झारखंड : बिना खतियान नहीं बनता आवासीय प्रमाण पत्र, जिनके पास जमीन और नौकरी नहीं, लौट रहे निराश

Updated at : 26 Mar 2018 6:12 AM (IST)
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झारखंड : बिना खतियान नहीं बनता आवासीय प्रमाण पत्र, जिनके पास जमीन और नौकरी नहीं, लौट रहे निराश

रांची : नयी स्थानीय नीति लागू करते हुए सरकार ने आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी आवासीय प्रमाण पत्र अब भी बिना खतियान के नहीं बन रहे हैं. इस कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रज्ञा केंद्रों पर आवासीय प्रमाण-पत्र बनवाने […]

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रांची : नयी स्थानीय नीति लागू करते हुए सरकार ने आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी आवासीय प्रमाण पत्र अब भी बिना खतियान के नहीं बन रहे हैं. इस कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रज्ञा केंद्रों पर आवासीय प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए आनेवाले आवेदकों से खतियान, जमीन की डीड और नौकरी से संबंधित सर्विस बुक की कॉपी मांगी जा रही है. इससे जिनके पास जमीन और नौकरी नहीं है, वैसे आवेदक निराश लौट रहे हैं.
हो रही परेशानी : एक तरफ राज्य सरकार की नियुक्तियों में स्थानीयता प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. दूसरी तरफ, स्थानीय और जाति प्रमाण पत्र हासिल करने में छात्रों को काफी परेशानी हो रही है. जिन छात्रों के माता-पिता 30 वर्षों से भी अधिक समय से झारखंड में रह रहे हैं, वे इससे संबंधी प्रमाण भी उपलब्ध करा रहे हैं. इसके बावजूद प्रमाण पत्र मिलने में परेशानी हो रही है. कई जगहों पर अब भी खतियान मांगा जा रहा है.
आवेदकों कहते हैं कि उन्हें अंचल कार्यालय में दौड़ाया जाता है. मान्य दस्तावेज के बारे में साफ-साफ नहीं बताया जाता है. कर्मचारी आवेदकों के साथ सही व्यवहार भी नहीं करते हैं. बिना कारण बताये आवेदन रिजेक्ट किये जा रहे हैं. ऐसे में प्रतियाेगी परीक्षाओं के आवेदन की अंतिम तिथि जैसे-जैसे नजदीक पहुंच रही है, वैसे-वैसे छात्रों की बेचैनी बढ़ रही है.
संकल्प में साफ कहा गया है कि प्रमाण-पत्र के लिए खतियान जरूरी नहीं
राज्य सरकार का निर्देश
मालूम हो कि स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र जारी करने के संबंध में राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं. झारखंड सरकार ने स्थानीय नीति की मंजूरी 7 अप्रैल 2016 को हुई कैबिनेट की बैठक में दी थी. कार्मिक विभाग ने इस संदर्भ में संकल्प 18 अप्रैल को प्रकाशित किया गया था. संकल्प में यह साफ है कि प्रमाण-पत्र के लिए खतियान जरूरी नहीं है. अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाण-पत्र संबंधित व्यक्ति के पूरे जीवनकाल के लिए मान्य होता है. प्रमाण-पत्र सिर्फ उसे ही जारी किया जा सकता है जो स्थानीयता निवास नीति के संदर्भ में तय छह मानकों में से किसी एक पर खरा उतरता हो.झारखंड का स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए तय प्रारूप में आवेदन के साथ स्थानीय निवासी के दावे के समर्थन में शपथपत्र भी मुहैया कराना है. दावा के समर्थन में प्रमाण भी उपलब्ध कराना होगा.
स्थानीयता की छह श्रेणियां, जिनमें किसी एक पर खरा उतरना होगा आवेदक को
1. झारखंड राज्य की भौगोलिक सीमा में निवास करता हो. स्वयं व पूर्वज के नाम से पिछले सर्वे खतियान में नाम दर्ज हो. भूमिहीन के मामले में उनकी पहचान संबंधित ग्राम सभा द्वारा होगी.
2. किसी व्यापार नियोजन एवं अन्य कारणों से झारखंड में 30 साल या अधिक अवधि से रह रहा हो, अथवा अचल संपत्ति अर्जित की हो या ऐसे व्यक्ति की पत्नी, पति या संतान हो.
3. झारखंड सरकार संचालित मान्यता प्राप्त संस्थानों निगम आदि में नियुक्ति एवं कार्यरत पदाधिकारी व कर्मचारी या उनकी पत्नी, पति या संतान हो.
4. भारत सरकार का पदाधिकारी या कर्मचारी जो झारखंड में कार्यरत हो या उनकी पत्नी पति या संतान हो.
5. झारखंड में किसी संवैधानिक या विधिक पदों पर नियुक्त व्यक्ति या उनकी पत्नी, पति या संतान हो.
6. ऐसा व्यक्ति जिसका जन्म झारखंड में हुआ हो तथा जिसने मैट्रिकुलेशन या समकक्ष स्तर की पूरी शिक्षा झारखंड स्थित मान्यता प्राप्त संस्थानों से पूरी की हो एवं झारखंड में निवास करने की प्रतिबद्धता रखता हो.
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