4 लीड) जमीन अधग्रिहण बिना चल रही है कोलियरी

Published at :07 Apr 2016 10:08 PM (IST)
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4 लीड)  जमीन अधग्रिहण बिना चल रही है कोलियरी

4 लीड) जमीन अधिग्रहण बिना चल रही है कोलियरी फ्लैग-रैयत विस्थापित मोरचा व सीसीएल प्रबंधन के बीच बैठक, नहीं निकला नतीजा 10 की बैठक में निर्णय नहीं निकलने पर होगा आंदोलन 7बीएचयू-1-बैठक में उपस्थित अधिकारी व मोरचा प्रतिनिधि. रैयत विस्थापित मोरचा व सीसीएल प्रबंधन के बीच बैठक हुई. मोरचा ने प्रबंधन को जमीन का दस्तावेज […]

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4 लीड) जमीन अधिग्रहण बिना चल रही है कोलियरी फ्लैग-रैयत विस्थापित मोरचा व सीसीएल प्रबंधन के बीच बैठक, नहीं निकला नतीजा 10 की बैठक में निर्णय नहीं निकलने पर होगा आंदोलन 7बीएचयू-1-बैठक में उपस्थित अधिकारी व मोरचा प्रतिनिधि. रैयत विस्थापित मोरचा व सीसीएल प्रबंधन के बीच बैठक हुई. मोरचा ने प्रबंधन को जमीन का दस्तावेज साैंप दिया. प्रबंधन ने समय मांगा है. 10 मई को मोरचा व प्रबंधन के बीच बैठक होगी. रैयतों ने हल नहीं निकलने पर कोलियरी बंद करने की चेतावनी दी.भुरकुंडा. सीसीएल की भुरकुंडा परियोजना में बगैर जमीन अधिग्रहण किये कोयला उत्खनन सहित कंपनी द्वारा अन्य कार्य करने का मामला सामने आया है. रैयत विस्थापित मोरचा के साथ इस मुद्दे पर गुरुवार को भुरकुंडा ऑफिसर्स क्लब में प्रबंधन की बैठक हुई. बैठक में भुरकुंडा के अलावा सीसीएल हेड क्वार्टर व बरका-सयाल के अधिकारी भी शामिल हुए. विस्थापित मोरचा की ओर से केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा सहित तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे. बैठक में मोरचा की ओर से बताया गया कि वर्ष 1924 में बिहारी/ओड़िशा गजट के जरिये बताया गया था कि हजारीबाग जिले के रामगढ़ थाना अंतर्गत कुरसे, बलकुदरा, देवरिया व दुंदूवा की 2248.1 एकड़ भूमि रेलवे बोर्ड की कोलियरी द्वारा अधिग्रहित की जा सकती है. इसके आलोक में सरकार द्वारा 44.40 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था. इसके अनुरूप तत्कालीन रेलवे बोर्ड कोलियरी ने रैयतों को मुआवजा भी दिया. जब रेलवे बोर्ड व एनसीडीसी की कोलियरी सीसीएल को मिली, तब सीसीएल ने उक्त 2248.1 एकड़ जमीन को अपने कब्जे में ले लिया. सीसीएल का तर्क था कि यह जमीन उसे रेलवे बोर्ड व एनसीडीसी से प्राप्त हुई है. इसके बाद सीसीएल उस जमीन पर उत्खनन करने सहित अन्य उपयोग में लाना शुरू कर दिया. वर्तमान में उक्त जमीन पर कोलियरी, परियोजना कार्यालय, आवासीय कॉलोनी, सड़क आदि मौजूद है. उक्त जमीन के रैयतों को आज तक नौकरी, मुआवजा व पुनर्वास की सुविधा नहीं दी गयी. मामले पर मोरचा की ओर से संपूर्ण दस्तावेज भी प्रस्तुत किया गया. बताया गया कि यह जमीन गरीब, अनपढ़, आदिवासी व अनुसूचित जनजातियों की खतियानी रैयती भूमि है. मोरचा ने बैठक में स्पष्ट कर दिया कि यदि मुआवजा व नौकरी के बगैर कोयला उत्खनन कार्य जारी रहा, तो कोलियरी को बंद करा दिया जायेगा.प्रबंधन ने लिया दस्तावेज, 10 मई को होगी बैठक.मोरचा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज की कॉपी सीसीएल प्रबंधन ने ले लिया है. प्रबंधन ने इस संबंध में बैठक में कहा कि दस्तावेजों का अध्ययन कर पूरे मामले की पड़ताल की जायेगी. 10 मई को पुन: मोरचा के साथ बैठक कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की जायेगी. हेडक्वार्टर से आये लीगल ऑपरेशन एके पांडेय ने कहा कि जांच-पड़ताल के बाद मामला सही पाया गया, तो रैयत विस्थापितों को उनका हक-अधिकार मिलेगा.हक-अधिकार लेकर रहेंगे : फागू.मोरचा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा ने कहा कि बैठक से संतुष्ट नहीं हूं. प्रबंधन अक्सर रैयत विस्थापितों के मामलों में टाल-मटोल करता रहेगा. हम अपना अधिकार लड़ कर भी लेना जानते हैं. यदि प्रबंधन जल्द ही मामले पर ठोस नहीं लेगा, तो मोरचा की भावी रणनीति उन पर भारी पड़ेगी. बैठक में मौजूद अधिकारी व मोरचा प्रतिनिधिबैठक में सीसीएल के एलएनआर डीबी रेवालकर, जीएम प्रकाश चंदा, एसओपी वीएसपी सिन्हा, भुरकुंडा के प्रभारी पीओ केएम शर्मा, एएन सिंह, डीके सिंह, मोरचा के महासचिव सैनाथ गंझू, कोषाध्यक्ष रंजीत बेसरा, संजीव कुमार सिन्हा, प्रवक्ता सोनाराम मांझी, केंद्रीय सचिव मोहन मांझी, क्षेत्रीय अध्यक्ष सूरज बेसरा, क्षेत्रीय सचिव मोहन सोरेन, वीरेंद्र मांझी, सन्नी बेसरा, शंकर मांझी, छट्ठू मांझी, सुमितराम किस्कू, राजाराम मुर्मू, जूरा सोरेन, अनिल मांझी, अखिलेश टोप्पो, धनीराम मांझी, ठुरका मांझी, राजू मांझी, बिरसा, राकेश, कौलेश्वर मांझी आदि उपस्थित थे.

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