बीमार को अस्पताल और बच्चों को स्कूल जाना होता है मुश्किल

हैदरनगर/पलामू : प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलो मीटर दूर पहाड़ के समीप, कुछ वर्ष पूर्व सर्वाधिक उग्रवाद प्रभावित सोबा गांव का बाबू टोला आज भी सड़क विहीन है. इस टोला पर सभी जाति के लोग निवास करते हैं. टोला की आबादी करीब 900 है. ग्रामीण बताते हैं कि चुनाव के समय नेता आते हैं. […]
हैदरनगर/पलामू : प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलो मीटर दूर पहाड़ के समीप, कुछ वर्ष पूर्व सर्वाधिक उग्रवाद प्रभावित सोबा गांव का बाबू टोला आज भी सड़क विहीन है. इस टोला पर सभी जाति के लोग निवास करते हैं. टोला की आबादी करीब 900 है. ग्रामीण बताते हैं कि चुनाव के समय नेता आते हैं. लंबा चौड़ा वादा करके चले जाते हैं.
आजादी के 73 वर्ष बीत जाने के बावजूद इस टोला का विकास नहीं हो पाया है. टोला के ग्रामीणों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल ले जाने व बच्चों को स्कूल जाने में होती है. उन्होंने बताया कि अबतक जो भी मुखिया, विधायक व सांसद हुए उन्होंने इस टोले की सुध नहीं ली. जबकि ग्रामीण सभी के पास अपनी फरियाद सुना चुके हैं. उन्होंने बताया कि सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है.
किसी द्वारा सुनवाई नहीं हुई तो, ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले जनसहयोग से सड़क को पैदल चलने लायक बनाया है. उन्होंने बताया कि 15 वर्ष पहले सड़क पर मिट्टी मोरम डाला गया था. उसके बाद से उसपर कोई काम नहीं हुआ है. गत वर्ष सड़क में पुलिया निर्माण का कार्य कराया गया था. जिससे कुछ राहत मिली है. पैदल आना जाना हो पाता है. सड़क में पहली बार 15 वर्ष पहले मिट्टी मोरम डाला गया था, जबकि गत वर्ष सड़क में पुलिया का निर्माण कराया गया है.
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