गंभीर समस्या: पॉलिथीन के दुष्प्रभावों के बारे में जानते हुए भी लापरवाह बने हुए हैं लोग ...तो, आप कब पॉलिथीन को ना कहेंगे

Updated at : 20 Sep 2017 7:45 AM (IST)
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गंभीर समस्या: पॉलिथीन के दुष्प्रभावों के बारे में जानते हुए भी लापरवाह बने हुए हैं लोग   ...तो, आप कब पॉलिथीन को ना कहेंगे

राज्य सरकार पॉलिथीन कैरी बैग के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लाग चुकी है. यह निर्णय प्रदूषण रोकने और पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए लिया गया है. सरकार के इस निर्णय की सराहना तो सभी कर रहे हैं, लेकिन इसका पालन करने को कोई तैयार नहीं दिख रहा है. आज भी पॉलिथीन […]

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राज्य सरकार पॉलिथीन कैरी बैग के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लाग चुकी है. यह निर्णय प्रदूषण रोकने और पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए लिया गया है. सरकार के इस निर्णय की सराहना तो सभी कर रहे हैं, लेकिन इसका पालन करने को कोई तैयार नहीं दिख रहा है. आज भी पॉलिथीन कैरी बैग का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में सवाल यह उठाता है कि आम आदमी पॉलिथीन के दुष्प्रभावों के प्रति कब जागरूक होगा और निजी स्तर पर पॉलिथीन का उपयोग कब बंद करेगा?
रांची: झारखंड सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग ने 15 सितंबर को अधिसूचना जारी कर प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माण, आयात, भंडारण, परिवहन, बिक्री या उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. यानी कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के प्लास्टिक कैरी बैग का इस्तेमाल नहीं कर सकते. केवल खाद्य सामग्री, दुग्ध उत्पाद, पैकेज्ड दूध, नर्सरी के पौधे में प्रयुक्त होने होने वाले प्लास्टिक को ही छूट दी गयी है.

पॉलिथीन की वजह से पर्यावरण और आम जन-जीवन पर पड़नेवाले दुष्प्रभाव के कारण झारखंड समेत देश के कई राज्यों और कई प्रमुख शहरों में इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है. कई शहरों के नगर निकायों ने पॉलिथीन के दुष्प्रभावों को लेकर अध्ययन कराया गया था, जिसमें पाया गया कि शहर से रोजाना निकलने वाले कचरे का 50 से 60 फीसदी प्लास्टिक उत्पाद था. तकरीबन सभी जगहों पर कूड़े का 20 फीसदी हिस्सा उपयोग किया गया पॉलिथीन पाया गया. इस्तेमाल के बाद फेेंके गये पॉलिथीन के कारण वायु, जल और भूमि प्रदूषण तो बढ़ता ही है, साथ ही शहरों के सीवरेज सिस्टम पर व्यापक असर पड़ता है. पॉलिथीन की वजह से नालियां जाम हाे जाती हैं, सड़कों पर नालियों का पानी बहने लगता है और बरसात में शहर की स्थिति नारकीय हो जाती है.
सब्जी मंडी से लेकर राशन दुकानों तक में पॉलिथीन : सब्जी मंडियों से लेकर राशन की दुकानों तक में आज भी धड़ल्ले से पॉलिथीन का उपयोग हो रहा है. पूछने पर दुकानदार दो टूक जवाब देते हैं : सरकार पॉलिथीन के उपयोग पर बैन लगाने से पहले इसके आयात पर बैन लगाए. जब पॉलिथीन आयेगा ही नहीं, तो उसका उपयोग अपने आप बंद हो जायेगा.

पाॅलिथीन अपने हर रूप में जानलेवा है
पाॅलिथीन अपने हर रूप में जानलेवा है. जलाये बिना भी पॉलिथीन लगातार खतरनाक गैसों (बेंजीन, क्लोराइड, विनायल और इथनॉल ऑक्साइड) का उत्सर्जन कर हवा को विषाक्त बनाता रहता है. लगातार प्लास्टिक की बोतल में पानी या चाय पीनेवालों को कैंसर तक हो सकता है. इस्तेमाल के बाद पॉलिथीन को फेंकना भी कम खतरनाक नहीं है. जमीन में दबाने पर भूमि को बंजर बनाने के साथ यह स्वच्छ जल स्रोत को प्रदूषित करता है. पॉलिथीन से दूषित पानी पीने से खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, चक्कर आना, मांसपेशियों का शिथिल होना, हृदय रोग से पीड़ित हो सकते हैं.
सजा : पांच साल तक की जेल या एक लाख का जुर्माना
पाबंदी का उल्लंघन करनेवालों के न्यायालय द्वारा अपराध प्रमाणित होने पर तीन से पांच साल तक की जेल और एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है.
कोर्ट चाहे तो दोषी को जेल और जुर्माना दोनों सजा साथ-साथ दे सकता है. गलती दोहराने पर सात तक जेल और पांच हजार रुपये प्रतिदिन का जुर्माना है.
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 19 में पाबंदी का उल्लंघन करने पर शिकायत और न्यायालय द्वारा संज्ञान में लेने का प्रावधान है.
अधिनियम की धारा 16 के तहत किसी कंपनी द्वारा सुनियोजित साजिश के तहत पाबंदी का उल्लंघन कर प्लास्टिक कैरी बैग बनाने और उसका व्यापार करने पर कंपनी के मैनेजर, निदेशक और सचिव को दोषी माना जायेगा. धारा 17 में सरकार के किसी विभाग द्वारा पाबंदी का उल्लंघन करने उस विभाग के प्रधान के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है.
बदलनी होगी आदत घर से करें शुरुआत
पॉलिथीन पर रोक तभी लग सकती है, जब हम खुद इसे अपनी आदत से बाहर निकालेंगे. इसकी शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी. जिस दिन हम खुद पॉलिथीन के बदले कपड़े के थैले का उपयोग करना शुरू करेंगे, हालात अपने आप बदल जायेंगे.
नोट : प्लास्टिक पर प्रतिबंध का अनुपालन शहरी क्षेत्र में नगर निगम, स्थानीय शहरी निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत तथा ग्राम सभा को कराना है.
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