कभी हुआ करता था पलामू प्रमंडल की शान ; अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा सतबरवा का टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, 2 सत्र से नामांकन बंद
बुनियादी विद्यालय के छोटा कमरा में सिमटा महाविद्यालय का ऑफिस | Prabhat Khabar Network
पलामू के सतबरवा स्थित प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय सरकारी उपेक्षा के कारण खंडहर बन चुका है. जानिए क्यों बंद हुई नामांकन प्रक्रिया और क्या है स्थिति.
सतबरवा से रमेश रंजन की रिपोर्ट सतबरवा (पलामू). जिले के सतबरवा स्थित प्राथमिक शिक्षक-शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय सरकारी और विभागीय लापरवाही के कारण बदहाल हो गया है. महाविद्यालय का भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है. स्थिति यह है कि कॉलेज का कार्यालय बुनियादी विद्यालय सतबरवा के एक छोटे से कमरे में संचालित हो रहा है. यहां कार्यरत कर्मियों को भी सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ रहा है.
महाविद्यालय के पास करीब 27 एकड़ जमीन
बताया जाता है कि शुरुआती दौर में महाविद्यालय के पास करीब 27 एकड़ जमीन थी. वर्ष 1954-55 में जमींदार मूरत महतो और खखनु पाठक ने तत्कालीन सरकार के आग्रह पर यह जमीन दान में दी थी. इसके बाद राज्य सरकार ने जमीन का अधिग्रहण कर प्राथमिक शिक्षक-शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय बनाने का निर्णय लिया था.
10 एकड़ जमीन पर कई सरकारी भवन
समय के साथ महाविद्यालय की जमीन का बड़ा हिस्सा दूसरे सरकारी भवनों के निर्माण में इस्तेमाल हो गया. करीब 10 एकड़ जमीन पर बीआरसी भवन, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, प्रखंड सह अंचल कार्यालय, बीडीओ-सीओ आवास, सतबरवा थाना, जलमीनार, पेंशनर भवन समेत कई सरकारी भवन बनाए जा चुके हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कर्मी ने बताया कि इन भवनों के निर्माण के लिए महाविद्यालय से एनओसी भी नहीं लिया गया. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
दोनों छात्रावास भी जर्जर
महाविद्यालय परिसर में दो छात्रावास हैं, लेकिन दोनों की स्थिति खराब है. एक छात्रावास पर कई वर्षों से एफसीआई का कब्जा बताया जा रहा है. वहीं दूसरा छात्रावास रखरखाव और मरम्मत के अभाव में काफी जर्जर हो चुका है. कॉलेज के खेल मैदान की स्थिति भी दयनीय है. वर्तमान में महाविद्यालय में दो क्लर्क और एक आदेशपाल कार्यरत हैं. विभागीय आदेश के बाद पिछले दो सत्रों से छात्रों का नामांकन भी बंद है.

कभी था पलामू प्रमंडल की पहचान
एक समय यह महाविद्यालय पलामू प्रमंडल के लिए गौरव का संस्थान माना जाता था. एकीकृत बिहार के पटना, सुपौल, गया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, हजारीबाग और रांची जैसे शहरों से छात्र यहां शिक्षक प्रशिक्षण लेने आते थे. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ते थे.
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अस्तित्व के लिए संघर्ष
आज वही संस्थान अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. महाविद्यालय की बदहाली और नए भवन निर्माण का मामला विधानसभा में भी उठाया जा चुका है. विभागीय अधिकारियों की ओर से शिक्षा सचिव समेत कई अधिकारियों को पत्र भी भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. महाविद्यालय की स्थिति को लेकर क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग में नाराजगी है.
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सदन में उठाया था मामला
डाल्टनगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक आलोक चौरसिया ने बताया कि प्राथमिक शिक्षक-शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय के नए भवन और चारदीवारी निर्माण की मांग को विधानसभा में उठाया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि एक बार फिर शिक्षा सचिव को मामले से अवगत कराया जाएगा.

दो सत्रों से नामांकन बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण
राज्य स्तरीय दिशा समिति के सदस्य अवधेश सिंह चेरो ने कहा कि सतबरवा के प्राइमरी टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में दो सत्रों से छात्रों का नामांकन बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे मेधावी और गरीब छात्रों पर असर पड़ेगा और कई युवाओं का शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग को इस मामले में गंभीरता से पहल करनी चाहिए. महाविद्यालय के नए भवन के निर्माण और छात्रों का नामांकन शुरू करने की दिशा में जल्द कदम उठाया जाना जरूरी है.

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