जेल अदालत में चार कैदी रिहा
Updated at : 19 Nov 2018 1:55 AM (IST)
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मेदिनीनगर : रविवार को सेंट्रल जेल में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता सीजेएम एस के चौधरी ने की. जेल अदालत के तहत चार बंदियों को उनके दोष स्वीकारोक्ति के बाद रिहा किया गया. जिन बंदियों को रिहा किया गया, उनमें भोला […]
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मेदिनीनगर : रविवार को सेंट्रल जेल में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता सीजेएम एस के चौधरी ने की. जेल अदालत के तहत चार बंदियों को उनके दोष स्वीकारोक्ति के बाद रिहा किया गया. जिन बंदियों को रिहा किया गया, उनमें भोला राम, ददन राम, शाहीद अंसारी, शमशाद अंसारी का नाम शामिल है.
भोला राम का मुकदमा रेलवे कोर्ट से संबंधित था तथा अन्य तीन बंदियों के मुकदमे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय से संबंधित थे. चारों मामलों में बंदियों को रिहाई की जानकारी आन स्पॉट सुनवाई के बाद दी गयी.
मौके पर सीजेएम श्री चौधरी ने कहा कि बंदियों को अपने अधिकार के प्रति जागरूक होकर काम करना होगा. यहां से जाने के बाद पुनः अपराध नहीं हो, इस बात की पूरी तसल्ली होना जरूरी है. एक मामले में सुनवाई के दौरान सीजेएम श्री चौधरी ने कहा कि यहां जेल अदालत में रिहाई पाने वाले बंदी पुनः अपराध करके आते हैं, तो यह चिंतनीय विषय है.
एेसा नहीं हो, इस पर सभी बदी को विचार से आगे समाज में चलने की आवश्यकता है. मौके पर प्राधिकार के सचिव प्रफ्फुल कुमार ने बंदियों को प्ली बारगेनिंग कानून की जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए आवेदन संबंधित न्यायालय में दिया जा सकता है.
इसके साथ ही कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाती है. प्रक्रिया के तहत पीड़ित को कोर्ट से नोटिस देकर बुलाया जाता है तथा इसी के बाद बंदी के साथ बातचीत की प्रक्रिया पूरी की जाती है. मौके पर जेल में कार्यरत अधिवक्ता प्रकाश रंजन ने बंदियों को कानूनी जानकारी दी तथा प्राधिकार के तहत मिलने वाली सुविधा की के बारे में बताया.
जेल में कार्यरत पीएलवी ने बंदियों को अपने कार्य विषय के साथ उनकी कानूनी सुविधा विषयक जानकारी दी. इस दरम्यान उपस्थित बंदियों ने अपने मुकदमे में होने वाली कठिनाइयों, कानूनी कार्रवाई के बारे में जानना चाहा. मौके पर रेलवे मजिस्ट्रेट विक्रांत रंजन, जेल अधीक्षक प्रवीण कुमार उपस्थित थे. जेल अदालत में कुल आठ बंदियों ने अपने आवेदन देकर सुनवाई की इच्छा जाहिर की थी. जिसमें चार मामलों में चार बंदियों को सुनवाई के बाद रिहा किया गया.
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