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चारा घोटाला मामला: लालू प्रसाद की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकृत

Updated at : 28 Apr 2018 6:09 AM (IST)
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चारा घोटाला मामला: लालू प्रसाद की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकृत

चारा घोटाला मामले में लालू, डॉ जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के सीएस, पूर्व सीएस के मामलों की हुई सुनवाई रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को चारा घोटाला आरसी-38ए/96 मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की अोर से दायर क्रिमिनल अपील याचिका पर […]

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चारा घोटाला मामले में लालू, डॉ जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के सीएस, पूर्व सीएस के मामलों की हुई सुनवाई
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को चारा घोटाला आरसी-38ए/96 मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की अोर से दायर क्रिमिनल अपील याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद अपील याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकृत कर लिया.
साथ ही सीबीआइ के विशेष अदालत को केस से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. हाइकोर्ट ने इस मामले में सीबीआइ को जवाब देने को कहा है. इससे पूर्व अपील पर सुनवाई के दाैरान प्रार्थी की अोर से वरीय अधिवक्ता चितरंजन सिन्हा, अधिवक्ता प्रभात कुमार ने पक्ष रखा. वहीं सीबीआइ की अोर से अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने पक्ष रखा. इस मामले में लालू प्रसाद को सीबीआइ कोर्ट ने सजा सुनायी है.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने अपील याचिका दायर कर सीबीआइ की विशेष अदालत के सजा संबंधी फैसले को चुनाैती दी है. सीबीआइ की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के आरसी-38ए/96 मामले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को सात-सात साल की सजा सुनायी है. साथ ही 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के इस मामले में सीबीआइ अदालत ने लालू प्रसाद सहित 19 आरोपियों को सजा सुनायी थी. इसी सजा को लालू की ओर से चुनौती दी गयी है.
दुमका कोषागार मामले में लालू को हुई है अधिकतम 14 साल की सजा
सीबीआइ अदालत ने 23 मार्च को आरसी-38ए/96 के दुमका कोषागार मामले में सबसे अधिक 14 साल की सजा सुनायी है. 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. अदालत ने आइपीसी के तहत सात साल व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत सात साल की सजा सुनायी थी. दोनों सजाएं साथ-साथ नहीं चलेंगी. सात साल की सजा काटने के बाद लालू प्रसाद को पुन: सात साल की सजा काटनी होगी. जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर अलग से सजा भुगतनी पड़ेगी.
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