इबादत-ए-इलाही में गुजरा रमजान का पहला जुमा

इबादत-ए-इलाही में गुजरा रमजान का पहला जुमा
भुरकुंडा. रमजान के पहले जुमे पर शुक्रवार को भुरकुंडा, भदानीनगर, पतरातू, सयाल, उरीमारी व बासल क्षेत्र की मस्जिदों में नमाज के लिए रोजेदारों की भीड़ उमड़ी. नमाज के बाद खुदा से गुनाहों की माफी व सही रास्ते पर चलने के लिए दुआ मांगी गयी. पूरा दिन इबादत-ए-इलाही में गुजरा. घरों में तिलावत-ए-कुरआन का दौर चलता रहा. तस्बीह व जिक्र के बीच पूरा जुमा रब को राजी करने में गुजरा. जुमे की नमाज से पहले भुरकुंडा जामा मस्जिद में तकरीर करते हुए इमाम तहसीन अशरफ मिस्बाही ने कहा कि रोजेदार खुशनसीब हैं, जिनके लिए हर रोज जन्नत सजायी जाती है. रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है. असल रोजा तो वह है, जिससे अल्लाह राजी हो जायें. जब हाथ उठे, तो भलाई के लिए, कान सुने तो अच्छी बातें, कदम बढ़े, तो नेकी के लिए व आंख देखे तो जायज चीजों को. इमाम ने कहा कि रोजेदार की दुआ कभी रद्द नहीं होती है. इसलिए इस महीने में खूब इबादत करें. खूब दुआ मांगे व जन्नत के हकदार बनें. जुमे की नमाज के बाद इफ्तार की तैयारी शुरू हो गयी. लजीज व्यंजन व शरबत से दस्तरख्वान सज गये. इफ्तार का इंतजार शुरू हुआ. शाम 5:57 पर रोजेदारों ने अजान सुनने के साथ रोजा खोला. रोजा खोलने के बाद मगरिब की नमाज अदा की गयी. इसके बाद रात में इशा व तरावीह की नमाज अदा की गयी.
रामगढ़ में तय हुई 75 रुपये सदका-ए-फित्र की राशि : रामगढ़ जिले में सदका-ए-फित्र की राशि 75 रुपये तय की गयी है. एदार-ए-शरिया के प्रवक्ता कारी मुश्ताक महसर ने बताया कि दो किलो 45 ग्राम गेहूं के बाजार भाव के हिसाब से यह रकम तय हुई है. रकम तय करने के लिए मौलाना हबीब आलम, मौलाना अनवर हुसैन कादरी, मुफ्ती इजहार अहमद, मुफ्ती अब्दुल कुद्दुस, मौलाना कलीमुद्दीन रिजवी, कारी मुश्ताक महसर, मौलाना अबु हरैरा मिस्बाही, मौलाना सज्जाद हुसैन बरकाती, मौलाना वाजिद अली ने रायशुमारी की.साहिब-ए-निसाब जकात अवश्य दें : मौलाना अनवर.
मदरसा गुलशन-ए-रजा के प्राचार्य मौलाना अनवर हुसैन कादरी ने कहा कि जकात इस्लाम के पांच रुक्न (स्तंभ) में से एक है. रमजान के महीने में हर साहिब-ए-निसाब मुसलमान पर जकात देना जरूरी बताया गया है. यानी जिसके पास 52.5 तोला चांदी या 7.5 तोला सोना अथवा इसकी बराबर की संपत्ति है, उसे 2.5 फीसदी हिस्सा जकात (दान) के रूप में किसी गरीब या जरूरतमंद को देना है. ईद की नमाज से पहले इसका अदा करना जरूरी होता है. इससे गरीब की भी ईद संपन्नता में मन जाती है.परहेजगार बनाता है रोजा : इमाम रिजवी.
चिकोर मस्जिद के इमाम एजाज अहमद रिजवी ने रोजा के बाबत कहा कि रोजा खाने-पीने व दुनियावी बुरी आदतों से परहेज करने, अपनी इच्छाओं को काबू में रखने, धैर्य व संयम बरतने व अल्लाह के करीब जाने का जरिया है. रमजान का असली उद्देश्य इंसान को परहेजगारी सिखाना है. इससे वह अपनी रूह को पाक कर सके. इस महीने में मुसलमान अधिक से अधिक नमाज पढ़ते हैं. अल्लाह की इबादत करते हैं व अपनी गलतियों की तौबा करते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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