भीषण गर्मी में बढ़ा मिट्टी के घड़े-सुराही का सहारा

Published at :21 Apr 2026 5:50 PM (IST)
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भीषण गर्मी में बढ़ा मिट्टी के घड़े-सुराही का सहारा

पाकुड़ में 42 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित हो गया है। तेज धूप के कारण बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा छाया हुआ है। लोग धूप से बचने के लिए गमछा और रूमाल का उपयोग कर रहे हैं। लो वोल्टेज की समस्या ने परेशानी और बढ़ा दी है। बढ़ते तापमान के साथ मिट्टी के बर्तनों जैसे मिट्टी के घड़े, सुराही और मटका फ्रिज की मांग तेज़ी से बढ़ी है। इनकी कीमतों में 30 से 40 रुपए तक बढ़ोतरी हुई है। डेसी फ्रिज बिजली पर निर्भर इलेक्ट्रॉनिक फ्रिज से बेहतर प्राकृतिक ठंडक देते हैं और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। डॉक्टर भी मिट्टी के बर्तनों में रखा पानी सुरक्षित बताते हैं, जिसके कारण लोग इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

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42 डिग्री तापमान में सड़कों पर सन्नाटा, मिट्टी बर्तनों की डिमांड प्रतिनिधि, पाकुड़ जिला मुख्यालय समेत प्रखंड मुख्यालय में इन दिनों गर्मी के तीखे तेवर से जनजीवन प्रभावित है. मंगलवार को चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया. अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके कारण दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा. घर से बाहर निकलने वाले लोग कड़ी धूप से बचने के लिए चेहरे पर गमछा और रूमाल लपेटकर निकलते नजर आए. शहर के कई इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया. जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों का रुझान पारंपरिक देसी फ्रिज यानी मिट्टी के घड़े, सुराही और मटका फ्रिज की ओर तेजी से बढ़ रहा है. मांग बढ़ने के कारण इनकी कीमतों में 30 से 40 रुपए तक की वृद्धि दर्ज की गई है. सुराही 200 से 300 रुपए, मिडिल साइज घड़ा 200 रुपए और बड़ा सुराही 300 रुपए में बिक रहा है. दुकानदारों के अनुसार महंगाई के बावजूद इस वर्ष बिक्री में पिछले साल की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. उनका कहना है कि कम कीमत और बिजली से राहत देसी फ्रिज के बढ़ते क्रेज का मुख्य कारण है. जहां इलेक्ट्रॉनिक फ्रिज पूरी तरह बिजली पर निर्भर होते हैं, वहीं मिट्टी के घड़े प्राकृतिक तरीके से पानी को ठंडा रखते हैं. डॉक्टरों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में रखा पानी स्वाभाविक रूप से ठंडा रहता है और यह गले तथा शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं होता. यही कारण है कि लोग स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए देसी विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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