लोकसभा चुनाव: मोदी लहर में भी झामुमो ने जीती राजमहल सीट, विजय हांसदा ने लहराया परचम

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद सभी पार्टियां अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गईं हैं. इस सीरीज में हम आपको झारखंड की 14 लोकसभा सीटों का लेखा-जोखा बताएंगे.
झारखंड के संताल परगना में लोकसभा की तीन सीटें हैं. राजमहल, दुमका और गोड्डा. वर्ष 2014 और वर्ष 2019 में जब पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी, तब भी झारखंड की जिन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जीत नहीं मिली, उसमें एक सीट है- राजमहल. राजमहल लोकसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के युवा नेता विजय हांसदा लगातार दो बार से विजय पताका लहरा रहे हैं. संताल परगना के दुमका और राजमहल लोकसभा सीट पर वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. लोकसभा चुनाव में झारखंड में कुल 66.8015 फीसदी वोटिंग हुई थी. दुमका के बाद राजमहल सबसे ज्यादा मतदान करने वाला दूसरा संसदीय क्षेत्र था. यहां 72.05 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. दुमका में यहां से ज्यादा 73.43 फीसदी वोटर्स ने मतदान किया था. राजमहल संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीटें हैं. पिछली बार चुनाव में कुल 2020 मतदान केंद्र बनाए गए थे. यहां एक मतदान केंद्र पर औसतन 720 मतदाताओं के नाम थे. राजमहल लोकसभा सीट पर 16 लोगों ने नामांकन दाखिल किया था. इनमें से 14 उम्मीदवार अंत तक चुनाव के मैदान में डटे रहे. 12 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. राजमहल लोकसभा क्षेत्र में कुल 14,54,436 मतदाता थे. इनमें से 10,47,853 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. झारखंड में 55 पार्टियों ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. सबसे ज्यादा 51.609 फीसदी वोट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिला था. कांग्रेस पार्टी को कुल 15.8298 वोट मिले थे. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को कुल 11.661 फीसदी मत प्राप्त हुए थे. आजसू पार्टी और झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) को क्रमश: 4.3884 फीसदी और 5.0824 फीसदी मत मिले थे. निर्दलीय उम्मीदवारों को 4.2054 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे, जबकि झारखंड के 1.2819 प्रतिशत मतदाताओं ने इनमें से कोई नहीं (NOTA) का बटन दबाया था.
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झारखंड में 14 लोकसभा सीटों पर चार चरण में हुए चुनाव
लोकसभा चुनाव पिछली बार सात चरणों में हुए थे. पहले चरण की वोटिंग 11 अप्रैल 2019 को हुई. इसमें 20 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की 91 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी. 18 अप्रैल को दूसरे चरण में 12 राज्यों की 95 सीटों पर, 23 अप्रैल को 15 राज्यों की 117 सीटों, 29 अप्रैल को आठ राज्यों की 71 सीटों, छह मई को सात राज्यों की 50 लोकसभा सीटों, 12 मई को सात राज्यों की 59 सीटों और 19 मई को आठ राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी. पांच अगस्त को सिर्फ एक सीट पर चुनाव कराया गया था. झारखंड की 14 लोकसभा सीटों पर चार चरणों में मतदान हुआ था. बिहार और उत्तर प्रदेश दो ऐसे राज्य थे, जहां सबसे ज्यादा सात चरणों में वोटिंग कराई गई थी. यहां बताना प्रासंगिक होगा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 29464 मतदान केंद्र बनाए गए थे. कुल 2,24,04,856 वोटर थे, जिनमें से 1,49,66,781 लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. एक मतदान केंद्र पर औसतन 760 वोटर थे. 229 उम्मीदवारों ने लोकसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें 202 की जमानत जब्त हो गई.
31 साल की उम्र में कई दिग्गजों को विजय ने दी मात
वर्ष 2014 में महज 31 साल की उम्र में विजय हांसदा ने लोकसभा का चुनाव राजमहल (एसटी) सीट से लड़ा और हेमलाल मुर्मू जैसे दिग्गज नेता को शिकस्त देकर झामुमो का झंडा बुलंद किया. उस वक्त बाबूलाल मरांडी ने भी अपना उम्मीदवार खड़ा किया था. जेवीएम (प्रजातांत्रिक) के डॉ अनिल मुर्मू को करीब एक लाख वोट मिले थे. अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित इस संसदीय सीट पर वर्ष 2009 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के देवीधन बेसरा ने जीत दर्ज की थी. झामुमो के हेमलाल मुर्मू को देवीधन बेसरा ने पराजित किया था. स्टीफन मरांडी ने भी जेएचजेएम के टिकट पर भाग्य आजमाया था, लेकिन उन्हें सिर्फ 58,025 वोट मिले और करारी शिकस्त झेलनी पड़ी.
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By Mithilesh Jha
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