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बराही धाम गांव : जमीन से निकली मां दुर्गा की मूर्ति, हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा के साथ महायज्ञ संपन्न

पलामू के बराही धाम गांव में आयोजित श्री रामदूत हनुमान प्राण प्रतिष्ठा 51 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ पूर्णाहूति और भव्य भंडारा के साथ संपन्न हो गया. इसे भारत के महान संत 1008 श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के पाद सेवक जगतगुरु श्री सुंदर राज स्वामी के सानिध्य में किया गया.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand News: संत सम्मेलन में पहुंचे संत
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प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड के पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल के बराही धाम गांव में आयोजित श्री रामदूत हनुमान प्राण प्रतिष्ठा 51 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ पूर्णाहूति और भव्य भंडारा के साथ संपन्न हो गया. यह महायज्ञ भारत के महान संत श्री श्री 1008 श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के पाद सेवक जगतगुरु श्री सुंदर राज स्वामी के सानिध्य में किया गया. 2 मई को कलश यात्रा के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गयी थी. 3 मई से महायज्ञ शुरू हुआ था. इस दौरान 105 फीट हनुमान जी की मूर्ति पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गयी थी. प्रवचन के दौरान जमीन से मां दुर्गा की मूर्ति निकली. मुख्य यजमान महायज्ञ के संयोजक रंधीर कुमार सिंह और उनकी पत्नी संजना सिंह के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.

हेलिकॉप्टर से हुई पुष्प वर्षा

देश की पहली 105 फीट दक्षिण मुखी हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 7 मई को की गयी. यह अनुष्ठान जगतगुरु श्री सुंदर राज स्वामी जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार कर किया. जय श्री राम, जय हनुमान के जयघोष से पूरा वातावरण हनुमानमय हो गया था. इस प्राण प्रतिष्ठा में हेलिकॉप्टर द्वारा पुष्पवर्षा की गयी और 105 फीट के हनुमान जी की प्रतिमा का दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हुए. झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा था. प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान पूरा होने के बाद हेलिकॉप्टर से प्रतिमा पर पुष्प वर्षा की गई और गंगाजल का छिड़काव किया गया.

जमीन के नीचे से निकली शेर पर सवार मां दुर्गा की मूर्ति

महायज्ञ में प्रवचन के दूसरे दिन शिव मंदिर परिसर में बने प्रवचन स्थल से जमीन के अंदर से शेर पर सवार मां दुर्गा की प्रतिमा निकली. ये मूर्ति अष्टधातु की बनी हुई है. इसका वजन करीब 10 किलोग्राम है और डेढ़ फीट ऊंची है. आचार्य श्री रंगनाथ दुबे ने बताया कि स्वामी जी प्रवचन कर रहे थे. अचानक स्वामी जी मौन हो गए और फिर रो पड़े. उनकी आंखों के समक्ष एक तेज प्रकाश हुआ और उनके कानों में एक वाणी का आभास हुआ, जिसमें उन्हें सुनाई पड़ी कि महायज्ञ संपन्न हो जायेगा. लोग चले जायेंगे फिर इस धरती से बाहर कौन निकालेगा. वहां मौजूद साधु और श्रद्धालुओं जमीन खोदना शुरू किया, लेकिन मिट्टी कड़ी होने के कारण मिट्टी खोदने में काफी परेशानी हो रही थी. इसकी जानकारी मिलते ही महायज्ञ के संयोजक रंधीर कुमार सिंह और समिति के सदस्यों ने जेसीबी से खुदाई करायी.

जय माता दी के जयघोष से गूंजा परिसर

बताया जाता है कि करीब दो घंटे की खुदाई के बाद पांच फीट जमीन के अंदर से दुर्गा जी की मूर्ति निकली. मूर्ति निकलते ही वहां पर मौजूद लोगों ने जय माता दी का जयघोष करना शुरू कर दिया. मूर्ति निकलने की खबर बराही गांव और उसके आसपास गांवों में आग की तरह फैल गयी. लोगों का दर्शन के लिए आने का सिलसिला शुरू हो गया. फिर मां दुर्गा की मूर्ति की विधिवत पूजा की गयी. इसके बाद मूर्ति को देवी मंदिर में रख दिया गया.

रिपोर्ट : नौशाद

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