सरकारी सड़क का इंतजार करते-करते थके ग्रामीण, अब खुद चंदा जुटाकर कर रहे मरम्मत
चंदा जुटा कर और श्रमदान कर सड़क बना रहे ग्रामीण | Prabhat Khabar Network
पलामू के पांकी प्रखंड में सरकारी उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने अपनी बदहाल सड़क खुद ही सुधारने का बीड़ा उठाया. उन्होंने चंदा जुटाया, मोरम मंगाया और श्रमदान कर सड़क की मरम्मत शुरू कर दी. यह पहल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ा संदेश है.
पिंटू कुमार सिंह की रिपोर्ट
पांकी (पलामू): जिले के पांकी प्रखंड की माड़न पंचायत के पचपेड़ी गांव में बदहाल सड़क से परेशान ग्रामीणों ने अब इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी खुद संभाल ली है. लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं होने से परेशान ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और ट्रैक्टर से मोरम मंगाकर सड़क पर गिराया. इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क की मरम्मत शुरू कर दी. ग्रामीणों की इस पहल की क्षेत्र में चर्चा हो रही है.
गड्ढों और जलजमाव से परेशान हैं ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, पचपेड़ी गांव की सड़क लंबे समय से जर्जर है. सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गये हैं. बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है. बारिश होने पर सड़क पर कीचड़ और जलजमाव के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. इससे सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजाना काम के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को होती है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांग की गयी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका.
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कुदाल लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण
सरकारी स्तर पर सड़क की मरम्मत नहीं होने के बाद ग्रामीणों ने बैठक कर आपसी सहयोग से समस्या का समाधान करने का निर्णय लिया. इसके बाद ग्रामीणों ने चंदा जुटाया और ट्रैक्टर से मोरम मंगाकर सड़क पर गिरवाया. फिर दर्जनों ग्रामीण कुदाल लेकर सड़क पर उतर गए. इस काम में पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल हुईं. ग्रामीणों ने मिलकर सड़क के गड्ढों को भरने और उसे आवागमन के लायक बनाने का काम शुरू किया. इस अभियान में शंकर उरांव, कामेश्वर उरांव, रामसहाय उरांव, रामदयाल उरांव, सूरज उरांव, ज्योति देवी, कविता देवी, रोहित उरांव, संदीप उरांव, लक्ष्मण उरांव समेत दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए.

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी है सड़क
ग्रामीणों ने कहा कि गांव की सड़क सिर्फ आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से भी जुड़ी है. सड़क खराब होने के कारण गांव के लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है. मरीजों को अस्पताल ले जाने से लेकर बच्चों के स्कूल आने-जाने तक पर खराब सड़क का असर पड़ता है.
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'चंदा और श्रमदान से कब तक चलेगा काम'
ग्रामीणों ने कहा कि चंदा जुटाकर मोरम डालना और श्रमदान करना तत्काल राहत देने का प्रयास है, लेकिन इससे सड़क की स्थायी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. सड़क निर्माण और मरम्मत की जिम्मेदारी सरकारी व्यवस्था की है. ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर वे कब तक अपनी जेब से पैसे खर्च कर सड़क बनाते रहेंगे और श्रमदान करते रहेंगे.
ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क का स्थायी निर्माण नहीं कराया गया और उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया जा सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पचपेड़ी गांव की सड़क का स्थायी निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि ग्रामीणों की ओर से शुरू किया गया श्रमदान प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए संदेश है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क की स्थायी समस्या का समाधान चाहिए.
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