रस्ताव दिया गया था, परंतु वहां से अब तक कोई पहल नहीं हुई है.
अब तक अनसुलझा है नक्शा विवाद
कैडस्ट्रल मैप यानी नजरी नक्शा उपलब्ध कराने का विवाद दोनों राज्यों में लंबे समय से चला आ रहा है. विभाजन के पूर्व सरकारी कागजों की छपाई के लिए गुलजारबाग में प्रिंटिंग मशीन थी. विभाजन के बाद झारखंड के 82,119 राजस्व गांवों का कैडस्ट्रल मैप यानी नजरी नक्शा झारखंड को हस्तांतरित किया जाना था. बिहार सरकार को राशि लेकर नक्शा झारखंड को उपलब्ध कराना था. लेकिन, अब तक सभी नक्शे झारखंड को उपलब्ध नहीं कराये गये हैं.
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