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अब चौक -चौराहों, गांव -गलियों में नहीं सुनाई देते राखी के गीत

Updated at : 08 Aug 2025 11:26 PM (IST)
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अब चौक -चौराहों, गांव -गलियों में नहीं सुनाई देते राखी के गीत

अब चौक -चौराहों, गांव -गलियों में नहीं सुनाई देते राखी के गीत

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आधुनिकता के दौर में लोगों के हाथ में आ गये हैं मोबाइल, लोग सुनते हैं गाने

धनेश्वर प्रसाद, कुजू

कुजू व आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया जायेगा. रक्षाबंधन की खुशियां समेटने को लेकर लोग उत्सुक हैं, लेकिन अब रक्षाबंधन के मौके पर गांव- गलियों, चौक-चौराहों पर राखी के गीत नहीं सुनाई पड़ते हैं. राखी के गीतों के बिना रक्षाबंधन का त्योहार अधूरा लगता है. कुछ साल पहले तक राखी के गीत एक माह पहले से ही बजना शुरू हो जाते थे. टेप रिकॉर्डर, कैसेट व सीडी के माध्यम से साउंड बॉक्स पर राखी के गीत रक्षाबंधन का त्योहार आने के संकेत देते थे. नौ अगस्त को रक्षाबंधन है, पर राखी के गीत नहीं सुनाई दे रहे हैं. भाई और बहन के अटूट प्रेम पर आधारित राखी के गीतों ने कभी संगीत प्रेमियों के दिल पर अमिट छाप छोड़ा था. भाई -बहन के रिश्तों की गहराई को वर्णन किये गये इन गीतों को सुनकर दिल खुशियों से भर जाता था. ये गीत रक्षाबंधन को यादगार और सुखद खुशियों का एहसास कराते थे. इन दिनों अब रक्षाबंधन पर राखी पर आधारित गीतों को लोग सुनना और सुनाना पसंद नहीं करते हैं. कुजू के रहने वाले अजय कुमार कहते हैं कि अब जिन लोगों को राखी का गीत सुनना होता है, वह मोबाइल पर डाउनलोड कर गीतों को सुनना ज्यादा पसंद करते हैं.

इन गीतों के बिना अधूरा लगता है रक्षाबंधन का त्योहार :

राखी के गीत और फिल्म : भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना (छोटी बहन), रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना (अनपढ़ ), मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन (काजल), अब के बरस भेज भैया को बाबुल (बंदिनी), फूलों का तारों का सबका कहना है (हरे रामा हरे कृष्णा), बहना ने भाई की कलाई से प्यार (रेशम की डोर), मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया (सच्चा झूठा), चंदा रे मेरे भैया से कहना (चंबल की कसम), राखी धागों का त्योहार (राखी ), हम बहनों के लिए मेरे भैया (अंजाना).

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SAROJ TIWARY

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By SAROJ TIWARY

SAROJ TIWARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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