झारखंड: दुमका ट्रेजरी से जुड़े चारा घोटाले में सीबीआइ दायर करेगी पूरक अपील
Updated at : 05 Apr 2018 7:06 AM (IST)
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विशेष न्यायाधीश के फैसले में कही गयी बातों को दी जायेगी चुनौती रांची : सीबीआइ चारा घोटाले के दुमका कोषागार से जुड़े मामले में पूरक अपील दायर करेगी. सीबीआइ अधिकारियों ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है. कांड संख्या आरसी 38ए/96 में विशेष न्यायाधीश द्वारा अपने फैसले में सीबीआइ के एडिशनल एसपी के बयान के […]
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विशेष न्यायाधीश के फैसले में कही गयी बातों को दी जायेगी चुनौती
रांची : सीबीआइ चारा घोटाले के दुमका कोषागार से जुड़े मामले में पूरक अपील दायर करेगी. सीबीआइ अधिकारियों ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है.
कांड संख्या आरसी 38ए/96 में विशेष न्यायाधीश द्वारा अपने फैसले में सीबीआइ के एडिशनल एसपी के बयान के आधार पर कही गयी बातों को चुनौती दी जायेगी. इस सिलसिले में तैयार किये गये दस्तावेज में सीबीआइ की ओर से यह दावा पेश किया जा रहा है कि विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में जिन बातों का उल्लेख किया है, उसे एडिशनल एसपी एके झा ने अदालत में कहा ही नहीं है.
सीबीआइ द्वारा तैयार किये गये दस्तावेज में कहा गया है कि सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा ने चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 38ए/96 में बतौर गवाह अपना बयान दर्ज कराया था. उन्होंने अपने बयान में अभियुक्त बेनु झा के बारे में कुछ भी नहीं कहा. इसके बावजूद फैसले में यह लिखा गया है कि एके झा ने अपने बयान में यह कहा था कि बेनु झा पढ़ने में सक्षम नहीं है. वह सिर्फ हस्ताक्षर कर सकती है.
सीबीआइ का कहना है कि एके झा ने यह बात सरस्वती चंद्रा के बारे में कही थी. फैसले में महेश प्रसाद के मामले में जांच अधिकारी के बयान का उल्लेख किया गया है. फैसले में कहा गया है कि जांच अधिकारी ने अपने बयान में यह कहा है कि महेश प्रसाद के घर से एेसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे साजिश में उनकी संलिप्तता साबित हो.
सीबीआइ का यह कहना है कि जांच अधिकारी ने न्यायालय में महेश प्रसाद के सिलसिले में इस तरह की कोई बात नहीं कही है. सीबीआइ के जांच अधिकारी और गवाहों द्वारा दिये गये बयान अदालत के दस्तावेज में दर्ज हैं. सीबीआइ द्वारा पूरक अपील के लिए तैयार किये गये दस्तावेज में महालेखाकार को अभियुक्त बनाये जाने को गलत बताया गया है.
इस मामले में यह कहा गया है कि दुमका ट्रेजरी से निकासी का वाउचर ट्रेजरी से ही जब्त किया गया था. महालेखाकार को इसे देखने या जांच करने का मौका ही नहीं मिला. इसलिए इस मामले में महालेखाकार के अधिकारियों को अभियुक्त नहीं बनाया जा सकता है.
दूसरी तरफ अभियुक्त बनाये गये महालेखाकार के अधिकारियों द्वारा भी उन्हें अभियुक्त बनाये जाने के चुनौती देने की तैयारी की जा रही है. इन अधिकारियों ने सीबीआइ से संपर्क स्थापित कर आवश्यक दस्तावेज की मांग की है.
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