बिना शिक्षक के चल रहा है नव प्रावि चटनिया

Published at :12 Feb 2016 12:24 AM (IST)
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बिना शिक्षक के चल रहा है नव प्रावि चटनिया

ग्रामीण चंदा कर निजी शिक्षक को मानदेय देते हैं चैनपुर : मांडू प्रखंड के नावाडीह पंचायत में आदिवासी बाहुल गांव चटनिया बस्ती में स्थित नव प्राथमिक विद्यालय बिना किसी सरकरी शिक्षक के चल रहा है. इस विद्यालय को 23 जून 2010 को सरकारी स्वीकृति मिली है. परंतु अब तक यहां किसी सरकारी शिक्षक की प्रतिनियुक्त […]

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ग्रामीण चंदा कर निजी शिक्षक को मानदेय देते हैं
चैनपुर : मांडू प्रखंड के नावाडीह पंचायत में आदिवासी बाहुल गांव चटनिया बस्ती में स्थित नव प्राथमिक विद्यालय बिना किसी सरकरी शिक्षक के चल रहा है. इस विद्यालय को 23 जून 2010 को सरकारी स्वीकृति मिली है. परंतु अब तक यहां किसी सरकारी शिक्षक की प्रतिनियुक्त नहीं की गयी है.
ग्रामीणों द्वारा विद्यालय में पढ़ाने के लिए एक निजी शिक्षक को रखा गया है. जिसे ग्रामीण आपस में चंदा एकत्रित कर उनको मानदेय देते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षक की प्रतिनियुक्ति के लिए कई बार आलाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं. परंतु अब तक शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गयी है. विद्यालय में करीब 35 बच्चे अध्ययनरत हैं. विद्यालय में 2012 में एक बार ही 37 बच्चों को करीब 4150 रुपये छात्रवृति मिली थी. इसके बाद आज तक छात्रवृत्ति नहीं मिली है. वहीं बच्चों को मध्याह्न भोजन भी नहीं दिया जाता है. हालांकि ग्राशिस, प्रबंधन समिति तथा रसोईया का चयन किया गया है.
जंगल से घिरा है गांव
आदिवासी बाहुल गांव चटनिया बस्ती चारों ओर जंगल से घिरा है. गांव के लोग पगडंडी के सहारे आवागमन करते हैं. गांव के राजेंद्र हेम्ब्रोम, गुडू मांझी, जगन मांझी, तालो मांझी, लक्ष्मण मांझी, सूरजमनी देवी, बसंती देवी, संगीता देवी आदि ने बताया कि यहां से तीन चार किमी की दूरी में अन्य सरकारी विद्यालय है. जहां बच्चों को जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
क्या कहते हैं शिक्षक
नव प्राथमिक विद्यालय चटनिया में बच्चों को पढ़ाने के लिए ग्रामीणों द्वारा लगाये गये निजी शिक्षक धनेश्वर प्रसाद का कहना है कि वह इस गांव में करीब 2009 से ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं. इस विद्यालय के बनने के बाद पारा शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए उन्होंने कई बार वरीय अधिकारियों से गुहार लगायी है. परंतु हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा नाम मात्र का मानदेय उन्हें दिया जाता है. अगर पारा शिक्षक के रूप में उन्हें नियुक्त किया गया, तो उनका भी जीवन सही तरीके से चल सकेगा.
क्या कहते है बीइइओ
इस संबंध में मांडू प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी डॉ विजय कुमार से पूछे जाने पर कहा कि वे अभी यहां के लिए नए हैं. उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. एक दो दिनों में विद्यालय की समस्या को दूर करने प्रयास करूंगा.
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